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Gorakhpur News: महायोगी गोरखनाथ विवि और इरी मिलकर खोजेंगे धान की नई प्रजातियां

Sat, 23 Dec 2023 01:25 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 23 Dec 2023 01:25 AM IST
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Mahayogi Gorakhnath University and IRI will jointly discover new varieties of paddy.
महायोगी गोरखनाथ विवि ने किया अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान से समझौता
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चावल आधारित खाद्य प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में उठाए जाएंगे कई कदम
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय ने चावल अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (इरी) के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस एमओयू से काला नमक समेत चावल की अन्य प्रजातियों पर रिसर्च की दिशा में महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय और इरी मिलकर काम करेंगे।
महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय परिसर में शुक्रवार को विश्वविद्यालय के कुलपति मेजर जनरल डॉ. अतुल वाजपेयी और अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के वाराणसी स्थित दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आईसार्क) के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस एमओयू के तहत उत्तर प्रदेश में चावल आधारित कृषि-खाद्य प्रणालियों को आकार देने की दिशा में अनुसंधान और विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा।
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साथ ही वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए इरी व विश्वविद्यालय के बीच युवा शोधकर्ताओं की विशेषज्ञता और कौशल को बढ़ाने के लिए क्षमता विकास और विनिमय कार्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा, दोनों संस्थानों का लक्ष्य साझेदारी के माध्यम से संयुक्त अनुसंधान और विकास परियोजनाओं को विकसित और कार्यान्वित करना है जिससे क्षेत्र में चावल आधारित खाद्य प्रणाली को सुदृढ़ किया जा सके।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार डॉ. जीएन सिंह ने कहा कि यह एमओयू पूर्वांचल के किसानों को खाद्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगा। एमओयू के आदान प्रदान के दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव, कृषि संकाय के डीन डॉ. विमल दूबे, आईसार्क के वैज्ञानिक डॉ. एंथनी फुलफोर्ड और डॉ. आशीष श्रीवास्तव आदि भी उपस्थित रहे।

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काला नमक व अन्य पारंपरिक किस्मों को मिलेगा बढ़ावा : डॉ. सुधांशु
अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के डॉ. सुधांशु सिंह ने कहा कि महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय बाढ़ की पारिस्थितिकी वाले क्षेत्र में स्थित है और काला नमक की खेती के लिए जीआई टैग प्राप्त है। यह एमओयू काला नमक और अन्य पारंपरिक किस्मों को बढ़ावा देगा और इन किस्मों से आईसार्क द्वारा विकसित मूल्य-आधारित उत्पादों का व्यावसायीकरण करेगा।
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