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खरमास शुरू: सूर्य ने किया मीन राशि में प्रवेश, अब दो मई से होंगे मांगलिक कार्य
Thu, 16 Mar 2023 01:27 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 16 Mar 2023 01:27 PM IST
सार
पंडित शरदचंद्र मिश्र ने बताया कि ग्रहों के राजा सूर्य जब-जब देवताओं के गुरु बृहस्पति की राशि धनु और मीन में गोचर करते हैं, तब-तब खरमास होता है। इस बीच शुभ कार्य नहीं होंगे। हालांकि खरमास में पूजा-पाठ, पुण्य कार्य जैसे दान इत्यादि धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व बताया गया है।
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खरमास।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
सूर्य के मीन राशि में प्रवेश के साथ ही बुधवार की सुबह खरमास शुरू हो गया। अब मांगलिक कार्य नहीं हो सकेंगे। 14 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के बाद खरमास खत्म होगा। वहीं, मांगलिक कार्य दो मई से शुरू होंगे।
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पंडित शरदचंद्र मिश्र ने बताया कि ग्रहों के राजा सूर्य जब-जब देवताओं के गुरु बृहस्पति की राशि धनु और मीन में गोचर करते हैं, तब-तब खरमास होता है। इस बीच शुभ कार्य नहीं होंगे। हालांकि खरमास में पूजा-पाठ, पुण्य कार्य जैसे दान इत्यादि धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे कठिनाइयां समाप्त होती हैं और सुख-शांति की वृद्धि होती है।
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ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, वर्ष में दो बार जब सूर्य धनु और मीन राशि में आते हैं तब खरमास लगता है। सूर्य किसी भी राशि में एक महीने रहते हैं। मीन राशि में प्रवेश के समय बृहस्पति का भी तेज कमजोर हो जाता है और गुरु के स्वभाव में उग्रता आ जाती है।
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बताया कि किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए त्रिबल की आवश्यकता होती है। त्रिबल अर्थात सूर्य, चंद्रमा व बृहस्पति का बल। जब तीनों ग्रह उत्तम स्थिति में रहते हैं, तभी शुभ कार्य किए जाते हैं। इनमें से यदि कोई भी क्षीण या निस्तेज हो तो शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं।
खरमास में न करें ये कार्य
पंडित बृजेश पांडेय शास्त्री के अनुसार, वधू प्रवेश, वरवरण, कन्यावरण, बरच्छा, विवाह से संबंधित समस्त कार्य, मुंडन, गृहप्रवेश, गृहारंभ, प्रथम बार तीर्थ पर गमन आदि कार्य खरमास में नहीं किए जाते हैं।
29 अप्रैल तक अस्त रहेंगे बृहस्पति
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, खरमास में शुभ कार्य नहीं होंगे, लेकिन इस बार शुभ मुहूर्त के लिए दो मई तक का इंतजार करना होगा। क्योंकि वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 31 मार्च को बृहस्पति अस्त हो रहे हैं और इनका अस्तकाल 29 अप्रैल तक रहेगा। बृहस्पति का बालत्व दोष तीन दिन तक रहता है। इसलिए समस्त मांगलिक कार्य दो मई से ही प्रारंभ होंगे।
ये हैं विवाह मुहूर्त
29 अप्रैल तक अस्त रहेंगे बृहस्पति
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, खरमास में शुभ कार्य नहीं होंगे, लेकिन इस बार शुभ मुहूर्त के लिए दो मई तक का इंतजार करना होगा। क्योंकि वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 31 मार्च को बृहस्पति अस्त हो रहे हैं और इनका अस्तकाल 29 अप्रैल तक रहेगा। बृहस्पति का बालत्व दोष तीन दिन तक रहता है। इसलिए समस्त मांगलिक कार्य दो मई से ही प्रारंभ होंगे।
ये हैं विवाह मुहूर्त
- मई: 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 15, 16, 17, 20, 21, 22, 26, 27, 28, 29, 30, 31
- जून: 1, 3, 4, 5, 7, 11, 12, 13, 16, 17, 22, 23, 25, 26, 27, 28
- नवंबर: 23, 24, 27, 28, 29
- दिसंबर: 1, 4, 5, 7, 9, 10, 11, 13, 14, 15, 16