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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Ms Shukla Enterprises sidelined contract in gorakhpur

Exclusive: मेसर्स शुक्ला इंटरप्राइजेज ने दरकिनार किया अनुबंध, जांच शुरू

Thu, 02 Dec 2021 03:33 PM IST
vivek shukla रोहित सिंह, गोरखपुर।
रोहित सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 02 Dec 2021 03:33 PM IST
सार

 आरोप है कि मेसर्स शुक्ला की तरफ से बिजली निगम को 45 लाख रुपये की चपत लगाने की कोशिश की गई है। यह मामला निगम के अफसरों ने पकड़ लिया है। लिहाजा, आगे का भुगतान रोक दिया गया है।

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Ms Shukla Enterprises sidelined contract in gorakhpur
केबल - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

एरियल बंच कंडक्टर (एबीसी) केबल बिछाने की अनुबंध शर्तों को दरकिनार करने के आरोप में कार्यदायी फर्म मेसर्स शुक्ला इंटरप्राइजेज के निदेशक वेद प्रकाश शुक्ला के खिलाफ जांच शुरू हो गई है। मुख्य अभियंता राजेंद्र प्रसाद ने चौरीचौरा के अधिशासी अभियंता मनीष झा व लेखाकार इम्तियाज अहमद को जांच देकर जल्द ही रिपोर्ट तलब की है।
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 रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। आरोप है कि मेसर्स शुक्ला की तरफ से बिजली निगम को 45 लाख रुपये की चपत लगाने की कोशिश की गई है। यह मामला निगम के अफसरों ने पकड़ लिया है। लिहाजा, आगे का भुगतान रोक दिया गया है।
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गोरखपुर में एबीसी केबल डालने का टेंडर निकाला गया था। निगम ने 3.08 करोड़ का बिड तय किया था, लेकिन मेसर्स शुक्ला इंटरप्राइजेज 3.53 करोड़ रुपये का टेंडर डाल दिया। यह निर्धारित मानक से 45 लाख रुपये ज्यादा था। यानी फर्म ने 12.73 प्रतिशत रेट बढ़ा दिया। इसके बाद टेंडर भी मिल गया। निगम की तरफ से शर्त रखी गई कि घोषित धनराशि में ही फर्म को काम करवाना पड़ेगा। अगर फर्म इन शर्तों पर काम नहीं कर सकेगी, तो टेंडर को निरस्त कर दोबारा टेंडर निकाला जाएगा। इसपर सहमति बनी।
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तय हुआ कि जो बढ़ी धनराशि पर काम आवंटित हुआ है, उसमें से घोषित धनराशि के बीच की रकम को घटाकर अपने बिल को प्रस्तुत करना होगा। इसके बाद लेटर ऑफ इंटेंट( एलओआई) जारी कर काम आवंटित कर दिया गया। फर्म ने समय से काम भी पूरा कर लिया। तीन बार भुगतान भी हो गया लेकिन निगम के 45 लाख रुपये की चिंता नहीं की गई। इसी का संज्ञान बिजली निगम ने लिया है।

नियम दरकिनार करके कराया भुगतान

मेसर्स शुक्ला इंटरप्राइजेज ने काम पूरा किया और अलग-अलग खंडों से भुगतान के लिए बिल भेज दिया। खंड द्वितीय से 2.11 करोड़, खंड तृतीय से 83.40 लाख व 23.77 लाख रुपये चतुर्थ खंड से भुगतान भी हो गया। इस भुगतान राशि में फर्म की तरफ से अनुबंध की शर्त के अनुसार 45 लाख रुपये की राशि को खंडवार या तीनों खंड के भुगतान के बाद एक साथ नहीं किया गया।


अनियमितता या अन्य किसी प्रकार की बात गलत है। निगम की तरफ से पत्र मिला है। हमने जवाब दे दिया है। समझौता जितने का हुआ था, उससे कम का बिल दिया गया है। - वेद प्रकाश शुक्ला, निदेशक मेसर्स शुक्ला इंटरप्राइजेज
 
मेसर्स शुक्ला इंटरप्राइजेज के कामों की जांच कराई जा रही है। दो सदस्यीय कमेटी को जांच करके रिपोर्ट देनी है। - राजेंद्र प्रसाद, मुख्य अभियंता
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