नगर निगम में आवंटित आवास के लिए 300 रुपये किराया देते हैं किराया, वसूलते हैं पांच हजार रुपये
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रसूखदारों को नगर निगम का आवास आवंटित किए जाने के मामले में एक आवंटी ने टू बीएचके (दो बेडरूम के सेट) आवास को 5000 रुपए मासिक किराए पर गोदाम के लिए उठा दिया है। इस आवास के लिए नगर निगम को वे मात्र 300 रुपये किराया दे रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, सपा नेता जगदीश यादव को नगर निगम की ओर से टाउनहाल उत्तरी गेट प्रथम तल पर आवास नंबर तीन आवंटित है। उनके बेटे मनोज कुमार यादव को भी बिल्कुल उससे सटा आवास संख्या चार आवंटित है। शुरुआत में तो वह अपने परिवार के साथ इस मकान में रहे, लेकिन बाद में तारामंडल इलाके में मकान बन जाने के बाद उन्होंने, इस आवास को चोखानी सर्जिकल को गोदाम के रूप में दे दिया।
इसके लिए वे चोखानी सर्जिकल से हर महीने करीब पांच हजार रुपये किराया वसूलते हैं। हालांकि जगदीश यादव के बेटे मनोज कुमार यादव ने आवास को किराए पर देने से इंकार किया है।
वर्ष 1994 और 1995 में आवंटित हुए थे ये आवास
चोखानी सर्जिकल के मालिक सुशील चोखानी ने बताया मैंने जगदीश यादव का मकान किराए पर लिया है। करीब पांच हजार रुपये किराया देता हूं। उन्होंने मुझे मकान खाली करने को कह दिया है। दो-तीन दिन में मकान खाली कर दूंगा।
जगदीश यादव और उनके बेटे मनोज कुमार यादव को यह आवास एक साल के अंतराल पर आवंटित हुआ था। मुख्य नगर अधिकारी के आदेश पर मई 1994 में जगदीश यादव को यह आवास किराएदारी के रूप में आवंटित हुआ, वहीं 1995 में मुख्य नगर अधिकारी के आदेश पर ही जगदीश यादव के बेटे मनोज कुमार यादव को नगर निगम ने किराएदारी के रूप में आवंटित कर दिया।
उस समय दोनों के आवासों का किराया प्रति माह 100 रुपये निर्धारित किया गया था। हरेक पांच साल पर किराए का रिन्यूअल होता है। ऐसे में अब तक तीन बार किराए का रिन्यूअल हो चुका है।
‘बाहरी और अवैध कब्जाधारियों से खाली कराएं आवास’
नगर निगम कर्मचारी समन्वय समिति ने बाहरी और अवैध कब्जाधारियों से नगर निगम के आवासों को खाली कराने की मांग की है। मंगलवार को नगर आयुक्त को ज्ञापन देकर समिति ने 66 आवासों को रसूखदारों से खाली कराकर, नगर निगम के कर्मचारियों को आवंटित करने की मांग की है।
नगर आयुक्त को दिए गए ज्ञापन में समिति के मंत्री अमृतपाल सिंह ने कहा कि कुछ आवास ऐसे कर्मचारियों को आवंटित कर दिए गए हैं, जिनका खुद का मकान शहर में है। उन्होंने आवास किराए पर दे दिया है। इसके अलावा कई आवासों में बाहरी और अवैध कब्जाधारी रह रहे हैं।
समिति के संरक्षक कौशल कुमार शुक्ल ने बताया कि मुख्यमंत्री, नगर विकास मंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को भी ज्ञापन की प्रतिलिपि भेजी गई है।
जलकल कर्मियों को नहीं मिला आवास
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि जलकल परिसर में नगर निगम के 19 कर्मचारी रहते थे, लेकिन वहां पार्किंग बनने से इनके आवासों को ध्वस्त कर दिया गया। इसके बाद से सिर्फ दो कर्मचारियों को ही आवास मिल सका, 17 कर्मचारी अब भी आवास से वंचित हैं।