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UP Nikay Chunav: 10 हजार उधार लेकर मेयर का चुनाव लड़ी थीं आशा देवी, जीतने के बाद रिक्शे पर लगाई थी लाल बत्ती

Mon, 01 May 2023 03:12 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 01 May 2023 03:12 PM IST
सार

आशा देवी के मकान से 50 कदम की दूरी पर सड़क की दूसरी ओर मनोज कुमार की बैटरी की दुकान है। मनोज ने बताया आशा देवी जब मेयर बनीं, तो मोहल्ले की समस्याओं का समाधान तेजी से होने लगा। दिक्कतों को दूर करने के लिए वह हमेशा सक्रिय रहती थीं। मेयर चुने के बाद भी उनका पारंपरिक काम जारी था।

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Mayor Asha Devi was famous for walking with red beacon on rickshaw
गोरखपुर की पूर्व मेयर आशा देवी। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

वर्ष 2001 के निकाय चुनाव में मेयर की सीट महिला के आरक्षित थी। उस समय प्रदेश सरकार में गोरखपुर में कई मंत्री होने के बावजूद शहर का विकास अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं हुआ था। इससे जनता नाराज थी। ऐसे में लोगों ने किन्नर आशा देवी उर्फ अमरनाथ यादव में आशा की किरण नजर आई। 

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दुर्गाबाड़ी चौराहे से सड़क तिवारीपुर की तरफ जाती है। इस पर सवा किमी चलने के बाद सूरजकुंड ओवरब्रिज पर जाने वाला मोड़ है। इसी मोड़ से सटे मधु कुंज हैं, जहां शहर की पूर्व मेयर किन्नर आशा देवी उर्फ अमरनाथ यादव रहती थीं। मकान के बाहर गेट पर मधु कुंज रमेश यादव, उपनिरीक्षक, केंद्र पुलिस गृह मंत्रालय का बोर्ड लगा हुआ है। अब इस मकान की पहचान उनकी गोद ली हुई बेटी मधु के नाम से है। उनके दामाद रमेश यादव बालापार, टिकरिया गांव के रहने वाले हैं। वर्तमान वह लखनऊ में परिवार संग रहते हैं। उनका एक मकान मोहरीपुर में भी बना हुआ है।
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आशा देवी के मकान से 50 कदम की दूरी पर सड़क की दूसरी ओर मनोज कुमार की बैटरी की दुकान है। मनोज ने बताया आशा देवी जब मेयर बनीं, तो मोहल्ले की समस्याओं का समाधान तेजी से होने लगा। दिक्कतों को दूर करने के लिए वह हमेशा सक्रिय रहती थीं। मेयर चुने के बाद भी उनका पारंपरिक काम जारी था। अपने समाज के लोगों के साथ जजमानी में लोगों के घर जाती थीं। उनका जुड़ाव हर किसी से था।

रिक्शा पर लाल बत्ती लगाकर चलती थीं मेयर आशा देवी

मेयर बनने के बाद भी आशा देवी कार की जगह रिक्शा से चलती थीं। रिक्शे पर लाल बत्ती लगाकर उनके नगर निगम पहुंचने की सूबे में खूब चर्चा रही। दिवंगत आशा देवी के मोहल्ले की रहने वाली सुभावती मल्ल ने बताया कि उनका स्वभाव बहुत अच्छा था। वह हम लोगों के लिए शुभ थीं। मेयर बनने के बाद भी उनका व्यवहार बिल्कुल नहीं बदला।

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बोली- बाबू हमको याद है कि उनके मेयर चुने जाने पर खूब हल्ला हुआ। हम लोगों को लगा कि वह बदल जाएंगीं, लेकिन वह पहले की तरह से अपने समाज के लोगों के साथ जुड़कर अपना काम भी करतीं रहीं। मोहल्ले में किसी से भी पूछेंगे तो वह उनको अच्छा ही कहेगा। बाद में किडनी की बीमारी से पीड़ित होने की वजह से जून 2013 में आशा देवी का निधन हो गया।


 

10 हजार रुपये का कर्ज लेकर अपनी जमानत राशि जमा कराई

मेयर का चुनाव लड़ने के लिए आशा देवी ने 10 हजार रुपये का कर्ज लेकर अपनी जमानत राशि जमा कराई। पुरुष किन्नर होने की वजह से आशा का पर्चा खारिज होने का खतरा भी था। हालांकि गोरखपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी देवेश चतुर्वेदी ने आशा देवी का पर्चा मान लिया। उनके प्रचार के लिए मध्य प्रदेश से किन्नर विधायक शबनम मौसी भी आई थीं।

चुनाव का नतीजा जब आया तो सपा से अंजू चौधरी को 44545 वोट मिले। भाजपा की विद्यावती को 29545 वोट, जबकि आशा देवी को 1,09849 वोट मिले थे। इस चुनाव में सपा के अतिरिक्त सभी की जमानत जब्त हो गई थी।

मधु को आशा देवी ने लिया था गोद
तिवारीपुर, नरसिंहपुर के मूल निवासी आशा देवी उर्फ अमरनाथ के अन्य भाई जयनाथ यादव और रामनाथ यादव हैं। जयनाथ की बेटी मधु को आशा देवी ने गोद ले लिया था। पांच भाई बहनों में दूसरे नंबर के मधु की शादी वर्ष 2011 में रमेश यादव संग हुई थी।




 
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