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लॉकडाउन-4 : उद्योगों को शुरू करने के लिए उद्यमियों के सामने 5 बड़ी चुनौतियां बरकरार

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Mon, 18 May 2020 06:35 PM IST
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lockdown 4: problems are continew for industrilist
लॉकडाउन 3 खत्म हो चुका है और लॉकडाउन 4 की शुरुआत हो गई है। फिर भी गोरखपुर के औद्योगिक इकाइयों के सामने चुनौतियां जस की तस बनी हुई है। एक दृष्टिकोण से देखा जाए तो इन औद्योगिक इकाइयों के सामने 5 ऐसी चुनौतियां बरकरार हैं जिनका निदान हुए बिना गोरखपुर में औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार बहुत तेज नहीं हो सकती है। आज की तारीख में गीडा औद्योगिक क्षेत्र के अलावा गोरखनाथ इंडस्ट्रीज एरिया और गोरखनाथ इंडस्ट्रियल एस्टेट मैं केवल करीब डेढ़ सौ फैक्ट्रियां ही चल पा रही हैं। औद्योगिक जरूरतों को पूरा किए बिना औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार बहुत बेहतर होने की उम्मीद भी नहीं दिख रही हैं। चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष आरएन सिंह, पूर्व अध्यक्ष एसके अग्रवाल समेत अन्य उद्यमियों को इस बात की पूरी उम्मीद है कि लॉक डाउन 4 में औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार को बेहतर करने के लिए कुछ और राहत भरे कदम शासन और प्रशासन की ओर से उठाया जाएगा। 0000 चुनौती संख्या 1 :: श्रमिकों का संकट उद्योगों को संचालित करने के लिए सबसे ज्यादा जरूरत वर्करों की होती है। लेकिन लॉकडाउन के नियमानुसार मात्र 50% श्रमिकों के साथ ही काम करने के बाद देता है। ऐसे में सभी मशीनों पर वर्कर नहीं होने की वजह से इन को संचालित करने में दिक्कत आ रही है। परिवहन व्यवस्था शुरू नहीं होने की वजह से इन श्रमिकों को रोजगार स्थल तक आने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 0000चुनौती संख्या दो :: रॉ मटेरियल का उपलब्ध ना होना गोरखपुर के औद्योगिक इकाइयों में देश के विभिन्न राज्यों से कच्चे माल की आपूर्ति होती है लेकिन उन राज्यों में भी श्रमिकों को लेकर इसी तरह की दिक्कतों की वजह से उद्योगों को जरूरत के मुताबिक कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है। इस वजह से यहां के उद्योगों को पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। उद्योगपतियों का कहना है कि पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल नहीं मिलने की वजह से मशीन को बार-बार बंद करने की नौबत आ जाती है। इससे लागत में भी बढ़ोतरी होती है। 000 चुनौती संख्या 3 :::: ट्रांसपोर्टेशन में आ रही है दिक्कत दूसरे राज्यों से ट्रांसपोर्ट के जरिए माल मंगाने में अब भी कई तरह की दिक्कतें है। लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत वहां से माल आने के बाद लोकल ट्रांसपोर्ट के बहुत कम संख्या में और निर्धारित रूट पर ही चलने की बाध्यता के वजह से तैयार माल की डिलीवरी संभव नहीं हो पा रही है। इसकी वजह से डिमांड के अनुरूप माल भी उपलब्ध नहीं कराए जा पा रहा है। 000 चुनौती संख्या 4 अभी कई बाजार का बंद होना गोरखपुर में अभी कई ऐसे बाजार बंद है जिनके सामान गीडा या अन्य औद्योगिक क्षेत्र में होते हैं। कपड़ा का बाजार पूरी तरह से बंद है जबकि गोरखपुर में होजरी की कई फैक्ट्रियां हैं। हार्डवेयर की भी दुकाने पूरी तरह से नहीं खुल रही है। इसका असर गीडा की औद्योगिक इकाइयों पर पड़ा है। उद्यमियों का कहना है कि जब माल बेचने के लिए बाजार उपलब्ध ही नहीं है तो नया माल तैयार कर फैक्ट्री में डंप करके रखना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है। 000 चुनौती संख्या 5 उद्योगों के सामने बरकरार है पूँजी की कमी की चुनौती उत्पादन करीब करीब ठप होने की वजह से अधिकांश उद्यमियों के सामने पूंजी की चुनौती बरकरार है। उद्योगपतियों का कहना है कि अभी बहुत सारे कर्मचारियों को बैठाकर वेतन देना पड़ रहा है। इसके अलावा बैंक के लोन की किस्त चुकाने बिजली बिल अदा करने मैं भी काफी खर्च करना पड़ रहा है ऐसे में जब तक उत्पादन की रफ्तार नहीं बढ़ जाती है तब तक परेशानी कम नहीं होने वाली है। बिजली का फिक्स चार्ज अगर माफ हो जाता है तो फैक्ट्री संचालकों को राहत मिलेगी।
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