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गोरखपुर: चार करोड़ से खुखुदूं व पावानगर जैन मंदिर का होगा जीर्णोंद्धार, लोगों की है गहरी आस्था
Wed, 02 Nov 2022 01:44 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 02 Nov 2022 01:44 PM IST
सार
क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी रविंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि देवरिया के खुखुंदू व कुशीनगर के पावानगर जैन मंदिर के जीर्णोद्धार और पर्यटन विकास के कार्यों से संबंधित प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। प्रस्ताव पास होते ही यहां कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
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jain temple
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
पर्यटन विभाग चार करोड़ रुपये से देवरिया खुखुंदू और कुशीनगर के पावानगर में स्थित जैन मंदिरों का जीर्णोद्धार कराने की तैयारी में है। साथ ही पर्यटन सुविधाओं से संबंधित कार्य होंगे। विभाग ने इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है। दोनों मंदिरों से जैन धर्म के लोगों की गहरी आस्था जुड़ी है।
देवरिया जिले के खुखुंदू में जैन धर्म के नौवें तीर्थंकर भगवान पुष्पदंत नाथ का विशाल मंदिर और उसमें उनकी प्रतिमा स्थापित है। इसे देखने के लिए विश्व भर से लोग आते हैं। यह जैन धर्मावलंबियों के लिए आकर्षण का केंद्र है। ऐसी मान्यता है कि यहां के घने जंगलों में भगवान पुष्पदंत नाथ ने वर्षों तपस्या की। वे जैन धर्म के नौवें तीर्थंकर हुए।
वहीं बात करें कुशीनगर जिले के पावानगर की तो यहां जैन धर्म के 24वें व अंतिम तीर्थंकर महावीर स्वामी ने अपने जीवन का अंतिम उपदेश दिया था। भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण स्थल पर श्री दिगंबर जैन पावानगर सिद्ध क्षेत्र द्वारा वर्ष 1971 में जैन मंदिर का निर्माण कराया गया। इसके बाद मंदिर में पुजारी नियुक्त कर पूजा शुरू हुई।
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इस मंदिर में भगवान महावीर स्वामी के अलावा प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव, नेमीनाथ, पार्श्वनाथ की मूर्तियां स्थापित की गईं। प्रति वर्ष उनके निर्वाण दिवस की सुबह देशभर से जैन अनुयायी पहुंचते हैं और शोभायात्रा निकालने के साथ विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी रविंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि देवरिया के खुखुंदू व कुशीनगर के पावानगर जैन मंदिर के जीर्णोद्धार और पर्यटन विकास के कार्यों से संबंधित प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। प्रस्ताव पास होते ही यहां कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
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देवरिया जिले के खुखुंदू में जैन धर्म के नौवें तीर्थंकर भगवान पुष्पदंत नाथ का विशाल मंदिर और उसमें उनकी प्रतिमा स्थापित है। इसे देखने के लिए विश्व भर से लोग आते हैं। यह जैन धर्मावलंबियों के लिए आकर्षण का केंद्र है। ऐसी मान्यता है कि यहां के घने जंगलों में भगवान पुष्पदंत नाथ ने वर्षों तपस्या की। वे जैन धर्म के नौवें तीर्थंकर हुए।
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वहीं बात करें कुशीनगर जिले के पावानगर की तो यहां जैन धर्म के 24वें व अंतिम तीर्थंकर महावीर स्वामी ने अपने जीवन का अंतिम उपदेश दिया था। भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण स्थल पर श्री दिगंबर जैन पावानगर सिद्ध क्षेत्र द्वारा वर्ष 1971 में जैन मंदिर का निर्माण कराया गया। इसके बाद मंदिर में पुजारी नियुक्त कर पूजा शुरू हुई।
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इस मंदिर में भगवान महावीर स्वामी के अलावा प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव, नेमीनाथ, पार्श्वनाथ की मूर्तियां स्थापित की गईं। प्रति वर्ष उनके निर्वाण दिवस की सुबह देशभर से जैन अनुयायी पहुंचते हैं और शोभायात्रा निकालने के साथ विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी रविंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि देवरिया के खुखुंदू व कुशीनगर के पावानगर जैन मंदिर के जीर्णोद्धार और पर्यटन विकास के कार्यों से संबंधित प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। प्रस्ताव पास होते ही यहां कार्य शुरू करा दिया जाएगा।