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Gorakhpur News: दीनदयाल उपाध्याय का जीवन सादगी, समर्पण और राष्ट्रनिष्ठा का अनुपम उदाहरण
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गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय का जीवन सादगी, समर्पण और राष्ट्रनिष्ठा का अनुपम उदाहरण है।
कुलपति बुधवार को दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर आयोजित व्याख्यान एवं पुरस्कार वितरण समारोह को बतौर अध्यक्ष संबोधित कर रही थीं। दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा एवं राष्ट्रवादी चिंतन पर आधारित शोध एवं विमर्श को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गोरक्ष प्रांत के प्रचारक रमेश ने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय का चिंतन भारतीय संस्कृति की आत्मा से अनुप्राणित था। उनका एकात्म मानववाद आज भी राष्ट्र निर्माण के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत है। शोध पीठ की निदेशक प्रो. सुषमा पांडेय ने ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में वैचारिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों के संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि के अवसर पर एक से 10 फरवरी तक गोरखपुर, देवरिया और कुशीनगर के संबद्ध कॉलेजों के छात्रों के बीच विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया था। विजेताओं को भी बुधवार को सम्मानित किया गया। सभी नोडल अधिकारियों प्रो. ओम प्रकाश सिंह, प्रो. बृजेश पांडेय, प्रो. ममता मणि त्रिपाठी, डॉ. रंजनलता व समन्वयक डॉ. आमोद राय को भी सम्मानित किया गया।
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कार्यक्रम की प्रस्तावना डॉ. शैलेश सिंह ने पढ़ी। संचालन डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी और आभार ज्ञापन डॉ. अमित उपाध्याय ने किया। इस अवसर पर प्रो. चंद्रशेखर, प्रो. कीर्ति पांडेय, प्रो. उमा श्रीवास्तव, प्रो. शरद मिश्र, प्रो. विनोद सिंह, डॉ. राजेश सिंह, डॉ. मीतू सिंह, डॉ. ममता चौधरी व डॉ. ज्योतिबाला आदि की उपस्थिति रही।
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कुलपति बुधवार को दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर आयोजित व्याख्यान एवं पुरस्कार वितरण समारोह को बतौर अध्यक्ष संबोधित कर रही थीं। दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा एवं राष्ट्रवादी चिंतन पर आधारित शोध एवं विमर्श को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गोरक्ष प्रांत के प्रचारक रमेश ने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय का चिंतन भारतीय संस्कृति की आत्मा से अनुप्राणित था। उनका एकात्म मानववाद आज भी राष्ट्र निर्माण के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत है। शोध पीठ की निदेशक प्रो. सुषमा पांडेय ने ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में वैचारिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों के संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि के अवसर पर एक से 10 फरवरी तक गोरखपुर, देवरिया और कुशीनगर के संबद्ध कॉलेजों के छात्रों के बीच विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया था। विजेताओं को भी बुधवार को सम्मानित किया गया। सभी नोडल अधिकारियों प्रो. ओम प्रकाश सिंह, प्रो. बृजेश पांडेय, प्रो. ममता मणि त्रिपाठी, डॉ. रंजनलता व समन्वयक डॉ. आमोद राय को भी सम्मानित किया गया।
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कार्यक्रम की प्रस्तावना डॉ. शैलेश सिंह ने पढ़ी। संचालन डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी और आभार ज्ञापन डॉ. अमित उपाध्याय ने किया। इस अवसर पर प्रो. चंद्रशेखर, प्रो. कीर्ति पांडेय, प्रो. उमा श्रीवास्तव, प्रो. शरद मिश्र, प्रो. विनोद सिंह, डॉ. राजेश सिंह, डॉ. मीतू सिंह, डॉ. ममता चौधरी व डॉ. ज्योतिबाला आदि की उपस्थिति रही।