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समस्या: आर्थिक तंगी से जूझ रहे आधुनिक मदरसा शिक्षक, अप्रैल 2017 से केंद्र सरकार ने नहीं जारी किया मानदेय का हिस्सा
Wed, 09 Jun 2021 02:30 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 09 Jun 2021 02:30 PM IST
सार
लॉकडाउन में आय के दूसरे स्रोत भी बंद होने से परेशान हैं शिक्षक।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मदरसों में गणित, विज्ञान, अंग्रेजी आदि आधुनिक विषय पढ़ाने वाले गोरखपुर जिले के 450 आधुनिक मदरसा शिक्षक आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। कारण, इन टीचरों के मानदेय का 80 फीसदी केंद्रांश बीते चार साल से जारी ही नहीं हुआ है। कोरोना महामारी में लॉकडाउन लागू होने से आय के दूसरे स्रोत भी बंद हो गए।
मदरसा टीचर आसिफ महमूद का दस वर्षीय बेटा गंभीर वंशानुगत बीमारी मेजर थैलेसीमिया से जूझ रहा है। बेटे को हर महीने खून चढ़वाना पड़ता है और उसके इलाज में हर महीने मोटी रकम खर्च होती है। आसिफ सामान्य दिनों में ट्यूशन और कोचिंग पढ़ाकर उससे होने वाली कमाई बेटे के इलाज पर खर्च करते थे। उनका कहना है कि लॉकडाउन में लोगों ने ट्यूशन लेना बंद कर दिया तो आय का यह स्रोत भी बंद हो गया। बेटे के इलाज और परिवार का खर्च चलाने के लिए बुजुर्ग अम्मी-अब्बू पर निर्भर हैं।
सैयद महताब अनवर पीपीगंज स्थित मदरसा इस्लामिया जियाउल उलूम में विज्ञान शिक्षक हैं। उन्होंने बताया कि अंतिम बार मार्च 2017 में केंद्रांश और राज्यांश का पूरा 15000 रुपये मानदेय मिला था। अप्रैल 2017 के बाद से राज्यांश के रूप में तीन हजार रुपये प्रतिमाह की दर से मानदेय मिल रहा है। राज्यांश का भुगतान भी दो-तीन माह में ही होता है। इतने से परिवार का गुजारा नहीं होता है। लॉकडाउन में परिवार चलाने के लिए वह दोस्त और रिश्तेदारों से उधार लेकर काम चला रहे हैं।
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मदरसा टीचर आसिफ महमूद का दस वर्षीय बेटा गंभीर वंशानुगत बीमारी मेजर थैलेसीमिया से जूझ रहा है। बेटे को हर महीने खून चढ़वाना पड़ता है और उसके इलाज में हर महीने मोटी रकम खर्च होती है। आसिफ सामान्य दिनों में ट्यूशन और कोचिंग पढ़ाकर उससे होने वाली कमाई बेटे के इलाज पर खर्च करते थे। उनका कहना है कि लॉकडाउन में लोगों ने ट्यूशन लेना बंद कर दिया तो आय का यह स्रोत भी बंद हो गया। बेटे के इलाज और परिवार का खर्च चलाने के लिए बुजुर्ग अम्मी-अब्बू पर निर्भर हैं।
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सैयद महताब अनवर पीपीगंज स्थित मदरसा इस्लामिया जियाउल उलूम में विज्ञान शिक्षक हैं। उन्होंने बताया कि अंतिम बार मार्च 2017 में केंद्रांश और राज्यांश का पूरा 15000 रुपये मानदेय मिला था। अप्रैल 2017 के बाद से राज्यांश के रूप में तीन हजार रुपये प्रतिमाह की दर से मानदेय मिल रहा है। राज्यांश का भुगतान भी दो-तीन माह में ही होता है। इतने से परिवार का गुजारा नहीं होता है। लॉकडाउन में परिवार चलाने के लिए वह दोस्त और रिश्तेदारों से उधार लेकर काम चला रहे हैं।
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जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यालय के मुताबिक, जिले में 150 आधुनिक मदरसे पंजीकृत हैं। इनमें गणित, विज्ञान और अंग्रेजी विषय पढ़ाने के लिए शिक्षक तैनात किए गए थे। स्नातक शिक्षक को 12000 और परास्नातक शिक्षक को 15000 रुपये मानदेय दिया जाना है। स्नातक शिक्षक को केंद्र से दस हजार और राज्य से दो हजार रुपये, जबकि परास्नातक को केंद्र से 12000 और राज्य सरकार की ओर से तीन हजार रुपये दिए जाने हैं।
यह स्कीम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में लागू की गई थी। तब इस मद में सात करोड़ रुपये बजट आवंटित किया गया था। इसके बाद सभी राज्यों में आधुनिक मदरसा शिक्षक भर्ती किए गए तो बजट बढ़कर करीब ढाई सौ करोड़ रुपये पहुंच गया। तब से केंद्र की ओर से बजट जारी नहीं किया जा रहा है, जबकि खर्च हर साल बढ़ता जा रहा है।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आशुतोष कुमार पांडेय ने बताया कि आधुनिक मदरसा शिक्षकों को राज्यांश जारी किया जा रहा है, लेकिन अप्रैल 2017 से केंद्रांश नहीं मिला है। बकाया राशि कब और किस तरह दी जाएगी, यह निर्णय शासन स्तर पर लिया जाता है। जो भी शासन का निर्णय होगा, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
यह स्कीम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में लागू की गई थी। तब इस मद में सात करोड़ रुपये बजट आवंटित किया गया था। इसके बाद सभी राज्यों में आधुनिक मदरसा शिक्षक भर्ती किए गए तो बजट बढ़कर करीब ढाई सौ करोड़ रुपये पहुंच गया। तब से केंद्र की ओर से बजट जारी नहीं किया जा रहा है, जबकि खर्च हर साल बढ़ता जा रहा है।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आशुतोष कुमार पांडेय ने बताया कि आधुनिक मदरसा शिक्षकों को राज्यांश जारी किया जा रहा है, लेकिन अप्रैल 2017 से केंद्रांश नहीं मिला है। बकाया राशि कब और किस तरह दी जाएगी, यह निर्णय शासन स्तर पर लिया जाता है। जो भी शासन का निर्णय होगा, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।