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MMMUT के एलुमिनाई मीट: वो पढ़ाई के समय की यादें, मिश्रांबू पीना और रिक्शे की सवारी
Sat, 05 Nov 2022 02:12 PM IST
vivek shukla
राजन राय, गोरखपुर(
राजन राय, गोरखपुर(
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 05 Nov 2022 02:12 PM IST
सार
अमर उजाला से बातचीत में पुराने दिनों को साझा करते हुए वे भावुक भी हो गए। दरअसल, ये सभी लोग मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वर्ष 1996 बैच के छात्र हैं। देश के विभिन्न प्रांतों के अलावा अमेरिका, इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया समेत कई देशों में एमएमएमयूटी का परचम लहराने वाले ढेर सारे विद्यार्थी एलुमिनाई मीट में आए हुए हैं।
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- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
तकरीबन 25 साल बाद जब मालवीयंस मिले तो पढ़ाई के दिनों की यादें ताजा हो गईं। देश-विदेश से आए इन दोस्तों ने गोरखनाथ मंदिर जाकर दर्शन किया और फिर गोलघर आकर पहले की तरह अड्डेबाजी की। साथ में ग्रुप फोटो भी खिंचवाए। मिश्रांबू पीया और रिक्शे पर बैठकर बदलते गोरखपुर की तस्वीर को जेहन में कैद किया।
अमर उजाला से बातचीत में पुराने दिनों को साझा करते हुए वे भावुक भी हो गए। दरअसल, ये सभी लोग मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वर्ष 1996 बैच के छात्र हैं। देश के विभिन्न प्रांतों के अलावा अमेरिका, इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया समेत कई देशों में एमएमएमयूटी का परचम लहराने वाले ढेर सारे विद्यार्थी एलुमिनाई मीट में आए हुए हैं। गोलघर की सड़कों पर घूमना-फिरना, जुबिली सिनेमा हॉल में फिल्में देखना और बाल बिहार पर अड्डेबाजी आज भी वे नहीं भूले हैं। अपने पुरानी दिनचर्या को फिर से जीने की चाह लिए सभी शुक्रवार को रिजॉर्ट से निकले और रात तक घूमते-फिरते रहे।
आज भी नहीं भूलते वो सुनहरे पल
करीब 26 वर्ष के बाद गोरखपुर को देखने का मौका मिला है। बहुत बदलाव हुआ है। पौढ़ी गढ़वाल, उत्तराखंड से ट्रेन से रेलवे स्टेशन आता था और रिक्शा से इंजीनियरिंग कॉलेज जाता था। बाल बिहार, गोलघर की मिश्रांबू का स्वाद आज भी याद है। सभी मित्रों के साथ गोरखनाथ मंदिर जाकर दर्शन किया हूं और इसके बाद सीधे गोलघर आया। उन जगहों पर हम लोग गए जहां पहले वक्त बीताते थे। शनिवार को एलुमिनाई मीट में शामिल होंगे और विश्वविद्यालय के परिसर में घूमेंगे। -प्रदीप सुंदरियाल, मैकेनिकल ब्रांच, 1996 (अमेरिका के मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत )
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दोस्तों से वर्षों बाद मिल रोमांचित हूं
बहुत सारे देशों में हमारे बैच के छात्र अच्छी कंपनियों में नौकरी कर रहे हैं। कुछ लोगों से ही व्हाट्सएप पर चैटिंग होती है। यहां आने पर सभी लोग मिलेंगे। अभी दोस्तों के साथ समय व्यतीत कर बहुत ही अच्छा लगा। यह समय ताउम्र याद रहेगा। पढ़ाई के समय की यादें ताजा हो गईं। रामगढ़ताल का क्षेत्र तो अब पहचान में ही नहीं आ रहा है। गोलघर में पैटीज व मिश्रांबू और जुबिली सिनेमा में फिल्में देखना भला कैसे कोई भूल सकता है।-सिद्धार्थ गुप्ता, 1996 बैच-इलेक्ट्रिकल, असिस्टेंट वाइस प्रेसीडेंट डीसीएम
सीएम योगी के शहर से पढ़ा हूं, गर्व है
परिवार के साथ अमेरिका में ही शिफ्ट हो गया हूं। बहुत खुश हूं, अपने पुराने कॉलेज में बीताए हुए यादगार लम्हों को कुछ पलों को फिर से जीने को मिलेगा। अब तो कॉलेज, विश्वविद्यालय हो गया है और शहर विकसित। यहां घूमने- फिरने को सिर्फ गोलघर ही था। लेकिन, अब जहां जाइए, मॉल और शापिंग कांप्लेक्स हैं। अच्छे होटल और रेस्टोरेंट भी खुले हुए हैं। शहर को चमकता हुआ देखकर अच्छा लग रहा है। हम लोग भी शान से कहते हैं कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के शहर से पढ़ाई की है।-अमिताभ कुशवाहा, 1996 बैच-मैकेनिकल, अमेरिका में एक कंपनी में कार्यरत
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अमर उजाला से बातचीत में पुराने दिनों को साझा करते हुए वे भावुक भी हो गए। दरअसल, ये सभी लोग मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वर्ष 1996 बैच के छात्र हैं। देश के विभिन्न प्रांतों के अलावा अमेरिका, इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया समेत कई देशों में एमएमएमयूटी का परचम लहराने वाले ढेर सारे विद्यार्थी एलुमिनाई मीट में आए हुए हैं। गोलघर की सड़कों पर घूमना-फिरना, जुबिली सिनेमा हॉल में फिल्में देखना और बाल बिहार पर अड्डेबाजी आज भी वे नहीं भूले हैं। अपने पुरानी दिनचर्या को फिर से जीने की चाह लिए सभी शुक्रवार को रिजॉर्ट से निकले और रात तक घूमते-फिरते रहे।
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आज भी नहीं भूलते वो सुनहरे पल
करीब 26 वर्ष के बाद गोरखपुर को देखने का मौका मिला है। बहुत बदलाव हुआ है। पौढ़ी गढ़वाल, उत्तराखंड से ट्रेन से रेलवे स्टेशन आता था और रिक्शा से इंजीनियरिंग कॉलेज जाता था। बाल बिहार, गोलघर की मिश्रांबू का स्वाद आज भी याद है। सभी मित्रों के साथ गोरखनाथ मंदिर जाकर दर्शन किया हूं और इसके बाद सीधे गोलघर आया। उन जगहों पर हम लोग गए जहां पहले वक्त बीताते थे। शनिवार को एलुमिनाई मीट में शामिल होंगे और विश्वविद्यालय के परिसर में घूमेंगे। -प्रदीप सुंदरियाल, मैकेनिकल ब्रांच, 1996 (अमेरिका के मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत )
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दोस्तों से वर्षों बाद मिल रोमांचित हूं
बहुत सारे देशों में हमारे बैच के छात्र अच्छी कंपनियों में नौकरी कर रहे हैं। कुछ लोगों से ही व्हाट्सएप पर चैटिंग होती है। यहां आने पर सभी लोग मिलेंगे। अभी दोस्तों के साथ समय व्यतीत कर बहुत ही अच्छा लगा। यह समय ताउम्र याद रहेगा। पढ़ाई के समय की यादें ताजा हो गईं। रामगढ़ताल का क्षेत्र तो अब पहचान में ही नहीं आ रहा है। गोलघर में पैटीज व मिश्रांबू और जुबिली सिनेमा में फिल्में देखना भला कैसे कोई भूल सकता है।-सिद्धार्थ गुप्ता, 1996 बैच-इलेक्ट्रिकल, असिस्टेंट वाइस प्रेसीडेंट डीसीएम
सीएम योगी के शहर से पढ़ा हूं, गर्व है
परिवार के साथ अमेरिका में ही शिफ्ट हो गया हूं। बहुत खुश हूं, अपने पुराने कॉलेज में बीताए हुए यादगार लम्हों को कुछ पलों को फिर से जीने को मिलेगा। अब तो कॉलेज, विश्वविद्यालय हो गया है और शहर विकसित। यहां घूमने- फिरने को सिर्फ गोलघर ही था। लेकिन, अब जहां जाइए, मॉल और शापिंग कांप्लेक्स हैं। अच्छे होटल और रेस्टोरेंट भी खुले हुए हैं। शहर को चमकता हुआ देखकर अच्छा लग रहा है। हम लोग भी शान से कहते हैं कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के शहर से पढ़ाई की है।-अमिताभ कुशवाहा, 1996 बैच-मैकेनिकल, अमेरिका में एक कंपनी में कार्यरत