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खोराबार टाउनशिप एवं मेडिसिटी योजना: विरोध के बाद नहीं चला GDA का बुलडोजर, 100 से आर्बिट्रेशन दाखिल

Wed, 12 Jul 2023 05:45 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 12 Jul 2023 05:45 PM IST
सार

रिंग रोड निर्माण के मामले में बिचौलिए सक्रिय हो गए हैं। इस योजना में जिनकी जमीन अधिग्रहित नहीं की गई है, लेकिन वह किसानाें को गुमराह करने में जुटे हैं। बिचौलियों की वजह से माहौल खराब हो रहा है। इसलिए इस प्रकरण में ऐसे लोगों को चिन्हित किया जा रहा है, जो काश्तकार नहीं है। फिर भी योजना को लेकर सक्रिय हैं।

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Khorabar Township and Medicity Scheme GDA bulldozer did not run after protest
खोराबार आवासीय योजना एवं मेडिसिटी में मकान आने के बाद टूटने के डर से परेशान हैं लोग। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

खोराबार टाउनशिप एवं मेडिसिटी योजना के लिए अधिग्रहित की गई जमीनों पर मंगलवार को अतिक्रमण नहीं हटाया गया। स्थानीय लोगों के विरोध के बाद जीडीए ने कार्रवाई नहीं की। हालांकि, बुधवार को दोबारा टीम के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

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जीडीए ने खोराबार टाउनशिप एवं मेडिसिटी योजना लांच की है। इसके लिए अधिग्रहित की गई कुछ जमीनों पर मकान बने हुए हैं। जीडीए की ओर से बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण हटाया जा रहा है। पहले चरण में जीडीए की टीम उन्हीं निर्माणों पर कार्रवाई कर रही है, जहां पर कोई रहता नहीं है।
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सोमवार को जब जीडीए की टीम पहुंची तो लोगों ने विरोध जताया। हंगामा होने पर जीडीए का बुलडोजर लौट आया। हालांकि इसके पहले कुछ कार्रवाई हो चुकी थी। मंगलवार को प्रभावित क्षेत्र में कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली। बुधवार को टीम के पहुंचने की संभावना जताई गई है।
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रिंग रोड : 100 से अधिक किसानाें ने दाखिल किया आर्बिट्रेशन

जंगल कौड़िया-जगदीशपुर रिंग रोड के लिए अधिग्रहित जमीन से प्रभावित किसान तेजी से आर्बिट्रेशन दाखिल करने में जुटे हैं। मंगलवार को सौ से अधिक किसानों ने एसएलओ कार्यालय से अवार्ड की कॉपी लेकर डीएम कार्यालय में आर्बिट्रेशन दाखिल किया। किसानों का कहना है कि प्रशासन की ओर से उनकी जमीनों का उचित मुआवजा मिलना चाहिए।

रोड निर्माण के लिए 26 गांवों के किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई है। एनएचएआई (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ) के काम शुरू कराने पर किसान विरोध कर रहे हैं। किसानों ने मुआवजे के भुगतान के लिए सहमति पत्र नहीं जमा कराया है। रविवार को किसानों ने इटहिया के स्वामी दयानंद इंटर कॉलेज में महापंचायत बुलाई थी। एक तरफ पंचायत चल रही थी, तो दूसरी ओर राजस्व और एनएचएआई के अधिकारी अधिग्रहित जमीन का सर्वे करने पहुंच गए। जानकारी होने पर किसानों ने विरोध जताया।

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मामले की जानकारी मिलने पर पहुंचे तहसीलदार सदर विकास कुमार सिंह ने किसानों को आर्बिट्रेशन (न्यायिक मध्यस्थता) दाखिल करने की सलाह दी। इसके बाद से ही किसान मुआवजा तय करने के संबंधित कागजात (अवार्ड) की कापी निकाल रहे हैं। मंगलवार को एसएलओ कार्यालय पहुंचे सोनराईच, बालापार,इटहिया सहित अन्य गांवों के किसान संतेश्वर पांडेय, विकास पांडेय, गुलाब जायसवाल, संतोष शुक्ला,अनूप सिंह, सदानंद जायसवाल अमरनाथ तिवारी, अजय सिंह, गणेश सिंह ,अरुण सहित सौ से अधिक किसानों ने आर्बिट्रेशन दाखिल किया।

किसानों ने बताया कि बालापार गांव में जमीन की औसत दर 3,38,84862 रुपये प्रति हेक्टेयर तय की गई है। प्रति डिसिमल के हिसाब से यह दर 1,35,539 रुपये हो रही है। इसका चार गुना करने पर जमीन की दर 5,42,156 रुपये प्रति डिसिमल हो जाएगी।

व्हाट्सएप ग्रुप पर सक्रिय हुए किसान, कर रहे राय-मशविरा

रिंग रोड से प्रभावित 26 गांवों के किसान सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। किसानों ने अपना व्हाट्सएप ग्रुप बना लिया है, जिस पर सभी लोग एक दूसरे से राय शुमारी कर रहे हैं। उचित मुआवजा के लिए किसान एक दूसरे का हौसला बढ़ा रहे हैं।

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कोनी के किसान नरसिंह सिंह, गणेश, अमरनाथ गुप्ता, रामप्रताप चौरसिया आदि ने बताया कि ग्रुप सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए बना है। ताकि मुआवजा संबंधित कोई सूचना तत्काल सभी तक पहुंचाई जा सके। इसके अलावा किसी मामले में एक दूसरे से जानकारी लेने में कोई दिक्कत न हो।

बिचौलियों की तलाश में जुटा जिला प्रशासन
रिंग रोड निर्माण के मामले में बिचौलिए सक्रिय हो गए हैं। इस योजना में जिनकी जमीन अधिग्रहित नहीं की गई है, लेकिन वह किसानाें को गुमराह करने में जुटे हैं। बिचौलियों की वजह से माहौल खराब हो रहा है। इसलिए इस प्रकरण में ऐसे लोगों को चिन्हित किया जा रहा है, जो काश्तकार नहीं है। फिर भी योजना को लेकर सक्रिय हैं। ऐसे लोगों को पहले पाबंद किया जाएगा। इसके बाद एफआईआर दर्ज कर जेल भेजा जाएगा।


 
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