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Gorakhpur News: अक्सर सामने आती हैं छेड़खानी की घटनाएं...कॅरिअर के लिए करते हैं बर्दाश्त

Tue, 24 Feb 2026 02:38 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 24 Feb 2026 02:38 AM IST
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Junior residents on the AIIMS campus are terrified after the incident and demand strict action.
वारदात के बाद एम्स परिसर में डरी-सहमी हैं जूनियर रेजिडेंट, कहा-हो कड़ा एक्शन
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गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान गोरखपुर (एम्स) में पढ़ाई कर रही महिला डॉक्टर से छेड़खानी के बाद अब परिसर में अन्य डॉक्टर भी डरी-सहमी हैं। उनका कहना है कि पहले भी कई मामले आए पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कॅरिअर पर खतरा आए, ऐसे में इन मामलों में चुप्पी साधनी पड़ती है।
एम्स परिसर में सोमवार को इसी वारदात की चर्चा रही। अभी तक एम्स के प्रशासनिक भवन में पीड़िता की तरफ से कोई लिखित शिकायत नहीं की गई है। परिसर में महिला जूनियर रेजिडेंट पहले तो बात करने को तैयार नहीं थीं लेकिन नाम न छपने के शर्त पर बताया कि हम यहां देश के अलग-अलग कोनों से पढ़ने पढ़ाई करने आए हैं। जिस जेआर के साथ घटना हुई, वह नॉर्थ ईस्ट की रहने वाली हैं। इसके पहले एम्स में ही एमबीबीएस की एक छात्रा ने प्रोफेसर पर ही आरोप लगाए थे लेकिन नतीजा आज तक नहीं आया। एम्स की तरफ से उक्त प्रोफेसर के खिलाफ एफआईआर तक नहीं कराई गई।
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डॉक्टरों ने कहा कि मुश्किल यह है कि पीड़िता अगर केस दर्ज कराती तो उसकी पढ़ाई उलझ जाती। इसलिए, मोहद्दीपुर में बाहरी लोगों की तरफ से छेड़खानी और बैड टच मामले में भी पीड़िता ने शिकायत नहीं की।
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एक अन्य जूनियर रेजिडेंट छात्रा ने कहा कि सार्वजनिक जगहों पर पुलिस मुस्तैद होनी चाहिए। शाम के समय खास तौर पर निगरानी और सख्ती करें। आज एम्स की एक छात्रा के साथ ऐसी घटना हुई है। ऐसे ही मन बढ़ता रहा तो आने वाले समय में किसी के साथ भी कोई घटना कर सकते हैं।

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एम्स परिसर में भी सामने आ चुका है बैड टैच का मामला
इसके पहले भी एमबीबीएस प्रथम वर्ष की एक छात्रा ने एक विभागाध्यक्ष पर ऐसे ही गंभीर आरोप लगाए थे। मामले में विशाखा कमेटी का गठन भी हुआ था। फिर भी जांच का नतीजा नहीं निकल सका। दूसरी तरफ आरोपी बनाए गए डॉक्टर छह महीने बाद ही विभागाध्यक्ष बनकर दूसरी जगह चले गए थे। एम्स की छात्राओं को परिसर में डर तो नहीं लगता लेकिन ऐसी दुश्वारियों में लड़ने की बजाए वे चुप रहना ही हितकर समझती हैं। उनका मानना है कि काफी मेहनत और परिवार के प्रयासों के बाद डॉक्टरी की पढ़ाई मुमकिन हो सकी है। ऐसे में इन सब में कहीं कॅरिअर न उलझ जाए, इससे अच्छा है शांत रहते हुए पढ़ाई पर ध्यान दें।
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