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सूर्य के कुंभ से मीन राशि में प्रवेश के साथ ही होता है खरमास : आचार्य अजय
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-14 मार्च से 13 अप्रैल तक इस बार है खरमास, मांगलिक कार्य पर रहेगा विराम
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया, सलेमपुर। सनातन धर्म व संस्कृति में खरमास महीने का विशेष महत्व है। इस माह में मांगलिक कार्य सहित कई कार्य भी वर्जित रहते हैं। खरमास बृहस्पतिवार से शुरु हो जाएगा। एक माह तक शादी-ब्याह के कार्यक्रम नहीं होंगे, जिससे शहनाई की आवाज नहीं सुनाई देगी।
इस वर्ष खरमास का शुभारंभ मीन संक्रांति पर 14 मार्च को दोपहर 3 बजकर 12 मिनट पर सूर्य देव के कुंभ से मीन राशि में प्रवेश करते हो जाएगा।आचार्य अजय शुक्ल ने कहा कि सूर्य यहां 13 अप्रैल रात्रि 9 बजकर 3 मिनट तक रहेंगे, इसके बाद खरमास माह की समाप्ति होगी। खरमास के दौरान कई तरह के मांगलिक कार्य व नए वाहन, घर,प्लाट, रत्न, आभूषण और वस्त्र खरीदना शुभ नहीं होता है। इन दिनों भोजन में गाजर, मूली, तेल, चावल, तिल, बथुआ, मूंग, सोंठ और आंवला का भी सेवन करना शास्त्र सम्मत नहीं माना गया है। इस महीने में पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष फल प्राप्त होता है। जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष है, वह अमावस्या के दिन घर पर ब्राह्मण भोजन का आयोजन कर उन्हें सम्मान पूर्वक भोजन कराकर वस्त्र का दान करें। इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। कई राज्यों में इस खरमास में यज्ञोपवीत संस्कार जैसे मांगलिक कार्य किए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यता है कि खरमास में सूर्यदेव, वृहस्पति की राशि में प्रवेश कर अपने गुरु की सेवा पर ध्यान केंद्रित करते हैं। इससे उनका सांसारिक कार्यों पर प्रभाव कम हो जाता है। इसलिए कहा जाता है कि इस कम प्रभाव के कारण ही खरमास में किए गए शुभ कार्य सफल नहीं होते हैं। इसकी वजह से इन कार्यों पर विराम लग जाता है। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया, सलेमपुर। सनातन धर्म व संस्कृति में खरमास महीने का विशेष महत्व है। इस माह में मांगलिक कार्य सहित कई कार्य भी वर्जित रहते हैं। खरमास बृहस्पतिवार से शुरु हो जाएगा। एक माह तक शादी-ब्याह के कार्यक्रम नहीं होंगे, जिससे शहनाई की आवाज नहीं सुनाई देगी।
इस वर्ष खरमास का शुभारंभ मीन संक्रांति पर 14 मार्च को दोपहर 3 बजकर 12 मिनट पर सूर्य देव के कुंभ से मीन राशि में प्रवेश करते हो जाएगा।आचार्य अजय शुक्ल ने कहा कि सूर्य यहां 13 अप्रैल रात्रि 9 बजकर 3 मिनट तक रहेंगे, इसके बाद खरमास माह की समाप्ति होगी। खरमास के दौरान कई तरह के मांगलिक कार्य व नए वाहन, घर,प्लाट, रत्न, आभूषण और वस्त्र खरीदना शुभ नहीं होता है। इन दिनों भोजन में गाजर, मूली, तेल, चावल, तिल, बथुआ, मूंग, सोंठ और आंवला का भी सेवन करना शास्त्र सम्मत नहीं माना गया है। इस महीने में पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष फल प्राप्त होता है। जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष है, वह अमावस्या के दिन घर पर ब्राह्मण भोजन का आयोजन कर उन्हें सम्मान पूर्वक भोजन कराकर वस्त्र का दान करें। इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। कई राज्यों में इस खरमास में यज्ञोपवीत संस्कार जैसे मांगलिक कार्य किए जाते हैं।
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उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यता है कि खरमास में सूर्यदेव, वृहस्पति की राशि में प्रवेश कर अपने गुरु की सेवा पर ध्यान केंद्रित करते हैं। इससे उनका सांसारिक कार्यों पर प्रभाव कम हो जाता है। इसलिए कहा जाता है कि इस कम प्रभाव के कारण ही खरमास में किए गए शुभ कार्य सफल नहीं होते हैं। इसकी वजह से इन कार्यों पर विराम लग जाता है। संवाद
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