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गोरखपुर नगर निगम: सात दिनों में निस्तारित करना होगा नामांतरण का मामला
Sun, 12 Sep 2021 01:12 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 12 Sep 2021 01:12 PM IST
सार
नामांतरण और टैक्स संबंधी मामलों को लगातार लंबित पाए जाने पर नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने यह प्रावधान किया है।
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गोरखपुर नगर निगम।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर नगर निगम में आने वाले नामांतरण से संबंधित मामले निर्धारित समय में निस्तारित होंगे। अगर मामले अविवादित हैं तो हर हाल में उन्हें सात दिन, और विवादित होने पर 45 दिन में निस्तारित करना होगा। नामांतरण और टैक्स संबंधी मामलों को लगातार लंबित पाए जाने पर नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने यह प्रावधान किया है।
नगर निगम में नामांतरण के मामले लंबित रखने का खेल लंबे अरसे से खेला जा रहा है। सामान्य मामला होने पर भी विभागीय कर्मचारी कुछ कमियां निकाल कर मामले को लटकाए रहते हैं। फिर काफी दौड़ाने के बाद अनैतिक तरीके से कुछ लाभ लेकर मामले को निस्तारित किया जाता रहा है। नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने खुद ही सालों से लटके इस तरह के दो मामलों को एक घंटे में निस्तारित कराया। वहीं इस इस तरह के मामलों की संख्या काफी ज्यादा देखते हुए विशेष कैंप का आयोजन भी कराया जिसमें सैकड़ों मामले निस्तारित हुए। आने वाले समय में इस तरह मामले लंबित न हो इसके लिए नगर आयुक्त फाइलों के निस्तारण के लिए समय सीमा तय कर दी है।
नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार किसी भी पटल पर तीन दिन से ज्यादा फाइलों को नहीं रोकने का प्रावधान सख्ती से लागू किया जा रहा है। वहीं नामांतरण के अविवादित मामलों के निस्तारण के लिए सात दिन और विवादित मामलों के निस्तारण के लिए 30-45 दिन का समय तय किया गया है। अगर बेवजह फाइलों का लंबित रखने का मामला आता है तो संबंधित के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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देना है शपथपत्र, नहीं है कोई लंबित प्रकरण
नगर आयुक्त ने बताया कि जल्द ही नामांतरण संबंधी मामलों के निस्तारण के लिए 10 दिन का विशेष कैंप लगाया जाएगा। मामलों के निस्तारित होने के बाद सभी जोनल अधिकारियों को इस संबंध में प्रमाणपत्र देना होगा कि उनके जोन में अब कोई भी नामांतरण संबंधित मामला लंबित नहीं है।
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नगर निगम में नामांतरण के मामले लंबित रखने का खेल लंबे अरसे से खेला जा रहा है। सामान्य मामला होने पर भी विभागीय कर्मचारी कुछ कमियां निकाल कर मामले को लटकाए रहते हैं। फिर काफी दौड़ाने के बाद अनैतिक तरीके से कुछ लाभ लेकर मामले को निस्तारित किया जाता रहा है। नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने खुद ही सालों से लटके इस तरह के दो मामलों को एक घंटे में निस्तारित कराया। वहीं इस इस तरह के मामलों की संख्या काफी ज्यादा देखते हुए विशेष कैंप का आयोजन भी कराया जिसमें सैकड़ों मामले निस्तारित हुए। आने वाले समय में इस तरह मामले लंबित न हो इसके लिए नगर आयुक्त फाइलों के निस्तारण के लिए समय सीमा तय कर दी है।
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नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार किसी भी पटल पर तीन दिन से ज्यादा फाइलों को नहीं रोकने का प्रावधान सख्ती से लागू किया जा रहा है। वहीं नामांतरण के अविवादित मामलों के निस्तारण के लिए सात दिन और विवादित मामलों के निस्तारण के लिए 30-45 दिन का समय तय किया गया है। अगर बेवजह फाइलों का लंबित रखने का मामला आता है तो संबंधित के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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देना है शपथपत्र, नहीं है कोई लंबित प्रकरण
नगर आयुक्त ने बताया कि जल्द ही नामांतरण संबंधी मामलों के निस्तारण के लिए 10 दिन का विशेष कैंप लगाया जाएगा। मामलों के निस्तारित होने के बाद सभी जोनल अधिकारियों को इस संबंध में प्रमाणपत्र देना होगा कि उनके जोन में अब कोई भी नामांतरण संबंधित मामला लंबित नहीं है।