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एमएमएमयूटी: फेल होने पर क्लास व वाइबा की जरूरत नहीं, कैरी ओवर परीक्षा की सुविधा

Sun, 06 Jun 2021 11:28 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 06 Jun 2021 11:28 AM IST
सार

बीटेक प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए कौशल विकास की कक्षाएं व प्रैक्टिकल की व्यवस्था। एमएमएमयूटी के विद्या परिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को हरी झंडी।

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MMMUT fail student will not need class and Viba will get facility of carry over examination
MMMUT Gorakhpur - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) गोरखपुर में अब किसी विषय में फेल होने पर छात्र को क्लास करने, फाइल बनाने और वाइबा देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सिर्फ एक हजार रुपये जमा करके रजिस्ट्रेशन कराना होगा। उसके लिए कैरी ओवर परीक्षा का आयोजन होगा। वहीं बीटेक प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए कौशल विकास की कक्षाओं एवं प्रैक्टिकल की व्यवस्था की जाएगी, यदि छात्र प्रथम वर्ष के बाद पढाई छोड़ता है तो भी
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वह बेरोजगार न रहे।

कुलपति जेपी पांडेय की अध्यक्षता में जेसी बोस सभागार में हुई शनिवार को विश्वविद्यालय की विद्या परिषद की 25 वीं बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में सभी बाह्य सदस्य ऑनलाइन माध्यम से जुड़े रहे जबकि विश्वविद्यालय के आतंरिक सदस्य भौतिक रूप से मौजूद रहे। 
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कैरीओवर परीक्षा के तहत विश्वविद्यालय ऐसे छात्रों के लिए विशेष सत्रांत परीक्षा आयोजित कराएगा। छात्र फेल विषय में अपने अंक सुधारने के लिए आंतरिक परीक्षा और विशेष सत्रांत परीक्षा दोनों में शामिल हो सकेगा, जिसके लिए उसे शुरू में ही विकल्प देना होगा। लेकिन कैरी ओवर व्यवस्था उन छात्रों के लिए लागू नहीं होगी जो किसी विषय में कम उपस्थिति के कारण परीक्षा से वंचित किए गए हैं या अनुचित साधन प्रयोग में पकड़े जाने के कारण अनुतीर्ण किए गए हैं। ऐसे छात्रों के लिए समर सेमेस्टर (ग्रीष्मकालीन कक्षाएं) चलाकर उनकी परीक्षा ली जाएगी। अभी तक किसी विषय में फेल होने पर छात्र को उसी सेमेस्टर में फिर से क्लास करनी होती थी और सभी परीक्षाएं (आंतरिक/ सेमेस्टर) देनी होती थी। पंजीकरण की फीस भी 6000 प्रति विषय होती थी।
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ऑडिट विषय के रूप में शामिल हुए नए कोर्स

यदि कोई छात्र नया इनोवेशन या प्रोजेक्ट करता है तो उसे छूट होगी कि वह पाठ्यक्रम में प्रोजेक्ट की जगह अपने प्रोजेक्ट के मूल्यांकन का विकल्प दे सकता है। विभागीय शिक्षकों की समिति छात्र के इनोवेशन, प्रोजेक्ट का मूल्यांकन करेगी जिसे छात्र के परीक्षा परिणाम में जोड़ा जाएगा।
 
नई शिक्षा नीति के तहत बीटेक छात्रों के पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया है। सह शैक्षणिक गतिविधियों जैसे व्यक्तित्व विकास, शारीरिक दक्षता, जीवनोपयोगी कौशल आदि संबंधी पाठ्यक्रम भी शामिल किए गए हैं। एनसीसी, भारतीय संविधान, भारतीय संस्कृति एवं विरासत, भारतीय कला एवं पर्व, वैदिक गणित, पेशेवर नैतिकता, मानवाधिकार, पर्यावरणीय विधि, स्वास्थ्य विधि आदि विषयों को भी ऑडिट विषय के रूप में सम्मिलित किया गया है। इन विषयों में छात्रों को केवल उत्तीर्ण होना होगा।
 
अंतिम सेमेस्टर में 18 से 22 सप्ताह के औद्योगिक प्रशिक्षण का विकल्प
अंतिम (आठवें) सेमेस्टर में छात्र को 18 से 22 हफ्ते का औद्योगिक प्रशिक्षण का विकल्प दिया जाएगा। औद्योगिक प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को अपने विषय से संबंधित उद्योग में जाकर वहां कार्य का प्रशिक्षण लेना होगा। इस प्रकार पहले सात सेमेस्टर में उन्होंने जो कुछ पढ़ा होगा उसको वास्तविक रूप में करके सीखने का अवसर मिलेगा। कई कंपनियां अपने यहां काम करने के बदले छात्रों को पैसा भी देती हैं, ऐसे में छात्रों को आमदनी के साथ अनुभव भी मिलेगा। यदि छात्र औद्योगिक प्रशिक्षण के विकल्प का चयन नहीं करता है तो उसे आठवें सेमेस्टर में एक माइनर प्रोजेक्ट और दो विषय पढ़ने का विकल्प दिया जाएगा।

पढ़ाई के दौरान शुरू कर सकेंगे स्टार्टअप

छात्र पढाई के दौरान अपना स्टार्टअप शुरू कर सकेंगे। विभागीय शिक्षकों की समिति इस स्टार्टअप का मूल्यांकन करेगी। यदि मूल्यांकन में वह स्टार्टअप उपयुक्त पाया जाता है तो छात्र के पास यह विकल्प होगा कि आठवें सेमेस्टर का औद्योगिक प्रशिक्षण वह अपने स्टार्टअप में भी कर सकेगा। औद्योगिक प्रशिक्षण के समय विभागीय समिति द्वारा किया गया मूल्यांकन उसके परीक्षा परिणाम में जोड़ा जाएगा। छात्रों को अपनी पढ़ाई के दौरान दो बार और अधिकतम एक वर्ष तक का अवकाश लेने की छूट भी दी जाएगी।
 
पीएचडी छात्रों की प्रगति के मूल्यांकन के लिए केंद्रीकृत व्यवस्था
अब तक पीएचडी छात्रों की प्रगति का मूल्यांकन प्रत्येक सेमेस्टर में विभागीय शोध समिति की बैठक में होता था। लेकिन अब सभी पीएचडी छात्रों के लिए विभिन्न विशेषज्ञता के अलग-अलग समूह बनाकर केंद्रीकृत स्तर पर विभागीय शोध समिति की बैठक आयोजित किया जाएगा। विद्या परिषद् ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इससे थीसिस जमा करने की अनुमति मिलने में देरी नहीं होगी।
 
पीएचडी के लिए एमटेक प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होना अनिवार्य
पीएचडी के लिए न्यूनतम योग्यता में विद्या परिषद् ने न्यूनतम योग्यता को एआईसीटीई व यूजीसी के दिशा निर्देशों के अनुसार संशोधित कर दिया है। एमएमएमयूटी में अब इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी में पीएचडी के लिए एमटेक प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होना अनिवार्य होगा। जबकि यूजीसी दिशा निर्देशों को ध्यान में रखते हुए विद्या परिषद् ने विज्ञान, मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विषयों में पीएचडी में प्रवेश के लिए परास्नातक स्तर पर न्यूनतम 60 प्रतिशत के स्थान पर 55 प्रतिशत अंक किये जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
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