गोरखपुर नगर निकाय चुनाव: वोटर बनने के लिए लोग परेशान, बीएलओ नदारद
एडीएम फाइनेंस का कहना है कि लापरवाह बीएलओ के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। जहां से शिकायत मिल रही है, वहां यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बीएलओ पहुंचे। निर्वाचन कार्यालय और तहसीलों में भी लोग वोटर बनने के आवेदन प्राप्त और जमा कर सकते हैं।
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बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की लापरवाही से शहर के कई मोहल्लों और नगर पंचायत क्षेत्रों में लोग वोटर बनने के लिए परेशान हैं। यह हाल तब है जबकि सदर तहसील और सहजनवां में लापरवाही पर 25 से अधिक बीएलओ पर कार्रवाई की संस्तुति की जा चुकी है। बावजूद इसके बीएलओ डोर-टू-डोर छोड़िए, कई मोहल्लों में ही नहीं पहुंच रहे हैं। 20 अक्तूबर वोटर बनने के लिए आवेदन की आखिरी तिथि है। ऐसे में एक बड़ी आबादी का नाम नगर निकाय की वोटर लिस्ट में दर्ज होने से छूट जाने की आशंका है।
पिछले नगर निकाय चुनाव के समय ही तमाम वोटरों के नाम मतदाता सूची से कट गए थे। मतदान के लिए बूथों पर पहुंचने के बाद कई लोगों को यह पता चला कि उनके नाम वोटर लिस्ट से कट गए हैं। ये लोग भी अपने मताधिकार को लेकर सतर्क हैं मगर, बीएलओ को ही नहीं तलाश पा रहे। विधानसभा और नगर निकाय के बीएलओ अलग-अलग होने की वजह से लोगों की मुश्किलें और बढ़ गईं हैं। जो किसी तरह नाम और नंबर तलाश भी ले रहे हैं तो ज्यादातर बीएलओ का मोबाइल बंद बता रहा है या फिर उधर से जवाब नहीं मिल रहा।
आजाद नगर पूर्वी स्थित भगवान चन्द का कहना है कि पिछले चुनाव में उनके पूरे परिवार समेत मोहल्ले के कई लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए। इस बार मतदाता पुनरीक्षण अभियान शुरू हुए 12 दिन का समय बीत गया और मोहल्ले में कोई बीएलओ ही नहीं आया। उन्होंने इसकी शिकायत निर्वाचन कार्यालय में भी की।
रामजानकी नगर के अविनाश सिंह का कहना है कि न तो कोई बीएलओ आया और न यही जानकारी हो पा रही है कि क्षेत्र का बीएलओ कौन है। इसी तरह की शिकायतें जगन्नाथपुर, रुस्तमपुर, सूरजकुंड, मोहद्दीपुर, खोराबार, सहारा एस्टेट, बिछिया, रानीबाग, पादरी बाजार, शाहपुर आदि मोहल्लों से भी आ रही है।
पढ़ने-लिखने में अक्षम सफाई कर्मियों को बीएलओ बनाने पर आक्रोश
इस मामले में एडीएम फाइनेंस का कहना है कि लापरवाह बीएलओ के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। जहां से शिकायत मिल रही है, वहां यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बीएलओ पहुंचे। निर्वाचन कार्यालय और तहसीलों में भी लोग वोटर बनने के आवेदन प्राप्त और जमा कर सकते हैं। वोटर लिस्ट से सिर्फ मृतकों का नाम कट सकता है। इसके अलावा नाम काटने पर संबंधित बीएलओ पर कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीण क्षेत्र में तैनात सफाई कर्मियों को नगरीय क्षेत्र के निकाय चुनाव के लिए बीएलओ बनाए जाने पर पंचायतीराज ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ ने विरोध जताया है। सोमवार को संघ के पदाधिकारियों की कलेक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में जिलाध्यक्ष रमेश कुमार भारती ने कहा कि सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति केवल साक्षर होने के प्रमाणपत्र पर हुई थी।
कहा कि जिन लोगों को बीएलओ जैसे महत्वपूर्ण कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उनमें से ज्यादातर पढ़ने-लिखने में अक्षम हैं। ऐसी दशा में वे काम कैसे करेंगे, काम नहीं करने पर प्रशासन कार्रवाई की चेतावनी दे रहा है। उन्होंने कहा कि सभी उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है कि सफाई कर्मचारियों के द्वारा लेखन कार्य में यदि किसी भी तरह की चूक होती है तो इसके लिए सफाई कर्मचारी जिम्मेदारी नहीं होंगे।
यदि कार्रवाई हुई तो संघ आंदोलन के लिए बाध्य होगा। बैठक का संचालन जिला महामंत्री ओम प्रकाश यादव, जिला कोषाध्यक्ष राममिलन पासवान, शंभूनाथ गौड़, जयगोविंद, लालमन यादव समेत कई सफाई कर्मचारी मौजूद रहे।