Exclusive: एमएमएमयूटी ने तैयार किया ऐसा ड्रोन, किसान से जवान तक के आएगा काम
एमएमएमयूटी के इलेक्ट्रानिक्स विभाग के विद्यार्थी अपने मॉडल का प्रेजेंटेशन गांधीनगर, गुजरात में कर चुके हैं। शुक्रवार को इसका परीक्षण बेंगलुरु में किया जाएगा। ड्रोन को इस तरह तैयार किया गया है कि इसका इस्तेमाल करना बेहद आसान है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के शिक्षकों की देखरेख में विद्यार्थियों ने ऐसा मल्टीपरपज ड्रोन तैयार किया है जो देश के किसानों से लेकर सरहद पर तैनात जवानों तक के काम आएगा। यह खेती-किसानी में उपयोगी होने के साथ ही सरहद पर सैनिकों तक फर्स्ट एड व अन्य सामान भी पहुंचाने की क्षमता रखता है।
इसकी मदद से बहुमंजिली इमारतों लगी आग को भी बुझाया जा सकता है। गुजरात में इसके सफल परीक्षण के बाद भारत सरकार के निर्देश पर विश्वविद्यालय ने पांच करोड़ रुपये का पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया है। मंजूरी मिलते ही ड्रोन की पहली खेप तैयार किया जाएगी।
एमएमएमयूटी के इलेक्ट्रानिक्स विभाग के विद्यार्थी अपने मॉडल का प्रेजेंटेशन गांधीनगर, गुजरात में कर चुके हैं। शुक्रवार को इसका परीक्षण बेंगलुरु में किया जाएगा। ड्रोन को इस तरह तैयार किया गया है कि इसका इस्तेमाल करना बेहद आसान है। साथ ही इसे कोई भी असेंबल कर सकता है। यानी आवश्यकतानुसार अपने काम में उपयोग ला सकता है। एक साथ सात मल्टीपरपज अप्लीकेशन ड्रोन में अपलोड रहेंगे।
इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रो. एसके सोनी को दी गई है। प्रो. सोनी ने बताया कि भारत सरकार के निर्देश पर प्रोजेक्ट तैयार कर लिया गया है। सप्ताह भर में इसे इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार को भेज दिया जाएगा। प्रोजेक्ट को स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा। विश्वविद्यालय में इसके लिए एक लैब भी विकसित की जाएगी।
40 किलो भार लेेकर 400 मीटर ऊंचा उड़ने में सक्षम
प्रो. एसके सोनी ने बताया कि ऑटोनोमस ड्रोन 40 किलो भार लेकर 400 मीटर की ऊंचाई तक उड़ सकेगा। एक बार में दो घंटे तक यह उड़ेगा। यह पहाड़ी इलाकों में सेना के लिए बहुत ही कारगर होगा। लड़ाई के दौरान सैनिकों तक दवाएं एवं अन्य सामान लेकर फौरन पहुंच जाएगा। इसके इस्तेमाल में समय कम जाया होगा।
पेड़-पोल से टकराएगा नहीं
ड्रोन की खासियत यह होगी कि सेंसर लगे होने की वजह से यह पहाड़ों पर पेड़ व पोल से टकराएगा नहीं। जीपीएस से कनेक्ट यह ड्रोन खुद सुरक्षित रास्ता खोज लेगा। जिस सैन्य कैंप में इसे भेजा जाएगा, 95 फीसदी लोकेशन इमेज मिलने पर नीचे उतरेगा और सामान को उपलब्ध करा देगा। यही नहीं, अगर किसी बहुमंजिली इमारत में आग लग गई है तो फायर ब्रिगेड की गाड़ी में लगे हाइड्रेंट को लेकर उड़ेगा और निश्चित लोकेशन को खोजकर पानी की फुहारें छोड़ने में मदद करेगा।
एमएमएमयूटी कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालय ने ऑटोनोमस ड्रोन तैयार किया है। गुजरात में इसका सफल प्रेजेंटेशन भी हो चुका है। अब भारत सरकार के निर्देश पर पांच करोड़ रुपये का पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। जनसहभागिता के क्षेत्र में विश्वविद्यालय के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। यह ड्रोन खेती-किसानी से लेकर सैनिकों तक के काम आएगा।