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Gorakhpur News: नगर आयुक्त ने पकड़ी बसपा शासनकाल में हुई गड़बड़ी, तीन कर्मी निलंबित
Sun, 31 Dec 2023 01:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sun, 31 Dec 2023 01:32 AM IST
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वर्ष 2007 के मामले में कार्यों से जुड़ीं फाइलों के गुम होने पर की गई कार्रवाई
मनमाने तरीके से हो रहा था काम, निगम को करोड़ों रुपये की क्षति
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। नगर आयुक्त ने बसपा शासनकाल में शहर के 11 गैंट्री गेट, यूनिपोल और बस यात्री शेल्टर के आवंटन से जुड़ी फाइलों के गुम होने पर तीन बाबुओं का निलंबित कर दिया है। इन फाइलों को लेकर मेयर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने दो बार पत्राचार किया था। इसका संज्ञान लेकर नगर आयुक्त ने अपर नगर आयुक्त निरंकार सिंह से गोपनीय जांच करवाई।
जांच में फाइलों के गायब होने पर वरिष्ठ लिपिक देवानंद तिवारी, कनिष्ठ लिपिक मोहम्मद रिजवान एवं नायब मोर्हिर (मुंशी) ज्ञान पांडेय को निलंबित कर दिया गया। दो फर्मों को लाभ देने के लिए बाबुओं की तरफ से गड़बड़ी की गई थी। ऐसे में इन फर्मों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
नगर निगम से मिली जानकारी के मुताबिक, मेयर से शिकायत की गई थी कि मेसर्स सेलवेल मीडिया सर्विस प्राइवेट लिमिटेड एवं मेसर्स सेपर्स इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड को वर्ष 2007 में शहर में आवंटित 11 गैंट्री गेट, बस यात्री शेल्टर और यूनिपोल के कार्य में बड़ी गड़बड़ी हुई है। इससे नगर निगम को वित्तीय क्षति होने के साथ नियमों को भी दरकिनार कर निजी लोगों को आर्थिक लाभ पहुंचाया गया है।
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मेयर ने इस संबंध में दो बार निगम प्रशासन से पत्राचार कर इस बाबत जानकारी मांगी, लेकिन जवाब नहीं आया। अंत में मेयर ने नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल से इन दोनों फर्मों से जुड़ी फाइलें उपलब्ध कराने को कहा था। नगर आयुक्त ने अपर नगर आयुक्त को फाइलों की जांच करने और उपलब्ध करवाने के लिए कहा। जांच के दौरान पता चला कि आवंटन की ये फाइलें ही गायब हैं।
सूत्र बताते हैं कि तीनों से फाइलों की जानकारी ली गई तो उन्होंने गलत पत्राचार भी किया। अंत में अपर नगर आयुक्त ने तीनों के निलंबन की संस्तुति के साथ नगर आयुक्त को पत्र लिखा। फाइलें गायब किए जाने के आरोप में तीनों बाबुओं को निलंबित कर दिया गया। अब माना जा रहा कि पूरे मामले की जांच भी की जाएगी।
करोड़ों रुपये के आर्थिक नुकसान की आशंका
निगम के सूत्रों ने बताया कि इसमें करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति की आशंका है। 2021 से 23 तक तो सांठगांठ से इन दोनों फर्मों ने एक भी रुपये नगर निगम में जमा नहीं करवाए थे। सूत्र ने बताया कि एक साइड प्रतिवर्ष दो लाख रुपये की होती है। ऐसे में 11 साइडों का प्रतिवर्ष 22 लाख रुपये हुए। ऐसे में इधर के तीन वर्ष जोड़ लें तो यह आंकड़ा 66 लाख हुआ, जबकि 2007 से ही इन फर्मों का आवंटन था। तभी से मेसर्स सेलवेल मीडिया सर्विस प्राइवेट लिमिटेड एवं मेसर्स सेपर्स इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड ने गैंट्री गेट, बस यात्री शेल्टर और यूनिपोल का आवंटन कराया था। सूत्रों ने बताया कि आवंटन सिर्फ 15 साल के लिए किया गया था। बदले में फर्म को सालाना 1875 रुपये प्रति गैंट्री गेट, बस यात्री शेल्टर एवं यूनिपोल निगम में जमा करना था। हर साल 10 फीसदी की सालाना शुल्क में बढ़ोतरी का भी प्रावधान किया गया था। ऐसे में आर्थिक क्षति तीन करोड़ रुपये से अधिक की है।
ये 11 गैंट्री गेट थे, जिनपर की कार्रवाई
नौसड़ से वाराणसी रोड पर, नौसड़ तिराहे पर, शास्त्री चौराहे से कचहरी चौक के बीच, जीडीए टॉवर के बीच में, विश्वविद्यालय चौक के पास, ट्रैफिक तिराहे से स्टेशन रोड पर, ट्रैफिक तिराहे से काली मंदिर रोड पर, धर्मशाला फ्लाई ओवर के अंत में काली मंदिर की तरफ, धर्मशाला फ्लाईओवर की शुरुआत में असुरन की तरफ, धर्मशाला फ्लाईओवर और तरंग फ्लाईओवर के बीच में, गोरखनाथ फ्लाई ओवर के पास तरंग क्राॅसिंग की तरफ।
वर्जन
2007 में आवंटित गैंट्री गेट में भारी गड़बड़ी की शिकायत मिली थी। कुछ दिनों बाद यूनिपोल और अन्य में भी गड़बड़ी मिली। मामले में पहले संबंधित विभाग को पत्र लिखकर उनसे इसकी पत्रावली मांगी गई थी। लेकिन चार बार मांगने पर नहीं दी गई। अंत में नगर आयुक्त को मामले की जानकारी दी गई। उन्होंने अपने स्तर से जांच करवा कर इस मामले में कार्रवाई कर दोषियों को निलंबित कर दिया।
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मनमाने तरीके से हो रहा था काम, निगम को करोड़ों रुपये की क्षति
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। नगर आयुक्त ने बसपा शासनकाल में शहर के 11 गैंट्री गेट, यूनिपोल और बस यात्री शेल्टर के आवंटन से जुड़ी फाइलों के गुम होने पर तीन बाबुओं का निलंबित कर दिया है। इन फाइलों को लेकर मेयर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने दो बार पत्राचार किया था। इसका संज्ञान लेकर नगर आयुक्त ने अपर नगर आयुक्त निरंकार सिंह से गोपनीय जांच करवाई।
जांच में फाइलों के गायब होने पर वरिष्ठ लिपिक देवानंद तिवारी, कनिष्ठ लिपिक मोहम्मद रिजवान एवं नायब मोर्हिर (मुंशी) ज्ञान पांडेय को निलंबित कर दिया गया। दो फर्मों को लाभ देने के लिए बाबुओं की तरफ से गड़बड़ी की गई थी। ऐसे में इन फर्मों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
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नगर निगम से मिली जानकारी के मुताबिक, मेयर से शिकायत की गई थी कि मेसर्स सेलवेल मीडिया सर्विस प्राइवेट लिमिटेड एवं मेसर्स सेपर्स इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड को वर्ष 2007 में शहर में आवंटित 11 गैंट्री गेट, बस यात्री शेल्टर और यूनिपोल के कार्य में बड़ी गड़बड़ी हुई है। इससे नगर निगम को वित्तीय क्षति होने के साथ नियमों को भी दरकिनार कर निजी लोगों को आर्थिक लाभ पहुंचाया गया है।
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मेयर ने इस संबंध में दो बार निगम प्रशासन से पत्राचार कर इस बाबत जानकारी मांगी, लेकिन जवाब नहीं आया। अंत में मेयर ने नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल से इन दोनों फर्मों से जुड़ी फाइलें उपलब्ध कराने को कहा था। नगर आयुक्त ने अपर नगर आयुक्त को फाइलों की जांच करने और उपलब्ध करवाने के लिए कहा। जांच के दौरान पता चला कि आवंटन की ये फाइलें ही गायब हैं।
सूत्र बताते हैं कि तीनों से फाइलों की जानकारी ली गई तो उन्होंने गलत पत्राचार भी किया। अंत में अपर नगर आयुक्त ने तीनों के निलंबन की संस्तुति के साथ नगर आयुक्त को पत्र लिखा। फाइलें गायब किए जाने के आरोप में तीनों बाबुओं को निलंबित कर दिया गया। अब माना जा रहा कि पूरे मामले की जांच भी की जाएगी।
करोड़ों रुपये के आर्थिक नुकसान की आशंका
निगम के सूत्रों ने बताया कि इसमें करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति की आशंका है। 2021 से 23 तक तो सांठगांठ से इन दोनों फर्मों ने एक भी रुपये नगर निगम में जमा नहीं करवाए थे। सूत्र ने बताया कि एक साइड प्रतिवर्ष दो लाख रुपये की होती है। ऐसे में 11 साइडों का प्रतिवर्ष 22 लाख रुपये हुए। ऐसे में इधर के तीन वर्ष जोड़ लें तो यह आंकड़ा 66 लाख हुआ, जबकि 2007 से ही इन फर्मों का आवंटन था। तभी से मेसर्स सेलवेल मीडिया सर्विस प्राइवेट लिमिटेड एवं मेसर्स सेपर्स इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड ने गैंट्री गेट, बस यात्री शेल्टर और यूनिपोल का आवंटन कराया था। सूत्रों ने बताया कि आवंटन सिर्फ 15 साल के लिए किया गया था। बदले में फर्म को सालाना 1875 रुपये प्रति गैंट्री गेट, बस यात्री शेल्टर एवं यूनिपोल निगम में जमा करना था। हर साल 10 फीसदी की सालाना शुल्क में बढ़ोतरी का भी प्रावधान किया गया था। ऐसे में आर्थिक क्षति तीन करोड़ रुपये से अधिक की है।
ये 11 गैंट्री गेट थे, जिनपर की कार्रवाई
नौसड़ से वाराणसी रोड पर, नौसड़ तिराहे पर, शास्त्री चौराहे से कचहरी चौक के बीच, जीडीए टॉवर के बीच में, विश्वविद्यालय चौक के पास, ट्रैफिक तिराहे से स्टेशन रोड पर, ट्रैफिक तिराहे से काली मंदिर रोड पर, धर्मशाला फ्लाई ओवर के अंत में काली मंदिर की तरफ, धर्मशाला फ्लाईओवर की शुरुआत में असुरन की तरफ, धर्मशाला फ्लाईओवर और तरंग फ्लाईओवर के बीच में, गोरखनाथ फ्लाई ओवर के पास तरंग क्राॅसिंग की तरफ।
वर्जन
2007 में आवंटित गैंट्री गेट में भारी गड़बड़ी की शिकायत मिली थी। कुछ दिनों बाद यूनिपोल और अन्य में भी गड़बड़ी मिली। मामले में पहले संबंधित विभाग को पत्र लिखकर उनसे इसकी पत्रावली मांगी गई थी। लेकिन चार बार मांगने पर नहीं दी गई। अंत में नगर आयुक्त को मामले की जानकारी दी गई। उन्होंने अपने स्तर से जांच करवा कर इस मामले में कार्रवाई कर दोषियों को निलंबित कर दिया।