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Kargil Vijay Diwas 2021: बेटे की शहादत पर गर्व से चौड़ा हो जाता है छेत्री परिवार का सीना, मां बोली- नहीं भूलता उसका चेहरा
Mon, 26 Jul 2021 03:39 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 26 Jul 2021 03:39 PM IST
सार
शिव सिंह छेत्री को 14 अगस्त 1999 को कुपवाड़ा सेक्टर में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान गोली लगी थी। 22 अगस्त को सेना के हॉस्पिटल में उनकी मौत हुई। शहादत के वक्त वह 23 साल के थे।
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शहीद शिव सिंह छेत्री के माता-पिता।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
दिल से निकलेगी न मर कर वतन की उल्फत, मेरी मिट्टी से भी खुशबू ए वफा आएगी। कारगिल युद्ध के दौरान अपने प्राणों की आहूति देने वाले मां भारती के वीर सपूत राइफल मैन शिव सिंह छेत्री का देश सेवा का जज्बा कुछ ऐसा ही रहा होगा।
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बिछिया में रहने वाले शिव सिंह छेत्री को घरवाले दीपू बुलाते थे। पिता गोपाल सिंह बताते हैं कि आखिरी बार आशीर्वाद लेकर ड्यूटी पर जाते बेटे का चेहरा उन्हें आज भी याद है। मां कहती हैं, बेटे के जाने का गम तो है लेकिन देश के लिए उसने जो कर दिखाया उस पर गर्व भी है।
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शिव सिंह छेत्री को 14 अगस्त 1999 को कुपवाड़ा सेक्टर में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान गोली लगी थी। 22 अगस्त को सेना के हॉस्पिटल में उनकी मौत हुई। शहादत के वक्त वह 23 साल के थे। बेटे को खोने का दुख तो परिवार को ताउम्र रहेगा, मगर बेटा ऐसा काम कर गया कि सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।
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आज भी शहीद बेटे शिव सिंह छेत्री का जिक्र होते ही पिता गोपाल छेत्री और मां गीता देवी की आंखें नम हो जाती हैं। मां कहती हैं कि पूरा शहर हमें बेटे के नाम से जानता है, एक माता-पिता के लिए इससे अनमोल उपलब्धि कुछ नहीं हो सकती।
कारगिल में शहीद होने वाले शिव सिंह छेत्री का बचपन बिछिया में बीता। 10वीं तक की पढ़ाई नेहरू इंटर कॉलेज से करने के बाद इंटरमीडिएट के लिए उन्होंने एमपी इंटर कॉलेज को चुना। अपने बैच के सबसे होनहार छात्र शिव सिंह छेत्री शिक्षकों और दोस्तों के प्रिय थे।