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संकट: गोरखपुर में निगेटिव ग्रुप के खून की कमी, जानिए क्या है बड़ी वजह
Thu, 10 Jun 2021 09:39 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 10 Jun 2021 09:39 AM IST
सार
अस्पतालों में ओपीडी के साथ मरीजों की भर्ती भी होने लगी है शुरू। लावारिस, गर्भवती और खून की बीमारी वाले लोगों को बिना डोनर मिलता है खून।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
गोरखपुर जिले के ब्लड बैंकों में निगेटिव ग्रुप के खून की कमी हो गई है। डॉक्टरों का कहना है कि यह स्थिति कोरोना संकट के कारण उत्पन्न हुई है। लोग पॉजिटिव होने और कोरोना का टीका लगवाने के कारण रक्तदान नहीं कर पा रहे हैं। वहीं जिले में ओपीडी की शुरुआत हो गई है। ऐसे में ऑपरेशन कराने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ने से खून की मांग बढ़ी है।
जानकारी के मुताबिक, मार्च माह में जिले में संक्रमण की दर नाम मात्र की थी। औसतन आठ से 10 मरीज मिल रह थे। एक से लेकर 10 मार्च के बीच में दो से तीन दिन तक एक भी मरीज नहीं मिला था। विभाग यह मान रहा था कि अब कोविड का कहर समाप्त हो गया है। ऐसे में विभाग जिले को कोविड मुक्त करने की तैयारी में था। लेकिन अप्रैल माह में अचानक संक्रमण इस कदर बढ़ा कि चारों तरफ हाहाकर मच गया।
संक्रमण बढ़ने के साथ ब्लड डोनेशन कैंप पूरी तरह से बंद हो गए। स्थिति ऐसी रही कि पिछले ढाई महीने में सिर्फ एक बड़ा कैंप लगा है। इसमें 26 यूनिट रक्त मिल सका था।
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जानकारी के मुताबिक, मार्च माह में जिले में संक्रमण की दर नाम मात्र की थी। औसतन आठ से 10 मरीज मिल रह थे। एक से लेकर 10 मार्च के बीच में दो से तीन दिन तक एक भी मरीज नहीं मिला था। विभाग यह मान रहा था कि अब कोविड का कहर समाप्त हो गया है। ऐसे में विभाग जिले को कोविड मुक्त करने की तैयारी में था। लेकिन अप्रैल माह में अचानक संक्रमण इस कदर बढ़ा कि चारों तरफ हाहाकर मच गया।
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संक्रमण बढ़ने के साथ ब्लड डोनेशन कैंप पूरी तरह से बंद हो गए। स्थिति ऐसी रही कि पिछले ढाई महीने में सिर्फ एक बड़ा कैंप लगा है। इसमें 26 यूनिट रक्त मिल सका था।
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निगेटिव ग्रुप की हालत सबसे अधिक खराब
जिले में हर माह करीब सात हजार यूनिट रक्त की जरूरत लोगों को पड़ती है। वहीं जनपद में आठ ब्लड बैंक हैं। इनकी क्षमता करीब 12 हजार यूनिट की है। सामान्य दिनों में ब्लड बैंकों से सिर्फ छह हजार यूनिट की आपूर्ति होती है। कोविड के बाद यह आपूर्ति एक बंद सी हो गई है। ई-रक्तकोश पोर्टल के मुताबिक फातिमा हॉस्पिटल के ब्लड बैंक में निगेटिव ग्रुप का एक यूनिट भी रक्त नहीं है।
जिला अस्पताल में के ब्लड बैंक में 44 यूनिट ब्लड है। इसमें सिर्फ दो यूनिट निगेटिव ग्रुप का है। सावित्री हॉस्पिटल ब्लड बैंक में एक भी यूनिट नेगेटिव ग्रुप का खून नहीं है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 181 यूनिट ब्लड है। इसमें निगेटिव ग्रुप का सिर्फ 11 यूनिट रक्त है। जिले के सबसे बड़े ब्लड बैंक गोरखनाथ चिकित्सालय में 772 यूनिट खून मौजूद है। इसमें ओ निगेटिव के दो, बी निगेटिव के दो, ए निगेटिव का एक और एबी निगेटिव का एक यूनिट खून है।
टीका लगवाने के 14 दिन बाद कर सकते हैं रक्तदान
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक प्रभारी और एसआईसी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि कोविड का टीका लगवाने के 14 दिन कोई भी रक्तदान कर सकता है। इसके अलावा कोविड संक्रमित मरीज 28 दिन बाद रक्तदान कर सकते हैं। उन्होंने अपील की है कि लोग रक्तदान के लिए आगे आएं। ताकि जरूरतमंद लोगों की मदद की जा सके।
जिला अस्पताल में के ब्लड बैंक में 44 यूनिट ब्लड है। इसमें सिर्फ दो यूनिट निगेटिव ग्रुप का है। सावित्री हॉस्पिटल ब्लड बैंक में एक भी यूनिट नेगेटिव ग्रुप का खून नहीं है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 181 यूनिट ब्लड है। इसमें निगेटिव ग्रुप का सिर्फ 11 यूनिट रक्त है। जिले के सबसे बड़े ब्लड बैंक गोरखनाथ चिकित्सालय में 772 यूनिट खून मौजूद है। इसमें ओ निगेटिव के दो, बी निगेटिव के दो, ए निगेटिव का एक और एबी निगेटिव का एक यूनिट खून है।
टीका लगवाने के 14 दिन बाद कर सकते हैं रक्तदान
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक प्रभारी और एसआईसी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि कोविड का टीका लगवाने के 14 दिन कोई भी रक्तदान कर सकता है। इसके अलावा कोविड संक्रमित मरीज 28 दिन बाद रक्तदान कर सकते हैं। उन्होंने अपील की है कि लोग रक्तदान के लिए आगे आएं। ताकि जरूरतमंद लोगों की मदद की जा सके।