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Gorakhpur News: अमेरिका में मास्टरमाइंड, कोलकाता में सेटअप...देशभर में फैला रखा था ठगी का जाल

Sat, 24 Jan 2026 01:21 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 24 Jan 2026 01:21 AM IST
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Mastermind in America, setup in Kolkata... a network of fraud was spread across the country.

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आस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, यूके, यूएसए के 1.80 लाख विदेशी नागरिकों का मिला डाटा

देश के कई राज्यों में फर्जी कॉल सेंटर खोलकर विदेशी नागरिकों को बनाते थे शिकार
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। स्वास्थ्य बीमा, टैक्स रिफंड और सरकारी योजनाओं का झांसा देकर अमेरिकी और अन्य विदेशी नागरिकों से करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह का नेटवर्क सिर्फ गोरखपुर तक ही सीमित नहीं है। पुलिस की प्राथमिक जांच और पूछताछ में सामने आया है कि इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड अमेरिका में बैठा है और वह विदेशी नागरिकों का डाटा सीधे वहां से उपलब्ध कराता था। कोलकाता में इस डाटा के आधार पर फर्जी कॉल सेंटर का सेटअप तैयार किया जाता था।
इसके बाद देश के कई राज्यों में काॅल सेंटर खोलकर विदेशी नागरिकों से ठगी का खेल चलता था। प्राथमिक पूछताछ में पुलिस को सिलीगुड़ी में भी एक कॉल सेंटर खोले जाने की जानकारी मिली है।
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पुलिस की जांच में पता चला कि अमेरिका में बैठा मास्टरमाइंड प्रतिदिन एक हजार विदेशी नागरिकों का डाटा मुहैया करता था। गिरोह के पास आस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, यूके और यूएसए के लगभग 1.80 लाख विदेशी नागरिकों का संवेदनशील डाटा मौजूद था। नाम, फोन नंबर, ईमेल आईडी और बैंकिंग जानकारी के आधार पर यह गिरोह ठगी की साजिश करता था।
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जांच में सामने आया है कि कॉल सेंटर में काम करने वाले एजेंटों को यह डाटा दिया जाता था और एजेंट फर्जी अमेरिकी नामों जॉन, जॉर्ज, लेविस, क्लार्क से कॉल कर लोगों को झांसे में लेते थे। जब विदेशी नागरिक कॉल में फंस जाते तो उन्हें स्थानीय गिरोह के पास फारवर्ड किया जाता, जहां बैंकिंग प्रक्रिया का झांसा देकर बड़ी रकम ऐंठ ली जाती। इसके बाद ठगी के डॉलर में से कमीशन के तौर पर कोलकाता में बैठे शातिर को दी जाती। फिर कोलकाता में बैठा ठग उन्हें रुपये ट्रांसफर करता था।
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चार लेयर के किया जाता था काम
एसपी क्राइम सुधीर जायसवाल ने बताया कि साइबर जालसाज चार लेयर में काम करते थे। पहले लेयर में डाटा प्रोवाइडर मास्टरमाइंड, दूसरे लेयर में कोलकाता की सेटअप टीम, तीसरे लेयर में स्थानीय काॅल सेंटर और चौथे लेयर में एजेंट, जो कॉल करते थे और अंतिम लेयर में कमीशन लेने वाले स्थानीय गिरोह शामिल थे।
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दिन में शराब पार्टी और रात में रची जाती थी ठगी की पूरी साजिश
स्थानीय पुलिस की जांच में यह भी पता चला कि गिरोह की दिनचर्या और काम करने का तरीका अलग था। दिन में शराब की पार्टी होती और शाम सात बजे से सुबह पांच बजे तक ठगी का काम चलता। एजेंटों और गिरोह के अन्य सदस्यों को लंबे समय तक लगातार कॉल करने का प्रशिक्षण दिया जाता था, जिसके लिए उन्हें अमेरिकी भाषा में झांसे में लेने के लिए स्क्रिप्ट भी दी जाती थी। जिन एजेंटों को ठगी का पूरा खेल पता नहीं था, उन्हें भी नौकरी का झांसा देकर इस्तेमाल किया जाता था।
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जालसाजों के खंगाले जा रहे बैंक खाते और लैपटॉप
एसपी नार्थ के अनुसार, जालसाजों के पास से एचडीएफसी बैंक के अलग-अलग खातों के छह चेकबुक और पांच पासबुक मिले हैं, जिनकी डिटेल निकालने के लिए बैंक से पत्राचार किया गया है। साथी बरामद लैपटॉप को फाॅरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
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40 हजार रुपये में किराए पर लिया था मकान
पुलिस को मौके से मकान का एग्रीमेंट पेपर भी मिला है, जिसमें मकान मालिक अजय तिवारी और रौनक कुमार त्रिपाठी, गौरव पाठक और शिवानी पाठक के बीच एग्रीमेंट हुआ था। एग्रीमेंट के अनुसार, सितंबर माह में मकान किराए पर लिया गया था। इसके बाद माई जॉब एप के जरिये युवकों को पार्ट टाइम के लिए नौकरी पर रखा गया था। इसके बाद अंग्रेजी बोलने के आधार पर युवकों को नौकरी दी जाती थी।
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विदेशी नागरिकों से बात करने के लिए 16 पन्ने की तैयार की गई थी स्क्रिप्ट
पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने विदेशी नागरिकों से बात करने के लिए 16 पन्ने की अंग्रेजी में स्क्रिप्ट तैयार कर रखी थी, जिसे देखकर कालर यूएस के क्लाइंटों से बात करते हैं। विदेशी नागरिकों को इंश्योरेंस सब्सिडी के संबंध में बात करते थे। इसके लिए एजेंट को बाकायदा याद कराकर क्लाइंट से बात करने की ट्रेनिंग भी दी जाती थी।

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रुपेश 12वीं पास, अन्य पांच बीए उत्तीर्ण
पुलिस के अनुसार, पुलिस की गिरफ्त में आया रूपेश सिंह 12वीं पास है। वहीं, अभिषेक, हर्ष, सूरज, अश्चवनी और शलोनी बीए पास हैं। रुपेश और अभिषेक लखनऊ में पहले गिरोह में कॉलर के रूप में काम करते थे। जेल से जमानत पर छूटने के बाद वह गोरखपुर में मैनेजमेंट का काम देखने लगे थे। पुलिस जेल भेजे गए सभी आरोपियों का आपराधिक इतिहास खंगाल रही है। साथ ही, मोबाइल की कॉल डिटेल की भी जांच शुरू कर दी है।
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