गोरखपुर में बोले आईएमए के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय: IAS की तर्ज पर बनाया जाए IMS, बनेगा अलग कानून
उत्तर प्रदेश आईएमए के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप सिंह ने कहा कि सेंट्रल एक्ट अगेंस्ट वायलेंस लाया जाना चाहिए। इससे डॉक्टरों और चिकित्सा संस्थानों की सुरक्षा में बड़ा सुधार आएगा। इस एक्ट को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) से बाहर रखा जाना चाहिए। प्रदेश सचिव डॉ. राजीव गोयल ने कहा कि चिकित्सा संस्थानों के लाइसेंस की प्रक्रिया में और सुधार आना चाहिए।
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भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की तरह ही इंडियन मेडिकल सर्विसेज (आईएमएस) का गठन किया जाना चाहिए। साथ ही प्रतियोगी परीक्षा कराके डॉक्टरों को तैनाती दी जाए। इससे डॉक्टरों की कमी दूर होगी। बड़ी संख्या में डॉक्टर सेवा से जुड़ेंगे। यह कहना इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद अग्रवाल का। वह रविवार को रेलवे ऑफिसर्स क्लब में आयोजित उत्तर प्रदेश इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के स्टेट वर्किंग कमेटी की कार्यकारिणी समिति की बैठक को संबोधित कर रहे थे।
कार्यकारिणी समिति की बैठक पहली बार गोरखपुर में हुई है। इसमें देश के अलग-अलग राज्यों व शहरों से आए वरिष्ठ चिकित्सकों ने हिस्सा लिया। आईएमए की कार्यकारिणी ने सबसे पहले चिकित्सा क्षेत्र में किए गए कार्यों की जानकारी दी, फिर अच्छा काम करने वाले डॉक्टरों को सम्मनित किया। आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने डॉक्टरों के प्रयासों व उनके सेवा भाव की सराहना की और कहा कि अब स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े बदलाव की जरूरत है। इसकी पहल केंद्र व राज्य सरकारों को करनी चाहिए। आईएमएस के गठन से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा। डॉक्टरों की सुरक्षा व्यवस्था भी अच्छी हो जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी।
उत्तर प्रदेश आईएमए के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप सिंह ने कहा कि सेंट्रल एक्ट अगेंस्ट वायलेंस लाया जाना चाहिए। इससे डॉक्टरों और चिकित्सा संस्थानों की सुरक्षा में बड़ा सुधार आएगा। इस एक्ट को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) से बाहर रखा जाना चाहिए। प्रदेश सचिव डॉ. राजीव गोयल ने कहा कि चिकित्सा संस्थानों के लाइसेंस की प्रक्रिया में और सुधार आना चाहिए। प्रदूषण और फायर के एनओसी की प्रक्रिया सरल बनाई जानी चाहिए।
प्रदेश संयुक्त सचिव डॉ. डीके सिंह ने कहा कि आईएमए से पूरे देश में चार लाख से डॉक्टर जुड़े हैं। सब जरूरतमंद मरीजों की मदद करते हैं। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में निशुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाते हैं। जागरूकता अभियान चलाए लाते हैं। आईएमए गोरखपुर के अध्यक्ष डॉ. शिव शंकर शाही ने कहा कि गोरखपुर के किसी भी अस्पताल में यदि कोई अप्रिय घटना होती है तो उसके लिए यहां क्विक एक्शन ग्रुप के नाम से संगठन है, जो तुरंत सक्रिय हो जाता है। डॉक्टरों की मदद की जाती है।
सचिव डॉ. वीएन अग्रवाल ने कहा कि आईएमए सर्टिफाइड हॉस्पिटल नामक मुहिम चला रही है। फर्जी अस्पताल एवं बिना मानकों के चल रहे अस्पताल से लोग दूर रहें, ऐसा संगठन का प्रयास है। प्रदेश को चार जोन में बांटा गया है। गोरखपुर दूसरे जोन में आता है। इस बार प्रदेश आईएमए की स्टेट वर्किंग कमेटी की बैठक गोरखपुर में आयोजित हुई। यहां से निकली आवाज राष्ट्रीय स्तर पर आईएमए की पहचान स्थापित करेगी। कार्यक्रम का संचालन डॉ इमरान अख्तर ने किया। इस दौरान डॉ. गगन गुप्ता, डॉ. भारतेंद्र जैन, डॉ. अल्पना अग्रवाल, डॉ. अरुणा छापड़िया, डॉ. शांतनु अग्रवाल, डॉ. अजय शुक्ला, डॉ. संजीव गुप्ता समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
पहली बार गोरखपुर आए आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष
आईएमए गोरखपुर इकाई के मुताबिक, आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद अग्रवाल पहली बार किसी कार्यक्रम में शामिल होने गोरखपुर आए हैं। यह पहला मौका है, जब गोरखपुर आईएमए की टीम को राष्ट्रीय अध्यक्ष की निगरानी में अपनी रणनीति तैयार करने का मौका मिला। इस बार राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदेश से ही चुनकर जा रहे हैं, लेकिन पिछले दिनों में आईएमए गोरखपुर की टीम ने ही सरकार तक आईएमए प्रदेश कार्यकारिणी की आवाज पहुंचाई थी।
पहले 2016 में भी हुई थी बैठक
उत्तर प्रदेश आईएमए की स्टेट वर्किंग कमेटी की बैठक 2016 में भी गोरखपुर में आयोजित हुई थी। इस बैठक में क्लीनिकल स्टेबलिस्टमेंट एक्ट के संशोधन की आवाज उठी थी। सभी ने सहमति जताते हुए कहा कि अगर इसे लागू किया गया तो या एक्ट जनता और चिकित्सकों, किसी के हित में नहीं होगा। बैठक से उठी आवाज के बाद ही धीरे धीरे प्रदेश आईएमए ने विरोध जताना शुरू किया। प्रदेश आईएमए के प्रयास के बाद अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हस्तक्षेप से इसके प्रारूप में संशोधन कर इसे लागू किया जा सका। इस बार दोनों मांगों को लेकर उम्मीद जताई जा रही है कि संगठन के पक्ष में सरकार इस पर निर्णय ले सकती है।