माफिया का अल्टीमेटम: कारोबार करना है तो रंगदारी देनी पड़ेंगी वरना कर दूंगा ओमप्रकाश जैसा हाल
एक जून को झुंगिया की एक जमीन पर अपने साथियों संग पहुंचे माफिया राकेश यादव ने धमकी देते हुए कहा कि गोरखपुर में धंधा करना है तो रंगदारी देनी होगी। अगर, नहीं दिए तो तुम्हारा भी हाल ओमप्रकाश जैसा कर दूंगा।
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गोरखपुर में जिला बदर माफिया राकेश यादव की तलाश में एक ओर पुलिस टीम लगी थी तो दूसरी ओर वह अपने गांव में ही पहुंचकर जमीन के मामले में धमकी देकर अपने मंसूबे जाहिर कर रहा था। एक जून को झुंगिया की एक जमीन पर अपने साथियों संग पहुंचे माफिया राकेश यादव ने धमकी देते हुए कहा कि गोरखपुर में धंधा करना है तो रंगदारी देनी होगी। अगर, नहीं दिए तो तुम्हारा भी हाल ओमप्रकाश जैसा कर दूंगा। माफिया ने पहले दर्ज कराए गए केस को भी वापस लेने की धमकी दी। पीड़ित झुगिया के आशीष प्रजापति की तहरीर पर पुलिस ने माफिया राकेश यादव, उसके साथी दिनेश यादव, मंटू उर्फ आकाश कन्नौजिया, बेचू यादव और धनेश यादव के खिलाफ मारपीट, रंगदारी और धमकी देने की धारा में केस दर्ज कर लिया है।
जानकारी के मुताबिक, सत्ता बदलने के बाद माफिया के अपराध से तौबा करने के दिखावे को सच मानने वाली पुलिस के सामने हकीकत आने लगी है। अंडरग्राउंड माफिया की पुलिस ने फाइल खोली तो सबके कारनामे भी सामने आने लगे हैं। माफिया राकेश के गांव के ही आशीष ने पुलिस को दी तहरीर में लिखा है कि गांव के रहने वाले गैंगस्टर राकेश यादव से पुरानी रंजिश है। वह कई बार प्राणघातक हमला कर चुका है। राकेश यादव और उसके गिरोह के लोगों ने जंगल छत्रधारी निवासी दीपचंद्र निषाद पर भी गोली चलाई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हुए थे।
2017 में हुई इस घटना में पिपराइच थाने में केस दर्ज है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बाद राकेश ने फिर जानलेवा हमला किया, जिसमे गांव के आदित्य शर्मा को गोली लगी थी। यह घटना 2020 में हुई थी। इस मामले में गवाही चल रही है। तहरीर में कहा कि इसी क्रम में एक जून को जब मैं अपनी जमीन पर था, उसी समय माफिया राकेश साथियों के साथ आया और पुराने मामले में गवाही न देने की धमकी दी। उसने कहा कि मेरे पक्ष में गवाही नहीं दी तो तुम्हारा हश्र भी ओमप्रकाश पासवान जैसा ही करूंगा। आरोप है कि माफिया ने जमीन के धंधे में का 50 प्रतिशत बतौर रंगदारी देने की मांग रखी, न देने पर गोरखपुर में कारोबार नहीं करने की धमकी दी। इसके बाद राकेश जान से मारने की धमकी देते हुए चला गया। पीड़ित की तहरीर पर पुलिस केस दर्ज कर मामले की जांच में जुटी है।
अंडरग्राउंड होकर जमीन का धंधा करने वाला माफिया राकेश यादव बदमाशों की सूची में जिले के टॉप-10 और प्रदेश के टॉप-61 में शामिल है। उसकी जड़ें जमीन के धंधे में इतनी गहरी हैं कि विवादित भूमि पर कब्जा करने से लेकर उसे बेचने तक में कोई हस्तक्षेप नहीं करता है। 90 के दशक में अपराध में कदम रखने वाले इस माफिया पर 52 मुकदमे दर्ज हैं। सबसे ज्यादा चर्चा में वह 25 मार्च 1996 को तब आया जब मानीराम के तत्कालीन विधायक ओमप्रकाश पासवान की माल्हनपार रोड पर चुनावी जनसभा में बम मारकर उड़ा दिया था और उसे मुख्य आरोपी बनाया गया।
माफिया राकेश यादव लंबे समय से गुपचुप तरीके से अपराध जगत में अपनी जड़ें जमाए हुए है। पुलिस उसकी गतिविधियों से अनजान रही। राकेश के बदले अंदाज का पता पुलिस को 2021 में तब चला, जब उसके शूटर विपिन सिंह ने दिनदहाड़े फिल्मी अंदाज में तीन लोगों पर गोलियां बरसा दीं थीं। पुलिस ने इस मामले में विपिन सिंह को मुठभेड़ में मार गिराया, साथ ही राकेश यादव को केस का आरोपी बनाया। बाद में वह कोर्ट से रिहा हो गया और जमीन के धंधे से जुड़ गया। जमीन के धंधे में पांव जमाने के बाद उसकी अदावत नए उम्र के बदमाशों से हो गई। इस बीच राकेश का नाम कई मामलों में सामने आया, लेकिन उसे आरोपी नहीं बनाया जा सका। उसने अपने राजनीतिक संबंधों को जमीन के धंधे और अपराध में खूब भुनाया। प्रदेश में सत्ता बदली तो कई मामलों में उसके खिलाफ केस दर्ज हुए, लेकिन वह पुलिस की पकड़ से दूर ही रहा। पुलिस के मुताबिक, छोटू प्रजापति भी राकेश यादव के साथ ही मिलकर जमीन का धंधा करता था। बाद में वह उसका साथ छोड़कर खुद अपना धंधा चमकाने लगा। यह बात राकेश यादव को खटकने लगी। फिर 2021 में इसी फेर में उसकी छोटू प्रजापति से तकरार हुई।
माफिया राकेश यादव पर दर्ज मुकदमों में से छह मामलों में अब पुलिस कोर्ट में पैरवी करेगी। कोर्ट में गवाही, साक्ष्य प्रस्तुत कराएगी ताकि सजा हो सके। एसपी नार्थ मनोज अवस्थी के मुताबिक, पीपीगंज थाने में दर्ज गैंगस्टर केस अपराध संख्या 89/91, गुलरिहा थाने में दर्ज 332/99, गुलरिहा में दर्ज आर्म्स एक्ट अपराध संख्या 333/99, गुलरिहा के अपराध संख्या 600/19, पिपराइच में दर्ज अपराध संख्या 77/2020, गुलरिहा एक्ट अपराध संख्या 870/20 की पैरवी पुलिस करेगी।
माफिया राकेश यादव पर 1988 में चिलुआताल थाने में हत्या की कोशिश का पहला केस दर्ज हुआ था। उसके बाद 1990 में पीपीगंज थाने में हत्या का केस दर्ज हो गया। इन दो मामलों में नाम सामने आने के बाद राकेश पर लगातार केस दर्ज किए गए। पीपीगंज, गुलरिहा, शाहपुर, चिलुआताल, कोठीभार, महराजगंज, खजनी, कोतवाली, झंगहा, संतकबीरनगर के महुली, बांसगांव, सहजनवां, गोरखनाथ, पिपराइच थाने में कुल 52 मुकदमे माफिया पर दर्ज हैं। इसमें अपहरण, रंगदारी, हत्या, गैंगस्टर, गुंडा सहित अन्य मामले शामिल हैं।
माफिया राकेश यादव की 74 लाख 95 हजार रुपये की अवैध संपत्ति पुलिस जब्त करा चुकी है। अब एक बार फिर सुर्खियों में नाम आने के बाद पुलिस की ओर से पत्नी व ऐसे करीबियों की संपत्तियों का ब्योरा जुटाया जा रहा है, जिसमें माफिया राकेश यादव का पैसा लगा हो। इसके लिए पुलिस ने बीते दिनों में जीडीए को पत्र लिखा गया है।