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विद्यार्थी की गिरफ्तारी पर एमएलसी ने खड़े किए सवाल, कहा- इसमें हिस्ट्रीशीटर व पुलिस की साजिश
Mon, 17 Feb 2020 10:56 AM IST
vivek shukla
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 17 Feb 2020 10:56 AM IST
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एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह। (file)
- फोटो : अमर उजाला
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जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष रामदरश विद्यार्थी की गिरफ्तारी पर एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने सवाल खड़ा करते हुए उसे एक साजिश करार दिया। इसके लिए एक हिस्ट्रीशीटर और पुलिस को जिम्मेदार मानते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
सिंह ने कहा है कि बड़हलगंज थाने के एक हिस्ट्रीशीटर और स्थानीय पुलिस की सांठगांठ के परिणाम स्वरूप राजनीतिक कार्यकर्ता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इसके पूर्व भी उसी हिस्ट्रीशीटर के षडयंत्र से मऊ के दोहरीघाट थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। उस प्रकरण में पुलिस ने विवेचना के उपरांत मुकदमे को खत्म कर दिया । पुन: 2018 में 156 (3) के तहत बड़हलगंज थाने में उसी हिस्ट्रीशीटर की मिलीभगत से एक अन्य मुकदमा दर्ज कराया गया।
उसे फर्जी आधार पाते हुए सीओ बांसगांव ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी। एक बार फिर उसी हिस्ट्रीशीटर की मिलीभगत से बड़हलगंज की रहने वाली महिला ने कैंट थाने में 156(3) के तहत मुकदमा पंजीकृत कराया। उसमें विद्यार्थी अभियुक्त नहीं थे। 161 के बयान में भी उनका नाम प्रकाश में नहीं आया। 164 के बयान में पुलिस और हिस्ट्रीशीटर की साजिश से रामदरश विद्यार्थी का नाम जोड़ दिया गया। विद्यार्थी को गिरफ्तार कर लिया गया। जबकि मुख्य अभियुक्त की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हुई।
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सिंह ने कहा है कि बड़हलगंज थाने के एक हिस्ट्रीशीटर और स्थानीय पुलिस की सांठगांठ के परिणाम स्वरूप राजनीतिक कार्यकर्ता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इसके पूर्व भी उसी हिस्ट्रीशीटर के षडयंत्र से मऊ के दोहरीघाट थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। उस प्रकरण में पुलिस ने विवेचना के उपरांत मुकदमे को खत्म कर दिया । पुन: 2018 में 156 (3) के तहत बड़हलगंज थाने में उसी हिस्ट्रीशीटर की मिलीभगत से एक अन्य मुकदमा दर्ज कराया गया।
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उसे फर्जी आधार पाते हुए सीओ बांसगांव ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी। एक बार फिर उसी हिस्ट्रीशीटर की मिलीभगत से बड़हलगंज की रहने वाली महिला ने कैंट थाने में 156(3) के तहत मुकदमा पंजीकृत कराया। उसमें विद्यार्थी अभियुक्त नहीं थे। 161 के बयान में भी उनका नाम प्रकाश में नहीं आया। 164 के बयान में पुलिस और हिस्ट्रीशीटर की साजिश से रामदरश विद्यार्थी का नाम जोड़ दिया गया। विद्यार्थी को गिरफ्तार कर लिया गया। जबकि मुख्य अभियुक्त की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हुई।
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