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जंगल कौड़िया-सोनौली रिंग रोड: गिड़गिड़ातीं रहीं सोहगावती, चलवा दिया बुलडोजर, किसान बोले- छल हुआ है

Sat, 17 Jun 2023 01:46 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, पीपीगंज।
संवाद न्यूज एजेंसी, पीपीगंज। Published by: vivek shukla Updated Sat, 17 Jun 2023 01:46 PM IST
सार

एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने बताया कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 107 व 116 की कार्रवाई में लोगों को पाबंद किया जाता है। इसमें सक्षम न्यायालय पर जाकर पक्षकारों को जमानत करानी होती है, जिसमें छह माह के लिए एक मुश्त धनराशि के लिए पाबंद किया जाता है।

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Jungle Kauria Sonauli Ring Road Sohgavati kept pleading got bulldozers running
महिला ने विरोध किया तो महिला पुलिस इस तरह पकड़कर हटाते हुए। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर में शुक्रवार को पीपीगंज, गोलीगंज के पास से रिंगरोड का निर्माण शुरू हुआ। यहीं पर भैयाराम गांव की सोहगावती का मकान हैं, जिसके आधे हिस्से में मैरिज हॉल बना हुआ है। बाकी में उनका परिवार रहता है। बुलडोजर लेकर पहुंचे अधिकारियों ने उसके मकान का चिह्नीकरण कराते हुए तोड़ने की कार्रवाई शुरू की। इस पर वह हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाने लगीं कि बिना मुआवजा दिए मकान न तोड़ा जाए। लेकिन उनकी नहीं सुनी गई।

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सोहगावती ने विरोध किया तो पुलिस ने उनको काबू करके कार्रवाई की और मकान ढहा दिया गया। सोहगावती के बेटे रवि ने वीडियो बनाया तो उसका मोबाइल छीनकर सिपाहियों ने वीडियो डिलीट करा दिया। बाद में सोहगावती की बात सुनकर बिना मुआवजा दिए मकान तोड़ने पर मुकदमा दर्ज कराने का आश्वासन एसओ आशीष सिंह ने दिया। संवाद
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किसान बोले-पूरा मुआवजा दिए बिना ही तोड़ दिया मकान, मांग रहे थे एक दिन का समय
जंगल कौड़िया-सोनौली रिंग रोड का निर्माण कार्य शुरू कराए जाने से किसानों के भीतर गुस्सा पनप रहा है। मुआवजे का भुगतान किए बिना ही कार्रवाई शुरू होने पर किसानों ने जिला प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है।
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किसानों का कहना है कि पंचायत में आर्बिट्रेशन (न्यायिक मध्यस्थता) का निर्णय आने पर निर्माण शुरू कराने की बात तय हुई थी, लेकिन इसे प्रशासन ने नहीं माना है। उनका कहना है कि शुक्रवार को काम शुरू कराने पहुंचे अधिकारी, हमारी गुहार सुनकर तनिक भी नहीं पसीजे। एक दिन का समय मांगने के बावजूद कार्रवाई की।

अधिकारियों ने धमकाया, दर्ज कराया जाएगा मुकदमा

किसानों का कहना है कि विरोध प्रदर्शन करने पर तहसील प्रशासन के अधिकारियों ने धमकाया। बताया कि ऊपर से आदेश है। इसलिए कोई विरोध न करें। यदि किसी ने उनकी बात नहीं मानी तो मुकदमा दर्ज करा दिया जाएगा। इसके बाद भी किसान अपनी मांग पर डटे रहे। इससे करीब दो घंटे तक गहमा गहमी बनी रही।

दो किलोमीटर धूप में पैदल थाने ले जाए गए किसान
किसान निर्माण कार्य रोकने पहुंचे तो प्रशासनिक अमला पूरी तरह से हर स्थिति से निपटने को तैयार था। किसानों को काबू करने के लिए जब चार थानों की फोर्स पहुंची तो किसान भी स्थिति भांप गए। पुलिस ने सभी किसानों को थाने पहुंचा दिया।

इसे भी पढ़ें: गोरखपुर के टॉप माफिया विनोद पर GDA ने कसा शिकंजा, अवैध कब्जे पर चुलाया बुलडोजर

मौके से करीब दो किलोमीटर तक किसानों को पैदल ही थाने ले जाया गया। नारेबाजी करते हुए किसान थाने पहुंचे। वहां करीब आधा घंटा तक सभी को रोका गया। उनका नाम-पता नोट करने के बाद पुलिस ने छोड़ा। हिदायत दी कि अभी पाबंद किया जा रहा है। आगे और सख्ती हो सकती है।

शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया पाबंद
एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने बताया कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 107 व 116 की कार्रवाई में लोगों को पाबंद किया जाता है। इसमें सक्षम न्यायालय पर जाकर पक्षकारों को जमानत करानी होती है, जिसमें छह माह के लिए एक मुश्त धनराशि के लिए पाबंद किया जाता है। छह माह के अंतराल में अगर कोई विवाद होता है, तो वह धनराशि जब्त करने का नियम है।





 
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