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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   World Rabies Day 2021: Keep distance from dog cat monkey there will be no rabies disease

World Rabies Day 2021: कुत्ते, बिल्ली, बंदर से बनाएं दूरी, नहीं होगी रैबीज की बीमारी

Wed, 29 Sep 2021 04:55 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 29 Sep 2021 04:55 PM IST
सार

डॉ. अनिल कोपरकर ने बताया कि विश्व में हर साल रैबीज से लगभग 60,000 लोग दम तोड़ते हैं। इनमें 95 प्रतिशत लोग एशिया और अफ्रीका से होते हैं। उसमें भी लगभग आधे 15 साल से कम उम्र के बच्चे होते हैं।

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World Rabies Day 2021: Keep distance from dog cat monkey there will be no rabies disease
विश्व रेबीज दिवस 2021: एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने के लिए लगी लाइन। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रैबीज की बीमारी से बचने के लिए कुत्ते, बिल्ली, बंदर से दूरी बनाएं। यह बातें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की कार्यकारी निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर ने कहीं। मंगलवार को सामुदायिक चिकित्सा और पारिवारिक चिकित्सा विभाग की ओर से विश्व रैबीज दिवस के मौके पर गोष्ठी का आयोजन किया गया।

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डॉ. सुरेखा ने कहा कि रैबीज एक जानलेवा बीमारी है जो एक वायरस के संक्रमण से होती है। यह वायरस संक्रमित कुत्ते, बिल्ली, बंदर आदि के लार में पाया जाता है। इन्हीं जानवरों के काटने से यह मनुष्य के शरीर में पहुंच जाता है। यदि कोई इस बीमारी से ग्रसित हो जाए तो उसकी मौत तय है। इसीलिए बचाव के उपायों से ही इस खतरनाक बीमारी बचा जा सकता है।
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सामुदायिक चिकित्सा और पारिवारिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. हरिशंकर जोशी ने बताया कि प्रत्येक वर्ष वैश्विक स्तर पर जागरूकता फैलाने तथा सही जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए हर वर्ष विश्व रैबीज दिवस मनाया जाता है। डॉ. अनिल कोपरकर ने बताया कि विश्व में हर साल रैबीज से लगभग 60,000 लोग दम तोड़ते हैं। इनमें 95 प्रतिशत लोग एशिया और अफ्रीका से होते हैं। उसमें भी लगभग आधे 15 साल से कम उम्र के बच्चे होते हैं।
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यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज, दिल्ली के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ आमिर मारूफ खान ने बताया कि इस बीमारी से कुछ हद तक डर का होना भी जरूरी है तभी हम सतर्क रहेंगे। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज दिल्ली के बाल रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. अनुराग अग्रवाल ने जानवरों के काटने के बाद लगने वाले टीके के सही तरीकों और समय सारणी के बारे में जानकारी दी। डॉ. आनंद मोहन दीक्षित ने धन्यवाद ज्ञापन और संचालन डॉ प्रदीप खरया ने किया।

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