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Pradosh Vrat: श्रावण मास का आज पहला प्रदोष व्रत, श्रद्धालु प्रदोष व्रत रखकर भगवान शिव को करेंगे प्रसन्न

Thu, 05 Aug 2021 02:14 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 05 Aug 2021 02:14 AM IST
सार

माना जाता है श्राप के कारण चंद्र देव को क्षय रोग हो गया था। तब उन्होंने हर माह की त्रयोदशी तिथि पर शिवजी को समर्पित प्रदोष व्रत रखना आरंभ किया था, जिसके शुभ फल से उन्हें क्षय रोग से मुक्ति मिली।

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Lord Shiva and Mother Parvati will be worshiped by law in Gorakhpur
प्रदोष व्रत। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

भगवान शिव और माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालु श्रावण मास का पहला प्रदोष व्रत बृहस्पतिवार को रखेंगे। हिंदू पंचांग के अनुसार महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। बृहस्पतिवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को गुरु प्रदोष व्रत भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव की पूजा और व्रत रखने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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प्रदोष व्रत का महत्व
पंडित शरद चंद्र मिश्रा के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन शिव पुराण और भगवान शिव के मंत्रों का जाप किया जाता है। भक्त पर हमेशा भगवान शिव की कृपा बनी रहती है। साथ ही व्रती की दुख और दरिद्रता दूर होती है। उन्होंने बताया कि प्रदोष व्रत भगवान शिव के साथ चंद्रदेव से भी जुड़ा है।
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मान्यतानुसार प्रदोष का व्रत सबसे पहले चंद्रदेव ने ही किया था। माना जाता है श्राप के कारण चंद्र देव को क्षय रोग हो गया था। तब उन्होंने हर माह की त्रयोदशी तिथि पर शिवजी को समर्पित प्रदोष व्रत रखना आरंभ किया था, जिसके शुभ फल से उन्हें क्षय रोग से मुक्ति मिली।

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ऐसे करें पूजन

ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्यकर्मों से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद मंदिर या घर के पूजागृह में जल और पुष्प लेकर प्रदोष व्रत व पूजन का संकल्प लें। फिर शिव और पार्वती की आराधना करें। दिनभर व्रत रहते हुए मन ही मन भगवान शिव के मंत्र का जाप करते रहें। शाम को प्रदोष काल मुहूर्त में पुन: स्नान कर पूजा स्थल पर भगवान शिव की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित करें।

अब भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करें। फिर उनको धूप, अक्षत, पुष्प, धतूरा, फल, चंदन, गाय का दूध, भांग, धतूरा आदि अर्पित करें। इसके बाद भगवान को भोग लगाएं। इस दौरान ओम नम: शिवाय: मंत्र का जाप करते रहें। शिव चालीसा के पाठ के बाद भगवान शिव की आरती करें। रात्रि जागरण के बाद अगले दिन सुबह स्नान आदि करके भगवान शिव की पूजा करें। फिर ब्राह्मण को दान देने के बाद पारण कर व्रत को पूरा करें।

पूजा का शुभ मुहूर्त
शाम 7 बजकर 9 मिनट से रात 9 बजकर 16 मिनट तक।

 
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