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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Mahatma Gandhi came to Deoria UP in two times

यूपी के इस जिले में दो बार आए थे महात्मा गांधी, लोगों के अंदर भरा था देश भक्ति का जोश

Sat, 30 Jan 2021 07:55 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, देवरिया।
अमर उजाला नेटवर्क, देवरिया। Published by: vivek shukla Updated Sat, 30 Jan 2021 07:55 PM IST
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Mahatma Gandhi came to Deoria UP in two times
इसी आश्रम में रुके थे बापू। - फोटो : अमर उजाला।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जिले में दो बार आए थे। वह वर्ष 1928 में बाबा राघव दास के साथ बरहजिया ट्रेन से बरहज पहुंचे थे। उन्होंने अनंत पीठ में आयोजित अधिवेशन को संबोधित किया था। वहीं 1929 में गौरीबाजार क्षेत्र के इंदूपुर स्थित मेला स्थल पर आए थे। यहां लोगों को विदेशी सामान का बहिष्कार करने के लिए प्रेरित किया था।

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फरवरी 1922 में चौरीचारा कांड से दुखी होकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने पूर्वांचल में आकर आंदोलन वापस कर लिया था। वर्ष 1928 में तीन डिब्बों वाली बरहजिया ट्रेन में सवार होकर वह बाबा राघव दास के साथ बरहज पहुंचे, जहां उन्होंने अनंत पीठ में आयोजित अधिवेशन को संबोधित किया।
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अधिवेशन में बापू को सुनने के लिए हजारों की भीड़ जमा हुई थी और लोगों ने देश की आजादी में सहयोग करने के लिए उन्हें पूरा भरोसा दिया। बरहजिया ट्रेन जब बरहज स्टेशन पर पहुंची तो सैकड़ों लोग बापू को देखने के लिए दौड़ पड़े। महात्मा गांधी स्टेशन से पैदल अनंत पीठ आश्रम पहुंचे, जहां पीपल के वृक्ष के नीचे अधिवेशन को संबोधित किया। यह वृक्ष आज भी साक्षी है।
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बापू को देखने के लिए उमड़ी थी भीड़

स्वतंत्रता आंदोलन में सिद्धपीठ परमहंस आश्रम धार्मिक और सामाजिक जनजागरण का केंद्र बिंदु रहा है। आजादी की लड़ाई के समय अनंतपीठ देेश भक्तों के लिए महफूज स्थली रहा। महात्मा गांधी ने अनंत आश्रम में बाबा राघव दास के सानिध्य में न केवल अधिवेशन को संबोधित किए, बल्कि उन्होंने देश की आजादी के लिए लोगों का आह्वान किया।

पीठाधीश्वर आंजनेय दास का कहना है कि महात्मा गांधी में 15 मिनट के अपने संबोधन में नफरत की दीवारें पाटने का कार्य किया और हिंदू-मुस्लिम को एक रहने की नसीहत दी। बाबा राघव दास को उन्होंने पूर्वाँचल का गांधी बताया।

उधर गौरीबाजार क्षेत्र के पथरहट गांव के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सूर्यनारायण सिंह उर्फ नेताजी ने पत्र लिखा और महात्मा गांधी को देवरिया आने का आग्रह किया, जिसे वह टाल नहीं सके और हामी भर दी। यह बात क्षेत्र में फैल गई और लोग बापू के आने की बाट जोहने लगे। इसके बाद वर्ष 1929 में वह गौरीबाजार के इंदूपुर गांव स्थित मेला स्थल पहुंचे।

उन्हें देखने तथा सुनने के लिए लोगों की भीड़ जुटी थी। उन्होंने मेला स्थल पर बने चबूतरे से लोगों को संबोधित किया और आजादी की लड़ाई को अहिंसात्मक तरीके से आगे बढ़ाने की अपील की। उनके साथ आचार्य कृपलानी तथा प्रयागध्वज सिंह आदि आए थे।
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