{"_id":"61901e3172a40322b32e59cb","slug":"mmmut-to-improve-agriculture-monitoring-system-with-nabard-gorakhpur-city-news-gkp4162464190","type":"story","status":"publish","title_hn":"नाबार्ड के साथ एग्रीकल्चर मानिटरिंग सिस्टम को बेहतर बनाएगा एमएमएमयूटी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नाबार्ड के साथ एग्रीकल्चर मानिटरिंग सिस्टम को बेहतर बनाएगा एमएमएमयूटी
विज्ञापन
नाबार्ड के साथ एग्रीकल्चर मॉनिटरिंग सिस्टम को बेहतर बनाएगा एमएमएमयूटी
गोरखपुर। नाबार्ड के साथ मिलकर एमएमएमयूटी ड्रोन आधारित एग्रीकल्चर मॉनिटरिंग सिस्टम को और बेहतर बनाएगा। इसे मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) ने खेती-किसानी में किसानों की मदद के लिए विकसित किया है। नाबार्ड (नेशनल बैंक फार एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलेपमेंट) एमएमएमयूटी को आर्थिक सहयोग करने के साथ ही देश भर में इसकी खूबियों का प्रचार-प्रसार भी करेगा। साथ ही देश के अन्य भागों के इच्छुक किसानों को इसका लाभ दिलाएगा।
इसके लिए एमएमएमयूटी और नाबार्ड के बीच अनौपचारिक सहमति बन गई है। इसे औपचारिक रूप देने के लिए जल्द विश्वविद्यालय परिसर में एक कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें विश्वविद्यालय और नाबार्ड के बीच एमओयू (मेमोरेंडम और अंडरस्टैंडिंग) पर दस्तखत किए जाएंगे। एग्रीकल्चर मॉनिटरिंग सिस्टम के बारे में जानकारी देते हुए कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने बताया कि विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन विभाग के आचार्यों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने ड्रोन आधारित एक ऐसा यंत्र बनाया है, जो बेहतर खेती के लिए किसानों का मार्ग दर्शन करेगा। इससे किसानों को कम खर्च और कम मेहनत में उम्मीद से अधिक उपज प्राप्त होगी ही, साथ ही उनकी आमदनी में भी इजाफा होगा।
रामलखना बुजुर्ग में हो चुका है सफल ट्रायल
आर्टिफिशियल इंटेलिजेस के इस्तेमाल से बनाए गए ड्रोन आधारित एग्रीकल्चर मॉनिटरिंग सिस्टम का विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए खोराबार क्षेत्र के गांव रामलखना बुजुर्ग में सफल ट्रायल भी किया जा चुका है। ट्रायल के दौरान सेंसरयुक्त ड्रोन से खेत में कीटनाशक दवा का छिड़काव किया गया था।
विज्ञापन
किसानों को मिलेगी ये जानकारी
मिट्टी में नमी की स्थिति की जानकारी।
मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और अन्य सूक्ष्म तत्व की स्थिति की
जानकारी।
खेत की क्षमता के मुताबिक फसल और उसकी पैदावार की संभावना।
कीटों और रोगों से बचाव के लिए मिलेगी उपयुक्त सलाह।
कम समय में अधिक से अधिक क्षेत्र में कीटनाशक का छिड़काव।
विज्ञापन
गोरखपुर। नाबार्ड के साथ मिलकर एमएमएमयूटी ड्रोन आधारित एग्रीकल्चर मॉनिटरिंग सिस्टम को और बेहतर बनाएगा। इसे मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) ने खेती-किसानी में किसानों की मदद के लिए विकसित किया है। नाबार्ड (नेशनल बैंक फार एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलेपमेंट) एमएमएमयूटी को आर्थिक सहयोग करने के साथ ही देश भर में इसकी खूबियों का प्रचार-प्रसार भी करेगा। साथ ही देश के अन्य भागों के इच्छुक किसानों को इसका लाभ दिलाएगा।
इसके लिए एमएमएमयूटी और नाबार्ड के बीच अनौपचारिक सहमति बन गई है। इसे औपचारिक रूप देने के लिए जल्द विश्वविद्यालय परिसर में एक कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें विश्वविद्यालय और नाबार्ड के बीच एमओयू (मेमोरेंडम और अंडरस्टैंडिंग) पर दस्तखत किए जाएंगे। एग्रीकल्चर मॉनिटरिंग सिस्टम के बारे में जानकारी देते हुए कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने बताया कि विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन विभाग के आचार्यों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने ड्रोन आधारित एक ऐसा यंत्र बनाया है, जो बेहतर खेती के लिए किसानों का मार्ग दर्शन करेगा। इससे किसानों को कम खर्च और कम मेहनत में उम्मीद से अधिक उपज प्राप्त होगी ही, साथ ही उनकी आमदनी में भी इजाफा होगा।
विज्ञापन
रामलखना बुजुर्ग में हो चुका है सफल ट्रायल
आर्टिफिशियल इंटेलिजेस के इस्तेमाल से बनाए गए ड्रोन आधारित एग्रीकल्चर मॉनिटरिंग सिस्टम का विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए खोराबार क्षेत्र के गांव रामलखना बुजुर्ग में सफल ट्रायल भी किया जा चुका है। ट्रायल के दौरान सेंसरयुक्त ड्रोन से खेत में कीटनाशक दवा का छिड़काव किया गया था।
विज्ञापन
किसानों को मिलेगी ये जानकारी
मिट्टी में नमी की स्थिति की जानकारी।
मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और अन्य सूक्ष्म तत्व की स्थिति की
जानकारी।
खेत की क्षमता के मुताबिक फसल और उसकी पैदावार की संभावना।
कीटों और रोगों से बचाव के लिए मिलेगी उपयुक्त सलाह।
कम समय में अधिक से अधिक क्षेत्र में कीटनाशक का छिड़काव।