Ganesh chaturthi 2021: चित्रा नक्षत्र और ब्रह्म योग में आज विराजेंगे बप्पा, जानिए कैसे करें प्रथम पूज्य को प्रसन्न
10 सितंबर को चतुर्थी तिथि का मान संपूर्ण दिन और रात्रि 12 बजकर 12 मिनट तक है। चित्रा नक्षत्र शाम चार बजकर एक मिनट एवं ब्रह्म योग रात को नौ बजकर 35 मिनट तक है।
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गणेश चतुर्थी का पर्व 10 सितंबर शुक्रवार को मनाया जा रहा है। गणपति बप्पा के विराजने के साथ दस दिनों तक चलने वाले गणेश उत्सव की शुरुआत हो गई है। जिसका समापन अनंत चतुर्दशी को होगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश का जन्म हुआ था।
वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, 10 सितंबर को चतुर्थी तिथि का मान संपूर्ण दिन और रात्रि 12 बजकर 12 मिनट तक है। चित्रा नक्षत्र शाम चार बजकर एक मिनट एवं ब्रह्म योग रात को नौ बजकर 35 मिनट तक है। चंद्रोदय चतुर्थी तिथि में होने के कारण गणेश चतुर्थी इसी दिन मान्य रहेगा।
गणेश चतुर्थी का महत्व
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी की दोपहर प्रथम पूज्य भगवान गणेश का अवतरण हुआ था। इसी उपलक्ष्य में भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को प्रतिवर्ष गणेश चतुर्थी के रूप में गणेश प्राकाट्य उत्सव का पर्व मनाया जाता है। गणेशजी बुद्धि के देवता हैं। भगवान गणेश की उपासना से कार्यों में सफलता मिलती है। ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि होती है। साथ ही ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
ऐसे करें पूजन
पंडित शरद चंद्र मिश्रा के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि को प्रात:काल स्नानादि नित्य कर्म से निवृत्त होकर अपनी शक्ति के अनुसार सोने, चांदी, पीतल अथवा गोबर से निर्मित गणेशजी की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद गणेशजी का षोडशोपचार सविधि करें। गणेश जी की मूर्ति पर सिंदूर अवश्य चढ़ाएं। साथ ही मोदक का भोग लगाएं। अंत में आरती कर पूजन संपन्न करें।
गणेश चतुर्थी की तैयारियां में जुटे लोग
गणेश चतुर्थी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। पंडालों में 10 दिनों तक भगवान गणेश की प्रतिमा रख विधि-विधान से पूजर अर्चना की जाती है। अनंत चतुर्दशी के दिन प्रतिमा का विसर्जन होता है। गणेश चतुर्थी की तैयारियों में लोग जुटे हुए हैं। कोरोना के कारण पिछले साल के बाद इस साल भी शहर में कहीं भी भव्य पंडाल नहीं लगाए जा रहे हैं। घरों और दुकानों में ही भगवान गणेश की छोटी प्रतिमा रख समितियां विधि-विधान से पूजन अर्चन करेंगी। मूर्तिकार भी मांग के मुताबिक एक फीट से पांच फीट तक की ही गणेश प्रतिमाओं का निर्माण कर रहे हैं।