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Gorakhpur News: एमपी-बिहार से आ रहा मक्का, एथेनॉल उत्पादन का हब बन रहा गोरखपुर

Thu, 27 Aug 2026 02:42 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2026 02:42 AM IST
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Maize arriving from MP and Bihar; Gorakhpur emerging as an ethanol production hub.
गोरखपुर। पूर्वांचल में औद्योगिक गतिविधियों के बढ़ने के साथ गोरखपुर एथेनॉल उत्पादन का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। गीडा में मौजूदा इकाइयों से रोजाना छह लाख लीटर से अधिक एथेनॉल का उत्पादन हो रहा है। इसके लिए प्रतिदिन करीब 1200 से 1500 टन मक्का और लगभग 1500 टन चावल की जरूरत पड़ती है। खास बात यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में कच्चा माल अभी दूसरे राज्यों और जिलों से मंगाया जा रहा है। ऐसे में स्थानीय किसानों के लिए मक्का समेत एथेनॉल उद्योग में इस्तेमाल होने वाली फसलों की खेती आय बढ़ाने का बड़ा अवसर बन सकती है।
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गीडा में अभी श्रेयस ग्रुप की केयान डिस्टिलरी और आईजीएल में एथेनॉल का उत्पादन हो रहा है। अब दो और प्लांट लगाने की तैयारी है। श्रेयस ग्रुप धुरियापार में एक नई एथेनॉल इकाई स्थापित कर रहा है। इसके अलावा एक अन्य उद्यमी ने प्लांट लगाने के लिए गीडा प्रशासन से जमीन मांगी है। इससे स्थानीय स्तर पर मक्का और धान उत्पादकों के लिए बाजार का विस्तार होगा। किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूर की मंडियों या दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम हो सकती है। उद्योगों को स्थानीय स्तर पर पर्याप्त कच्चा माल मिलने पर परिवहन लागत भी घटेगी और उत्पादन इकाइयों को लगातार आपूर्ति मिल सकेगी।
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अभी बाहर से आ रहा अधिकांश कच्चा माल
एथेनॉल इकाइयों के लिए मक्का मध्य प्रदेश के जबलपुर, छिंदवाड़ा, अशोकनगर और गुना के अलावा बिहार के पूर्णिया, सहरसा और खगड़िया से मंगाया जाता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बरेली समेत अन्य जिलों से भी मक्के की आपूर्ति होती है। चावल एफसीआई के गोदामों के साथ बस्ती, महराजगंज, बलिया और आसपास के अन्य जिलों से आता है। स्थानीय स्तर पर मक्के का उत्पादन बढ़ने से किसानों को नजदीक में ही खरीदार मिल सकते हैं। इससे उन्हें उपज बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। वहीं, उद्योगों को भी ताजा कच्चा माल नजदीक से मिलने पर ढुलाई और आपूर्ति में लगने वाला समय कम होगा।
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तेल कंपनियों को जाता है एथेनॉल
श्रेयस ग्रुप के एमडी विनय सिंह ने बताया कि एथेनॉल बैतालपुर डिपो के साथ ही पूर्वांचल की तेल कंपनियों को भेजा जाता है। कई बार दूसरे प्रदेशों से भी मांग आती है तो वहां भी इसकी आपूर्ति की जाती है। उन्होंने बताया कि एक और प्लांट का जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों शिलान्यास कराने की तैयारी है।


चार हजार टन से अधिक हो सकती है खपत
मौजूदा इकाइयों में प्रतिदिन 1200 से 1500 टन मक्का और करीब 1500 टन चावल की खपत हो रही है। नई एथेनॉल इकाइयां शुरू होने के बाद कुल कच्चे माल की रोजाना मांग चार हजार टन से अधिक पहुंच सकती है। इतनी बड़ी खपत स्थानीय किसानों के लिए स्थायी बाजार का आधार बन सकती है। इससे कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ उद्योगों को स्थानीय स्तर पर मजबूत और नियमित आपूर्ति मिलने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
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