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पहल: काला नमक समेत धान की नई प्रजातियों पर होगा शोध, अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान से हुआ समझौता

Sat, 23 Dec 2023 02:39 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 23 Dec 2023 02:39 PM IST
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Mahayogi Gorakhnath University signs agreement with International Rice Research Institute
rice - फोटो : istock
महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय ने चावल अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (इरी) के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस एमओयू से काला नमक समेत चावल की अन्य प्रजातियों पर रिसर्च की दिशा में महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय और इरी मिलकर काम करेंगे।
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महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय परिसर में शुक्रवार को विश्वविद्यालय के कुलपति मेजर जनरल डॉ. अतुल वाजपेयी और अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के वाराणसी स्थित दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आईसार्क) के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस एमओयू के तहत उत्तर प्रदेश में चावल आधारित कृषि-खाद्य प्रणालियों को आकार देने की दिशा में अनुसंधान और विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा।
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साथ ही वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए इरी व विश्वविद्यालय के बीच युवा शोधकर्ताओं की विशेषज्ञता और कौशल को बढ़ाने के लिए क्षमता विकास और विनिमय कार्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा, दोनों संस्थानों का लक्ष्य साझेदारी के माध्यम से संयुक्त अनुसंधान और विकास परियोजनाओं को विकसित और कार्यान्वित करना है जिससे क्षेत्र में चावल आधारित खाद्य प्रणाली को सुदृढ़ किया जा सके।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार डॉ. जीएन सिंह ने कहा कि यह एमओयू पूर्वांचल के किसानों को खाद्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगा। एमओयू के आदान प्रदान के दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव, कृषि संकाय के डीन डॉ. विमल दूबे, आईसार्क के वैज्ञानिक डॉ. एंथनी फुलफोर्ड और डॉ. आशीष श्रीवास्तव आदि भी उपस्थित रहे।


काला नमक व अन्य पारंपरिक किस्मों को मिलेगा बढ़ावा : डॉ. सुधांशु
अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के डॉ. सुधांशु सिंह ने कहा कि महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय बाढ़ की पारिस्थितिकी वाले क्षेत्र में स्थित है और काला नमक की खेती के लिए जीआई टैग प्राप्त है। यह एमओयू काला नमक और अन्य पारंपरिक किस्मों को बढ़ावा देगा और इन किस्मों से आईसार्क द्वारा विकसित मूल्य-आधारित उत्पादों का व्यावसायीकरण करेगा।

 
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