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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   More than 50 pits in Domingarh Gahasad dam 11 km

गोरखपुर में बारिश नहीं आएगी आफत!: 11 KM में 50 से ज्यादा गड्ढे, राप्ती-रोहिन उफनाईं तो ढूंढते रह जाएंगे बंधा

Thu, 22 Jun 2023 02:54 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 22 Jun 2023 02:54 PM IST
सार

राप्ती नदी के किनारे डोमिनगढ़ पुल से गाहासाड़ तक 11 किलोमीटर लंबाई में बांध बना हुआ है। डोमिनगढ़ से बंधा शुरू होते ही एक ओर रोहिन तो दूसरी ओर राप्ती नदी है। इस बंधे पर पीडब्ल्यूडी के निर्माण खंड तीन की ओर से वर्ष 2021 में पिच रोड बनाकर चौड़ीकरण कराया गया था।

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More than 50 pits in Domingarh Gahasad dam 11 km
डोमिनगढ़ से कौड़ियां फोरलेन जाने वाले बंधे की धंसी सड़क। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

मानसून सिर पर है। अभी तक लोग लू और गर्मी से बेहाल थे, लेकिन अब बंधों में बने बड़े-बड़े होल और कटान से डर लगने लगा है। सीएम के निर्देश के बावजूद अफसरों ने इन बांधों की मरम्मत ही नहीं कराई। करीब 11 किलोमीटर में बने डोमिनगढ़-गाहासाड़ बांध को ही ले लीजिए।

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शहर के पश्चिमी सीमा की सुरक्षा के लिए इसे बनाया गया है। इस बांध पर छोटे-बड़े मिलाकर 50 से ज्यादा गड्ढे हो गए हैं। ये गड्ढे भी नदी की छोर की ओर हैं। यानी अगर राप्ती और रोहिन उफनाईं तो इन बांधों के टूटने का खतरा बढ़ जाएगा।
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राप्ती नदी के किनारे डोमिनगढ़ पुल से गाहासाड़ तक 11 किलोमीटर लंबाई में बांध बना हुआ है। डोमिनगढ़ से बंधा शुरू होते ही एक ओर रोहिन तो दूसरी ओर राप्ती नदी है। इस बंधे पर पीडब्ल्यूडी के निर्माण खंड तीन की ओर से वर्ष 2021 में पिच रोड बनाकर चौड़ीकरण कराया गया था।
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दरअसल बाढ़ आने पर राप्ती का पानी बंधे तक चढ़ जाता है। डोमिनगढ़ से आगे बढ़ने पर अवध चौराहा है। यहां पर दोनों ओर सड़क की पटरियां धंसी हुई हैं। इसे पाटने के लिए करीब आधा किमी तक जगह-जगह मिट्टी का ढेर रखा गया है। लेकिन, गड्ढे को भरा ही नहीं गया। इस बांध पर उत्तरासोत गांव के सामने चार जगह रेन कट हैं। जबकि, यह बांध वर्ष 2017 में आई बाढ़ में टूट गया था और कई गांव बाढ़ में डूब गए थे।

इससे कुछ ही दूरी बढ़ने पर निषाद चौराहा है। यहां बांध के दोनों तरफ सड़क के किनारे रेन कट बने हुए हैं। पिछले मानसून में हुए कटान को अब तक नहीं भरा गया है। तपती दोपहरी में कोलिया गांव की ओर से बंधे पर रविंद्र और रुपेश आ रहे थे। उनसे जब पूछा गया कि सभी जगहों पर सड़क ऐसी है क्या?

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वे बोलेः हां, काफी दिनों से बुरा हाल है। पानी बरसने दीजिए, इसके बाद देखिए क्या होता है। बंधे पर एक ढेला भी नहीं डाला गया। हम लोग तो डरे हुए हैं। जब भी नदी में पानी बढ़ता है तो डर रहता है कि बंधा टूट न जाए। अभी बातचीत चल ही रही थी कि तभी रामजनम आ गए। बोले, आप कोलिया तिराहा से आगे बढ़ते जाइए। सड़क के दोनों ओर पांच से छह फीट के गड्ढे मिलेंगे। इसे अब तक ठीक करा लेना चाहिए था, मगर अब तो भगवान ही मालिक है..।

गड्ढों से बचकर नहीं निकले तो दुर्घटना तय
बरसात के मौसम में नदी के किनारे बांध की हालत देखकर कोई डर जाएगा। बांध की एक तरफ राप्ती नदी का पाट तो दूसरी ओर कोलिया, घुनघुनकोठा, मंझरिया, उतरासोत सहित आधा दर्जन से अधिक गांव बसे हुए हैं। बांध पर जब सड़क बनी तो लोगों को लगा कि अब वे सुरक्षित हो गए हैं। लेकिन, सड़क के बड़े गड्ढे लोगों को डरा रहे हैं। कोलिया से लेकर जगतबेला गांव तक सड़क पर दोनों ओर करीब 130 छोटे बड़े गड्ढे नजर आए।

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नदी की ओर देख रहे थे, बाल-बाल बचे बाइक सवार

More than 50 pits in Domingarh Gahasad dam 11 km
डोमिनगढ़ से कौड़ियां फोरलेन जाने वाले बंधे की धंसी सड़क पर डाली गई मिट्टी। - फोटो : अमर उजाला।

स्थानीय लोगों का कहना है कि आए दिन गड्ढों की वजह से दुर्घटना होती है। बारिश होने पर ये गड्ढे जानलेवा हो जाएंगे। बाढ़ आने पर बांध को बचाना मुश्किल होगा। उतरासोत गांव के पास गड्ढे में बाइक सवार दो युवक गिरने से बाल-बाल बच गए। गोरखपुर से सहजनवां की ओर जा रहे दोनों युवक नदी की तरफ चल रही जेसीबी देख रहे थे। तभी अचानक गड्ढा आ गया। बाइक चला रहे राहुल ने तेजी से ब्रेक लिया, जिससे दुर्घटना टल गई।

पांच फीट से अधिक गड्ढे, दूर से नहीं आते नजर
बांध में सड़क पर पांच से छह फीट के गड्ढे हो गए हैं। यह गड्ढे दूर से नजर नहीं आते हैं। गोविंदपुर टिकरियां गांव के सामने नदी की ठोकर के पास सौ मीटर की दूरी पर तीन बड़े गड्ढे हैं, जिनमें झाड़-झंखाड़ डाला गया है, जिससे लोग ध्यान दे सकें। यहां से गुजर रहे टिकरिया गांव के आशीष ने बताया कि रात में कार लेकर चलने वाले अक्सर परेशान होते हैं। छोटी-मोटी दुर्घटनाएं अक्सर होती हैं, क्योंकि यह गड्ढे दूर से नहीं नजर आते हैं।

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बांध, सड़क की मरम्मत नहीं हुई तो इन गांवों पर खतरा
राप्ती नदी किनारे बने बांध की मरम्मत नहीं हुई तो जगतबेला, उतरासोत, कोलिया, मंझरिया, मझगांवा, सिहुरिया, सेमरा, भंडारो, अवई पाकड़, कजनहवा आदि गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराएगा। ग्रामीणों का कहना है कि राप्ती नदी में बाढ़ के कारण घुनघुनकोठा गांव के पास बांध टूटा था, जिससे तबाही मची थी।

पिछले बरसात में ही बने थे गड्ढे

घुनघुनकोठा निवासी रविंद्र निषाद ने कहा कि करीब दो साल पहले सड़क बनी थी। पिछले बरसात में ही जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं। लेकिन, अभी तक इसे ठीक नहीं किया गया है। जबकि, नदी में जब पानी बढ़ता है तो बांध पर दबाव अधिक रहता है। इस हाल में बांध रहा तो पानी रिसाव होगा ही।

जब बांध टूटेगा तक दौड़ेगे
कोलियां निवासी राजेश ने कहा कि बांध जब टूटेगा तब अधिकारी दौड़ेंगे। इसके पहले यहां कोई नहीं आता है। मानसून आया नहीं है, अभी भी वक्त है। यदि काम करा दिया जाए तो आने वाली मुसीबत टल जाएगी।

खलीलाबाद निवासी राहुल विश्वकर्मा ने कहा कि मैं नदी की तरफ चल रहे जेसीबी देख रहा था। अचानक गड्ढा आ गया है। गनीमत रही कि पहले ही ब्रेक लिया, वरना दुर्घटना हो जाती। बारिश होने पर आना-जाना मुश्किल हो जाएगा।

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उतरासोत कोट निवासी शैलेष गुप्ता ने कहा कि हम लोग कई बार बांध की मरम्मत कराने की मांग कर चुके हैं। लेकिन, कोई ध्यान नहीं दे रहा है। यह बांध एक बार टूट भी चुका है। अभी भी समय है कि इसकी ठीक से मरम्मत कराई जाए। ताकि, बाढ़ में दिक्कत न आने पाए।

निर्माण खंड -3 पीडब्ल्यूडी अधिशासी अभियंता अरविंद कुमार ने कहा कि बांध पर बने सड़क पर अगर गड्ढे बन गए हैं तो इसकी जांच कराकर मरम्मत कराएंगे। क्षेत्र के अवर अभियंता को मौके पर भेजा जाएगा। वैसे समय-समय पर पीडब्ल्यूडी की ओर से सड़कों की मरम्मत कराई जाती है।

सिंचाई विभाग अधीक्षण अभियंता दिनेश सिंह ने कहा कि अब यह देखना जरूरी है कि सड़क टूटी है या बांध का हिस्सा क्षतिग्रस्त है। रेन कट्स और रेट होल को भरने के लिए कहा गया है। जांच कराकर मरम्मत कराएंगे और अगर लापरवाही बरती गई है तो कार्रवाई भी की जाएगी।



 
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