{"_id":"6ae11993a05f69423907a6e2","slug":"life-unfolded-on-the-pavement-in-the-hope-of-medical-treatment-for-their-children-gorakhpur-news-c-7-gkp1038-1499723-2026-10-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: बच्चों के इलाज की उम्मीद में फुटपाथ पर बिछ गई जिंदगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: बच्चों के इलाज की उम्मीद में फुटपाथ पर बिछ गई जिंदगी
विज्ञापन
- रैन बसेरे का किराया और भोजन जुटाना मुश्किल, मच्छरदानी को बना लिया आशियाना
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बच्चे की सलामती की उम्मीद में मां-बाप अस्पताल के भीतर और बाहर अपनी जिंदगी की सबसे मुश्किल रातें गुजार रहे हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के 500 बेड वाले बाल रोग संस्थान के सामने फुटपाथ पर लगी मच्छरदानियां उन परिवारों की बेबसी बयां कर रही हैं जो बच्चों के इलाज के लिए दूर-दराज से आए हैं। किसी का बच्चा कई दिनों से भर्ती है तो कोई महीने भर से अस्पताल के बाहर खुले आसमान के नीचे रात काट रहा है।
दरअसल, वार्ड के पास रैन बसेरा है लेकिन उसमें भी भीड़ रहती है। इसमें एक व्यक्ति को 50 रुपये शुल्क देना पड़ता है। बहुत सारे लोग इसे भी देने में असमर्थ रहते हैं। खलीलाबाद निवासी सुनील की पत्नी जुड़वां बच्चों के साथ अस्पताल के वार्ड में भर्ती हैं। सुनील और उनकी मां एक महीने से बाहर रह रहे हैं। सुनील बताते हैं कि रैन बसेरे में एक व्यक्ति के ठहरने का किराया 50 रुपये है। इसके बाद भोजन का खर्च अलग से उठाना पड़ता है।
इलाज के दौरान पहले ही आर्थिक परेशानी झेल रहे परिवार के लिए यह खर्च उठाना मुश्किल है। ऐसे में उन्होंने 700 रुपये में टेंटनुमा मच्छरदानी खरीदी है। इसमें दो से तीन लोग आराम से सो जाते हैं। दिनभर परिवार के लोग वार्ड के आसपास रहते हैं और रात में इसी मच्छरदानी में सो जाते हैं। ओस से बचने के लिए ऊपर चादर डाल लेते हैं। यही उनका अस्थायी आशियाना है, जहां हर रात बच्चे के स्वस्थ होने की उम्मीद के साथ गुजरती है।
विज्ञापन
रात बिताने को मजबूर हैं परिवार
कुशीनगर के पडरौना निवासी महेश का बेटा आदित्य भी 25 दिनों से अस्पताल में भर्ती है। महेश अपने भाई और अन्य रिश्तेदारों के साथ अस्पताल के बाहर मच्छरदानी में रात गुजार रहे हैं। सुनील और महेश की तरह करीब 25 से 30 परिवार यहां इसी तरह रात बिताने को मजबूर हैं। बच्चों के इलाज की चिंता के बीच इन परिवारों के सामने सिर छिपाने और भोजन जुटाने की चुनौती भी है।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बच्चे की सलामती की उम्मीद में मां-बाप अस्पताल के भीतर और बाहर अपनी जिंदगी की सबसे मुश्किल रातें गुजार रहे हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के 500 बेड वाले बाल रोग संस्थान के सामने फुटपाथ पर लगी मच्छरदानियां उन परिवारों की बेबसी बयां कर रही हैं जो बच्चों के इलाज के लिए दूर-दराज से आए हैं। किसी का बच्चा कई दिनों से भर्ती है तो कोई महीने भर से अस्पताल के बाहर खुले आसमान के नीचे रात काट रहा है।
दरअसल, वार्ड के पास रैन बसेरा है लेकिन उसमें भी भीड़ रहती है। इसमें एक व्यक्ति को 50 रुपये शुल्क देना पड़ता है। बहुत सारे लोग इसे भी देने में असमर्थ रहते हैं। खलीलाबाद निवासी सुनील की पत्नी जुड़वां बच्चों के साथ अस्पताल के वार्ड में भर्ती हैं। सुनील और उनकी मां एक महीने से बाहर रह रहे हैं। सुनील बताते हैं कि रैन बसेरे में एक व्यक्ति के ठहरने का किराया 50 रुपये है। इसके बाद भोजन का खर्च अलग से उठाना पड़ता है।
विज्ञापन
इलाज के दौरान पहले ही आर्थिक परेशानी झेल रहे परिवार के लिए यह खर्च उठाना मुश्किल है। ऐसे में उन्होंने 700 रुपये में टेंटनुमा मच्छरदानी खरीदी है। इसमें दो से तीन लोग आराम से सो जाते हैं। दिनभर परिवार के लोग वार्ड के आसपास रहते हैं और रात में इसी मच्छरदानी में सो जाते हैं। ओस से बचने के लिए ऊपर चादर डाल लेते हैं। यही उनका अस्थायी आशियाना है, जहां हर रात बच्चे के स्वस्थ होने की उम्मीद के साथ गुजरती है।
विज्ञापन
रात बिताने को मजबूर हैं परिवार
कुशीनगर के पडरौना निवासी महेश का बेटा आदित्य भी 25 दिनों से अस्पताल में भर्ती है। महेश अपने भाई और अन्य रिश्तेदारों के साथ अस्पताल के बाहर मच्छरदानी में रात गुजार रहे हैं। सुनील और महेश की तरह करीब 25 से 30 परिवार यहां इसी तरह रात बिताने को मजबूर हैं। बच्चों के इलाज की चिंता के बीच इन परिवारों के सामने सिर छिपाने और भोजन जुटाने की चुनौती भी है।