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Gorakhpur News: काकोरी के महानायक राजेंद्र लाहिड़ी का मनाया गया बलिदान दिवस
Mon, 18 Dec 2023 02:33 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Mon, 18 Dec 2023 02:33 AM IST
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स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने आंदोलन के लिए लूटा था सरकारी खजाना
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। रविवार को काकोरी के महानायक राजेंद्र नाथ लाहिड़ी के बलिदान दिवस पर विचार गोष्ठी का आयोजन गोरखपुर विश्वविद्यालय में किया गया। इस अवसर पर क्रांतिकारी सम्मान मोर्चा के अध्यक्ष बृजेश राम त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय स्वाधीनता संग्राम में काकोरी कांड का बड़ा महत्त्व है। वह पहला अवसर था, जब स्वाधीनता सेनानियों ने सरकारी खजाना लूटकर जनता में यह विचार फैलाने में सफलता पाई कि क्रांतिकारी आम जनता के नहीं, अपितु शासन के विरोधी हैं।
उन्होंने कहा कि ब्रितानी हुकूमत द्वारा चार क्रांतिवीरों को मृत्युदंड दिया गया। इनमें से एक राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी को 17 दिसंबर 1927 को गोंडा जेल में फांसी पर चढ़ा दिया गया। राजेन्द्र लाहिड़ी ने फांसी चढ़ने से पूर्व वंदे मातरम् की हुंकार भरी और कहा कि मैं मर नहीं रहा हूँ, बल्कि अंग्रेजों के साम्राज्य की नींव हिलाने के लिए पुनर्जन्म लेने जा रहा हूं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कैप्टन प्रो. दिग्विजय नाथ मौर्या ने कहा कि राजेन्द्र लाहिड़ी का जन्म 23 जून, 1901 को ग्राम मोहनापुर जिला पावना, वर्तमान बांग्लादेश में हुआ था।
मात्र नौ वर्ष की अल्पावस्था में वे अपने मामा के पास काशी आ गए। काशी में उनका संपर्क प्रख्यात कांतिकारी शचीन्द्रनाथ सान्याल से हुआ। उस समय चल रहे आंदोलन को गति देने के लिए तत्काल धन की आवश्यकता थी। इसके लिए अंग्रेजी सरकार का खजाना लूटने की योजना उन लोगों ने बनाई। जिसके जुर्म में उन्हें फांसी दे दी गई। डॉ. अनुपम सिंह ने कहा कि नौ अगस्त 1925 को सायंकाल छह बजे लखनऊ के पास काकोरी से आठ डाउन गाड़ी में जा रहे सरकारी खजाने को लूट लिया गया। पकड़े गये सभी क्रांतिवीरों पर शासन के विरुद्ध सशस्त्र युद्ध छेड़ने एवं खजाना लूटने का अभियोग लगाया गया।
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इस कांड में लखनऊ की विशेष अदालत ने राजेन्द्र लाहिड़ी, रामप्रसाद बिस्मिल, रोशन सिंह तथा अशफाक उल्लाह को मृत्यु दंड दिया । शेष तीनों को 19 दिसंबर को फांसी दी गई, लेकिन भयवश अंग्रेजी शासन ने राजेन्द्र लाहिड़ी को गोंडा कारागार में 17 दिसम्बर, 1927 को ही फांसी दे दी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। रविवार को काकोरी के महानायक राजेंद्र नाथ लाहिड़ी के बलिदान दिवस पर विचार गोष्ठी का आयोजन गोरखपुर विश्वविद्यालय में किया गया। इस अवसर पर क्रांतिकारी सम्मान मोर्चा के अध्यक्ष बृजेश राम त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय स्वाधीनता संग्राम में काकोरी कांड का बड़ा महत्त्व है। वह पहला अवसर था, जब स्वाधीनता सेनानियों ने सरकारी खजाना लूटकर जनता में यह विचार फैलाने में सफलता पाई कि क्रांतिकारी आम जनता के नहीं, अपितु शासन के विरोधी हैं।
उन्होंने कहा कि ब्रितानी हुकूमत द्वारा चार क्रांतिवीरों को मृत्युदंड दिया गया। इनमें से एक राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी को 17 दिसंबर 1927 को गोंडा जेल में फांसी पर चढ़ा दिया गया। राजेन्द्र लाहिड़ी ने फांसी चढ़ने से पूर्व वंदे मातरम् की हुंकार भरी और कहा कि मैं मर नहीं रहा हूँ, बल्कि अंग्रेजों के साम्राज्य की नींव हिलाने के लिए पुनर्जन्म लेने जा रहा हूं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कैप्टन प्रो. दिग्विजय नाथ मौर्या ने कहा कि राजेन्द्र लाहिड़ी का जन्म 23 जून, 1901 को ग्राम मोहनापुर जिला पावना, वर्तमान बांग्लादेश में हुआ था।
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मात्र नौ वर्ष की अल्पावस्था में वे अपने मामा के पास काशी आ गए। काशी में उनका संपर्क प्रख्यात कांतिकारी शचीन्द्रनाथ सान्याल से हुआ। उस समय चल रहे आंदोलन को गति देने के लिए तत्काल धन की आवश्यकता थी। इसके लिए अंग्रेजी सरकार का खजाना लूटने की योजना उन लोगों ने बनाई। जिसके जुर्म में उन्हें फांसी दे दी गई। डॉ. अनुपम सिंह ने कहा कि नौ अगस्त 1925 को सायंकाल छह बजे लखनऊ के पास काकोरी से आठ डाउन गाड़ी में जा रहे सरकारी खजाने को लूट लिया गया। पकड़े गये सभी क्रांतिवीरों पर शासन के विरुद्ध सशस्त्र युद्ध छेड़ने एवं खजाना लूटने का अभियोग लगाया गया।
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इस कांड में लखनऊ की विशेष अदालत ने राजेन्द्र लाहिड़ी, रामप्रसाद बिस्मिल, रोशन सिंह तथा अशफाक उल्लाह को मृत्यु दंड दिया । शेष तीनों को 19 दिसंबर को फांसी दी गई, लेकिन भयवश अंग्रेजी शासन ने राजेन्द्र लाहिड़ी को गोंडा कारागार में 17 दिसम्बर, 1927 को ही फांसी दे दी।