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गीडा : मुख्यमंत्री तक पहुंचा जमीन की कीमतों का मामला

Mon, 06 Jul 2020 01:15 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jul 2020 01:15 AM IST
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matter of gida land prices reached the chief minister
गीडा : मुख्यमंत्री तक पहुंचा जमीन की कीमतों का मामला
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गोरखपुर। गीडा औद्योगिक क्षेत्र में जमीन की आसमान छूती कीमतों और गीडा बोर्ड बैठक में चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के किसी पदाधिकारी को आमंत्रित सदस्य के रूप में नहीं बुलाने का मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच गया है। चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के पदाधिकारियों ने सीएम योगी से मुलाकात कर इस संबंध का ज्ञापन सौंपा है।
रविवार को मुख्यमंत्री के गोरखपुर पहुंचने पर चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष विष्णु अजीत सरिया और पूर्व अध्यक्ष एसके अग्रवाल ने सीएम से मुलाकात की। इस दौरान इन पदाधिकारियों ने सीएम को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष विष्णु अजीत सरिया ने कहा कि गीडा औद्योगिक क्षेत्र में मार्च-19 में जमीन मात्र 4400 रुपये प्रति वर्ग मीटर थी, वहीं अब यह कीमत बढ़कर 6800 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच गई है। जबकि कोरोना महामारी की वजह से सभी जमीन की मार्केट वैल्यू में तकरीबन 25 प्रतिशत की कमी आयी है। ऐसे में गीडा प्रशासन द्वारा जमीन की कीमतें 54 प्रतिशत तक बढ़ाए जाने से उद्योग लगाना संभव नहीं हो पाएगा। इसलिए इस दर में परिवर्तन किया जाए।
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इसके साथ यह भी कहा कि गीडा बोर्ड बैठकों में चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के पदाधिकारियों को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में बुलाया जाता रहा है ताकि बोर्ड बैठक में उद्योगों के हितों पर चर्चा हो सके। लेकिन पिछली कुछ बैठकों में उद्यमियों को नहीं बुलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री से मांग की कि बोर्ड बैठक में उद्यमियों को शामिल कराने का प्रावधान किया जाए। विष्णु अजीत सरिया ने बताया कि मुख्यमंत्री ने उनकी मांग पर गंभीरतापूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया है।
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रेडीमेड गारमेंट उद्योग को ओडीओपी का दर्जा देने की मांग
गोरखपुर। चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज की ओर से मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर रेडीमेड गारमेंट उद्योग को ओडीओपी का दर्जा देने की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि गोरखपुर जनपद बुनकर बाहुल्य जनपद है। 1990 के बाद यहां पावरलूम उद्योग, धागा बनाने की इकाइयां, प्रोसेस हाउस और रेडिमेड गारमेंट उद्योग स्थापित हुआ है। यहां लगभग दो लाख मीटर कपड़ा रोज बनता है। रेडीमेड गारमेंट की भी लगभग 100 छोटी-बड़ी इकाइयां कार्यरत हैं। यहां टेक्सटाइल के कुशल कारीगरों की बहुतायत है। ऐसे में रेडीमेड गारमेंट उद्योग को ओडीओपी का दर्जा दिए जाने से इस उद्योग का काफी विकास होगा। गोरखपुर रेडीमेड गारमेंट का हब बन जाएगा।
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