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Court Order: भ्रष्टाचार के अभियुक्त कनिष्ठ लिपिक को पांच साल की सजा, कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर सुनाया फैसला
Tue, 07 Jun 2022 10:57 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 07 Jun 2022 10:57 AM IST
सार
अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक परमानंद राम त्रिपाठी का कहना था कि चिकित्सा एवं परिवार कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री की शिकायत पर पांच मई 2001 को भ्रष्टाचार निवारण संगठन फैजाबाद इकाई द्वारा जांच की गई।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
भ्रष्टाचार का जुर्म सिद्ध पाए जाने पर विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट तनू भटनागर ने गोंडा जिले के छपिया थाना क्षेत्र के रानीबेल मसथनवा बाजार निवासी व स्वास्थ्य एवं परिवार विभाग मुजफ्फरनगर के तत्कालीन कनिष्ठ लिपिक अभियुक्त इंद्रदेव पांडेय को पांच साल के कठोर कारावास एवं दो लाख रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड न देने पर अभियुक्त को एक साल का कारावास अलग से भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक परमानंद राम त्रिपाठी का कहना था कि चिकित्सा एवं परिवार कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री की शिकायत पर पांच मई 2001 को भ्रष्टाचार निवारण संगठन फैजाबाद इकाई द्वारा जांच की गई। जांच में पाया गया कि अभियुक्त एक अप्रैल 1975 को कनिष्ठ लिपिक के पद पर नौकरी में आया था।
संपूर्ण जांच की अवधि में उपलब्ध आंकड़ों से विभिन्न कटौतियों के बाद शुद्ध वेतन के रूप में उसे छह लाख 72 हजार 834 रुपया प्राप्त हुआ था। परंतु अभियुक्त ने वर्ष 1976 से 2001 के मध्य विभिन्न ज्ञात स्रोतों से कुल आठ लाख 52 हजार 834 रुपये आय प्राप्त किया और समय-समय पर विभिन्न संपत्तियों के अर्जन पर कुल 13 लाख 12 हजार 216 रुपये व्यय किया। जो आय की तुलना में चार लाख 59 हजार 382 रुपये व्यय अधिक है और अभियुक्त की आय से अधिक संपत्ति को दर्शाता है।
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अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक परमानंद राम त्रिपाठी का कहना था कि चिकित्सा एवं परिवार कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री की शिकायत पर पांच मई 2001 को भ्रष्टाचार निवारण संगठन फैजाबाद इकाई द्वारा जांच की गई। जांच में पाया गया कि अभियुक्त एक अप्रैल 1975 को कनिष्ठ लिपिक के पद पर नौकरी में आया था।
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संपूर्ण जांच की अवधि में उपलब्ध आंकड़ों से विभिन्न कटौतियों के बाद शुद्ध वेतन के रूप में उसे छह लाख 72 हजार 834 रुपया प्राप्त हुआ था। परंतु अभियुक्त ने वर्ष 1976 से 2001 के मध्य विभिन्न ज्ञात स्रोतों से कुल आठ लाख 52 हजार 834 रुपये आय प्राप्त किया और समय-समय पर विभिन्न संपत्तियों के अर्जन पर कुल 13 लाख 12 हजार 216 रुपये व्यय किया। जो आय की तुलना में चार लाख 59 हजार 382 रुपये व्यय अधिक है और अभियुक्त की आय से अधिक संपत्ति को दर्शाता है।
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