{"_id":"5fe871dc8ebc3e3db521c484","slug":"margashirsha-purnima-2020-date-and-vrat-pooja-vidhi","type":"story","status":"publish","title_hn":"जानिए कब है मार्गशीर्ष पूर्णिमा, कैसे पूजन करने से बन जाते हैं बिगड़े काम?","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जानिए कब है मार्गशीर्ष पूर्णिमा, कैसे पूजन करने से बन जाते हैं बिगड़े काम?
Mon, 28 Dec 2020 11:05 AM IST
vivek shukla
अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर।
अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 28 Dec 2020 11:05 AM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
साल 2020 की अंतिम पूर्णिमा 30 दिसंबर को है। मार्गशीर्ष के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मार्गशीर्ष पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन स्नान-ध्यान, दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजन और व्रत करने पर कष्टों से मुक्ति मिलती है और बिगड़े काम बन जाते हैं।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा का माहात्म्य
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार मार्गशीर्ष की पूर्णिमा तिथि पर अन्य पूर्णिमा तिथियों की तुलना में 32 गुना ज्यादा फल मिलता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर पवित्र नदी में स्नान करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। कहा जाता है कि इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा सुनना या पूजा करवाना बेहद शुभ होता है। पूर्णिमा तिथि के दिन भगवान शिव और चंद्रमा की पूजा का भी विशेष महत्व है।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा पूजन विधि
पंडित जोखन पांडेय शास्त्री के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। ब्रह्ममुहूर्त में स्नानादि से निवृत्त होकर भगवान स्थान साफ करें। भगवान विष्णु को आसन पर स्थापित करने के बाद गंध, पुष्प और भोग अर्पित करें। इसके बाद पूजा स्थल पर वेदी बनाएं और हवन-पूजन करें। हवन की समाप्ति के पश्चात के बाद प्रसाद को सभी जनों में बांट कर स्वयं भी ग्रहण करें। ब्राह्मणों को भोजन कराएं साथ ही सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों को दान करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
मार्गशीर्ष पूर्णिमा का माहात्म्य
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार मार्गशीर्ष की पूर्णिमा तिथि पर अन्य पूर्णिमा तिथियों की तुलना में 32 गुना ज्यादा फल मिलता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर पवित्र नदी में स्नान करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। कहा जाता है कि इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा सुनना या पूजा करवाना बेहद शुभ होता है। पूर्णिमा तिथि के दिन भगवान शिव और चंद्रमा की पूजा का भी विशेष महत्व है।
विज्ञापन
मार्गशीर्ष पूर्णिमा पूजन विधि
पंडित जोखन पांडेय शास्त्री के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। ब्रह्ममुहूर्त में स्नानादि से निवृत्त होकर भगवान स्थान साफ करें। भगवान विष्णु को आसन पर स्थापित करने के बाद गंध, पुष्प और भोग अर्पित करें। इसके बाद पूजा स्थल पर वेदी बनाएं और हवन-पूजन करें। हवन की समाप्ति के पश्चात के बाद प्रसाद को सभी जनों में बांट कर स्वयं भी ग्रहण करें। ब्राह्मणों को भोजन कराएं साथ ही सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों को दान करें।
विज्ञापन