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Gorakhpur News: गोड़धोइया नाला निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी करेंगे एमएमएमयूटी के विशेषज्ञ
Fri, 19 Apr 2024 05:57 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Fri, 19 Apr 2024 05:57 AM IST
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गोरखपुर। गोड़धोइया नाला परियोजना के निर्माण कार्य को लेकर मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और उत्तर प्रदेश जल निगम नगरीय के अहम समझौता हुआ है। इस एमओयू के तहत विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ परियोजना के तहत हो रहे निर्माण की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रगति सुनिश्चित करने के लिए परामर्श देंगे। जल निगम परामर्श सेवाओं के लिए कुल परियोजना लागत की 0.25 प्रतिशत राशि का भुगतान विश्वविद्यालय को करेगा।
समझौते के तहत एमएमएमयूटी के विशेषज्ञ निर्माण में प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता परख कर बताएंगे कि सामग्री मानक के अनुरूप है या नहीं। विशेषज्ञों समय-समय पर निर्माण स्थल का भ्रमण कर निर्माण संबंधी तकनीकी पहलुओं का परीक्षण कर परामर्श भी देंगे। निर्माण की डिजाइन और सुरक्षा संबंधी पहलुओं की भी जांच कर सुनिश्चित किया जाएगा कि वे मानक एवं आवश्यकता के अनुरूप हों। इसके अलावा विशेषज्ञ समय-समय पर वास्तविक निर्माण की जांच कर यह बताएंगे कि निर्माण निर्धारित डिजाइन एवं ड्राइंग के अनुरूप हो रहा है या नहीं।
एमएमएमयूटी के कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी, अधिष्ठाता नियोजन राम दुलार, सह अधिष्ठाता सिविल कार्य डॉ मदन चंद मौर्य, सह अधिष्ठाता विद्युत कार्य डॉ. शेखर यादव, जल निगम के कार्यकारी अभियंता सुदेश कुमार मौजूद रहे। समझौते पर विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलसचिव डॉ. अभिजित मिश्र व जल निगम के कार्यकारी अभियंता पंकज सिंह ने हस्ताक्षर किए। दोनों पक्षों के बीच यह समझौता परियोजना के पूर्ण होने तक प्रभावी रहेगा।
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विश्वविद्यालय एक टीम का गठन करेगा। टीम में स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग, सॉयल मैकेनिक्स, फाउंडेशन इंजीनियरिंग, मैकेनिकल एवं इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के विशेषज्ञ शामिल होंगे। टीम का नेतृत्व विवि की ओर से नामित कम से कम सह आचार्य स्तर के स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग विशेषज्ञ करेंगे।
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समझौते के तहत एमएमएमयूटी के विशेषज्ञ निर्माण में प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता परख कर बताएंगे कि सामग्री मानक के अनुरूप है या नहीं। विशेषज्ञों समय-समय पर निर्माण स्थल का भ्रमण कर निर्माण संबंधी तकनीकी पहलुओं का परीक्षण कर परामर्श भी देंगे। निर्माण की डिजाइन और सुरक्षा संबंधी पहलुओं की भी जांच कर सुनिश्चित किया जाएगा कि वे मानक एवं आवश्यकता के अनुरूप हों। इसके अलावा विशेषज्ञ समय-समय पर वास्तविक निर्माण की जांच कर यह बताएंगे कि निर्माण निर्धारित डिजाइन एवं ड्राइंग के अनुरूप हो रहा है या नहीं।
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एमएमएमयूटी के कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी, अधिष्ठाता नियोजन राम दुलार, सह अधिष्ठाता सिविल कार्य डॉ मदन चंद मौर्य, सह अधिष्ठाता विद्युत कार्य डॉ. शेखर यादव, जल निगम के कार्यकारी अभियंता सुदेश कुमार मौजूद रहे। समझौते पर विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलसचिव डॉ. अभिजित मिश्र व जल निगम के कार्यकारी अभियंता पंकज सिंह ने हस्ताक्षर किए। दोनों पक्षों के बीच यह समझौता परियोजना के पूर्ण होने तक प्रभावी रहेगा।
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विश्वविद्यालय एक टीम का गठन करेगा। टीम में स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग, सॉयल मैकेनिक्स, फाउंडेशन इंजीनियरिंग, मैकेनिकल एवं इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के विशेषज्ञ शामिल होंगे। टीम का नेतृत्व विवि की ओर से नामित कम से कम सह आचार्य स्तर के स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग विशेषज्ञ करेंगे।