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सौ साल पहले गोरखपुर आए थे महात्मा गांधी, ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज उठा था रेलवे स्टेशन
Mon, 08 Feb 2021 08:28 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 08 Feb 2021 08:28 AM IST
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गोरखपुर में महात्मा गांधी।(फाइल)
- फोटो : अमर उजाला।
करीब सौ साल पहले आठ फरवरी 1921 को महात्मा गांधी गोरखपुर आए थे। उन्होंने बाले मियां के मैदान पर जनसभा की थी। उन्हें सुनने के लिए एक तरह से जन सैलाब उमड़ पड़ा था। बताया जाता है कि करीब डेढ़ लाख लोग इस जनसभा में शामिल हुए थे।
सुबह-सुबह गोरखपुर रेलवे स्टेशन ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज रहा था। घुटनों तक धोती पहने दुबला-पतला एक व्यक्ति समर्थकों के साथ स्टेशन से बाहर निकला और ऊंचे स्थान पर खड़ा होकर जनता का अभिवादन स्वीकार किया। सामने एक चादर बिछी थी, उस पर पैसों की बारिश हो रही थी।
यह व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि महात्मा गांधी थे। यह उनका गोरखपुर में पहला और आखिरी आगमन था। उसी दिन उन्होंने बाले मियां मैदान पर जनता को संबोधित किया। वह दौर खिलाफत आंदोलन का था। लिहाजा सभा में उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा देने के अलावा अवध के किसानों को हिंसक आंदोलन नहीं करने की सलाह दी।
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सुबह-सुबह गोरखपुर रेलवे स्टेशन ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज रहा था। घुटनों तक धोती पहने दुबला-पतला एक व्यक्ति समर्थकों के साथ स्टेशन से बाहर निकला और ऊंचे स्थान पर खड़ा होकर जनता का अभिवादन स्वीकार किया। सामने एक चादर बिछी थी, उस पर पैसों की बारिश हो रही थी।
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यह व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि महात्मा गांधी थे। यह उनका गोरखपुर में पहला और आखिरी आगमन था। उसी दिन उन्होंने बाले मियां मैदान पर जनता को संबोधित किया। वह दौर खिलाफत आंदोलन का था। लिहाजा सभा में उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा देने के अलावा अवध के किसानों को हिंसक आंदोलन नहीं करने की सलाह दी।
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बाबा राघव दास की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल महात्मा गांधी को आमंत्रित करने गया था नागपुर
उस समय के दस्तावेजों के अनुसार सभा में करीब डेढ़ लाख लोगों की भीड़ थी। उस समय गोरखपुर की आबादी और यातायात के बेहद सीमित साधनों के मद्देनजर खुद में यह एतिहासिक था। गांधी जी उसी दिन रात साढ़े आठ बजे की ट्रेन से बनारस चले गए। वापसी में भी रेलवे स्टेशनों व पटरियों के किनारे महात्मा के दर्शन के लिए लोग उमड़ पड़े थे।
17 अक्तूबर 1920 को मौलवी मकसूद अहमद फैजाबादी और गौरीशंकर मिश्रा की अध्यक्षता में हुई सार्वजनिक सभा में महात्मा गांधी को गोरखपुर में आमंत्रित करने का निर्णय हुआ। टेलीग्राम के जरिए उनको बुलावा भेजा गया। इस बीच बाबा राघवदास की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल नागपुर के कांग्रेस अधिवेशन में गया और महात्मा गांधी से गोरखपुर आने का अनुरोध किया। उन्होंने जनवरी के अंत या फरवरी के शुरू में गोरखपुर आने का आमंत्रण कबूल कर लिया। इसके बाद तो उनके आने की बात पूरे इलाके में जंगल की आग की तरह फैल गई। यही वजह रही कि गांधी जी बाले मियां मैदान में आयोजित सभा में जन सैलाब उमड़ा।
17 अक्तूबर 1920 को मौलवी मकसूद अहमद फैजाबादी और गौरीशंकर मिश्रा की अध्यक्षता में हुई सार्वजनिक सभा में महात्मा गांधी को गोरखपुर में आमंत्रित करने का निर्णय हुआ। टेलीग्राम के जरिए उनको बुलावा भेजा गया। इस बीच बाबा राघवदास की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल नागपुर के कांग्रेस अधिवेशन में गया और महात्मा गांधी से गोरखपुर आने का अनुरोध किया। उन्होंने जनवरी के अंत या फरवरी के शुरू में गोरखपुर आने का आमंत्रण कबूल कर लिया। इसके बाद तो उनके आने की बात पूरे इलाके में जंगल की आग की तरह फैल गई। यही वजह रही कि गांधी जी बाले मियां मैदान में आयोजित सभा में जन सैलाब उमड़ा।