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Railway News: ट्रेनों के आमने-सामने की टक्कर को रोकेगा 'कवच', रेलवे ने 467 करोड़ रुपये किए मंजूर
Wed, 08 Feb 2023 12:15 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 08 Feb 2023 12:15 PM IST
सार
कवच की कई खासियत भी है। इस तकनीक से ट्रेन चलाते समय लोको पॉयलट के सभी क्रियाकलापों मसलन ब्रेक, हार्न, थ्रोटल हैंडल आदि की निगरानी होती रहेगी। अगर लोको पायलट (ड्राइवर) से चूक होती है तो पहले ऑडियो-वीडियो के माध्यम से अलर्ट आएगा।
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- फोटो : istock
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विस्तार
ट्रेनों के आमने-सामने की टक्कर को रोकने के लिए पूर्वोत्तर रेलवे ने स्वचलित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली (कचव) को लगाने की योजना बनाई है। रेलवे बोर्ड ने गोरखपुर-बाराबंकी रूट के लिए 467 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। शुरूआत करने के लिए आम बजट में सात करोड़ रुपये प्रस्तावित किया गया है।
कवच तकनीक से अगर एक ट्रैक पर दो ट्रेनें आ भी जाएं तो एक निश्चित दूरी पर दोनों ट्रेनें खुद-ब-खुद रुक जाएंगी। लाल सिग्नल पार होते ही ट्रेन में अपने आप ब्रेक लग जाएगा। साथ ही पांच किलोमीटर के दायरे में सभी ट्रेन बंद हो जाएंगी। पीछे से आने वाली ट्रेन को भी कवच बचा लेगा। पूर्वोत्तर रेलवे के 10 अलग-अलग रूटों के 1440 किलोमीटर ट्रैक पर कवच तकनीक लगाने की योजना है।
कवच की खासियत
कवच की कई खासियत भी है। इस तकनीक से ट्रेन चलाते समय लोको पॉयलट के सभी क्रियाकलापों मसलन ब्रेक, हार्न, थ्रोटल हैंडल आदि की निगरानी होती रहेगी। अगर लोको पायलट (ड्राइवर) से चूक होती है तो पहले ऑडियो-वीडियो के माध्यम से अलर्ट आएगा।
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इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं होती है तो चलती ट्रेन में ऑटोमेटिक ब्रेक लग जाएगा। इसके अलावा ट्रेन को निर्धारित से अधिक गति पर चलने नहीं देगा। कवच प्रणाली जीपीएस, रेडियो फ्रीक्वेंसी आदि तकनीक से संचालित होगा।
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कवच तकनीक से अगर एक ट्रैक पर दो ट्रेनें आ भी जाएं तो एक निश्चित दूरी पर दोनों ट्रेनें खुद-ब-खुद रुक जाएंगी। लाल सिग्नल पार होते ही ट्रेन में अपने आप ब्रेक लग जाएगा। साथ ही पांच किलोमीटर के दायरे में सभी ट्रेन बंद हो जाएंगी। पीछे से आने वाली ट्रेन को भी कवच बचा लेगा। पूर्वोत्तर रेलवे के 10 अलग-अलग रूटों के 1440 किलोमीटर ट्रैक पर कवच तकनीक लगाने की योजना है।
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कवच की खासियत
कवच की कई खासियत भी है। इस तकनीक से ट्रेन चलाते समय लोको पॉयलट के सभी क्रियाकलापों मसलन ब्रेक, हार्न, थ्रोटल हैंडल आदि की निगरानी होती रहेगी। अगर लोको पायलट (ड्राइवर) से चूक होती है तो पहले ऑडियो-वीडियो के माध्यम से अलर्ट आएगा।
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इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं होती है तो चलती ट्रेन में ऑटोमेटिक ब्रेक लग जाएगा। इसके अलावा ट्रेन को निर्धारित से अधिक गति पर चलने नहीं देगा। कवच प्रणाली जीपीएस, रेडियो फ्रीक्वेंसी आदि तकनीक से संचालित होगा।