सांसद अमर सिंह स्मृति शेष: आरएसएस को दान कर दिया था करोड़ों की कीमत का बंगला
- आजमगढ़ के बंगले में रहकर 30 वनवासी विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे
- आरएसएस गोरक्ष प्रांत के नाम से की थी रजिस्ट्री, पदाधिकारियों ने दी श्रद्धांजलि
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दिवंगत राज्यसभा सांसद अमर सिह को आरएसएस गोरक्ष प्रांत की इकाई हमेशा याद रखेगी। सांसद ने अपना आजमगढ़ का बंगला आरएसएस गोरक्ष प्रांत को दिया था। इस बंगले को वनवासी कल्याण छात्रावास के रूप में तब्दील कर दिया गया है। प्रांत प्रचारक सुभाष के मुताबिक आजमगढ़ के छात्रावास में 30 विद्यार्थी रह रहे हैं।
आरएसएस गोरक्ष प्रांत में गोरखपुर, बस्ती और आजमगढ़ मंडल हैं। इन मंडलों से संबंधित गतिविधियों का संचालन प्रांत प्रचारक व उनकी टीम करती है। प्रांत प्रचारक सुभाष का कहना है कि दिवंगत सांसद का योगदान समाज के लिए बहुत बड़ा है। भगवान उनकी पुण्य आत्मा को शांति प्रदान करें।
उन्होंने जो बंगला आरएसएस को दान किया था, उसमें जरूरतमंद विद्यार्थी रह रहे हैं। उनकी शिक्षा-दीक्षा का काम चल रहा है। आजमगढ़ के इस छात्रावास में एक बड़ा कार्यक्रम भी हो चुका है। सेवा भारती के प्रांत मंत्री डॉ राजेश चंद्र गुप्ता का कहना है कि आजमगढ़ के तरवां में अमर सिंह की संपत्ति करोड़ों में थी, फिर भी दान कर दी।
अब वनवासी बच्चे उसमें रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। अमर सिंह को विनम्र श्रद्धांजलि दी गई है। सेवा प्रमुख नवल किशोर, प्रांत सेवा प्रमुख डॉ. राकेश सिंह, प्रांत प्रचारक
यशोदानंद, सेवा भारती के प्रांत अध्यक्ष महेंद्र अग्रवाल ने भी सांसद के निधन पर दुख व्यक्त किया है।
गोरखपुर से गहरा था नाता
दिवंगत सांसद भले ही आजमगढ़ के रहने वाले थे लेकिन उनका गोरखपुर से गहरा नाता था। जब भी गोरखपुर आते थे तो गुरु गोरखनाथ का दर्शन-पूजन करते थे। उनकी भगवान शिव में गहरी आस्था थी।
कद्दावर नेताओं में शुमार अमर सिंह के कई खास मित्र गोरखपुर में हैं। उनका पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह और सहारा प्रमुख सुब्रत राय सहारा से खास लगाव था।
पदयात्रा निकाली थी
सपा से मनमुटाव के बाद अमर सिंह ने पूर्वांचल यात्रा निकाली थी। इसका मुख्य केंद्र गोरखपुर था। सुभाष चौराहे पर बड़ी जनसभा हुई थी। इसकी अगुवाई किसान मोर्चे के अंशुमान सिंह ने किया था।
आखिरी बार 2018 में आए थे
दिवंगत नेता कई बार गोरखपुर आए थे। 2017 में गोरखपुर के लिटरेरी फेस्ट में भी आना हुआ था। सेंट एंड्रयूज कॉलेज परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में वेबाक राय रखी थी।
वह आखिरी बार 2018 में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के प्रबुद्ध प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपक मिश्रा के भाई वैभव मिश्रा की सगाई में आए थे। तब बयान दिया था कि जिन्ना के प्रशंसक देशभक्त नहीं हो सकते हैं।
राममनोहर लोहिया और पंडित दीनदयाल उपाध्याय की सोच को एक जैसा बताया था। दीपक मिश्रा का कहना है कि अमर सिंह रिश्ता निभाना जानते थे। भगवान शिव में आस्था रखने वाले अमर सिंह का निधन भी सावन में हुआ। वह अध्ययनशील व्यक्ति थे। तबीयत खराब थी, फिर गोरखपुर आए। दुर्भाग्य रहा कि वही अंतिम दौरा हो गया।
अमर सिंह की वजह से ही गोरखपुर में गैलेंट इस्पात की स्थापना
जब यूपी औद्योगिक विकास बोर्ड के अध्यक्ष थे तो गोरखपुर में गैलेंट समूह का प्रतिष्ठान स्थापित कराने में बड़ा योगदान दिया। कहा जाए तो उन्हीं की वजह से 2005-2006 के दौरान गोरखपुर में गैलेंट इस्पात की स्थापना हुई। गोरखपुर के लिटरेरी फेस्ट में आए तो हमारे घर पर ही रुके थे। तमाम मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
सिंगापुर इलाज कराने जा रहे थे तो भी नई दिल्ली में मुलाकात हुई थी। व्हील चेयर पर बैठकर भी मुस्कुरा रहे थे। कहा कि चंद्र प्रकाश जी तीन महीने में इलाज कराके आ जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हो सका। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। उनका व्यक्तिगत स्नेह मिलता था।