जंगल कौड़िया-जगदीशपुर रिंग रोड: डीएम के साथ बैठक करके तय करेंगे मुआवजे की राशि, शुरू हो सकेगा काम
जंगल कौड़िया-जगदीशपुर रिंग रोड बनाने के लिए 26 गांवों के किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई है। कम मुआवजा होने की बात कहकर किसानों ने सहमति पत्र भरने से इंकार कर दिया। तहसीलदार सदर विकास सिंह ने किसानों को आर्बिट्रेशन में जाने में सलाह दी।
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जंगल कौड़िया-जगदीशपुर रिंग रोड के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे का मामला जल्द निपट सकता है। सीएम के निर्देश पर एनएचएआई के अधिकारी हरकत में आए हैं। उनका कहना है कि डीएम के साथ बैठक करके इस प्रकरण का निस्तारण जल्द कर लिया जाएगा। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों की सलाह पर अब तक करीब 500 किसान आर्बिट्रेशन दाखिल करा चुके हैं।
जंगल कौड़िया-जगदीशपुर रिंग रोड बनाने के लिए 26 गांवों के किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई है। कम मुआवजा होने की बात कहकर किसानों ने सहमति पत्र भरने से इंकार कर दिया। तहसीलदार सदर विकास सिंह ने किसानों को आर्बिट्रेशन में जाने में सलाह दी। इसके बाद किसान अपने दस्तावेज जमा करा रहे हैं। मुआवजे का प्रकरण जल्द सुलझाने के लिए किसानों ने रविवार की शाम पिपराइच के विधायक महेंद्रपाल सिंह के साथ सीएम योगी से मुलाकात की।
सीएम ने डीएम कृष्णा करुणेश को निर्देश दिया कि सड़क की जमीन को सड़क की दर एवं कृषि योग्य जमीनों का वर्तमान दर से मुआवजा तय करते हुए किसानों को उपलब्ध कराएं। रिंग रोड निर्माण में जिन किसानों के मकान पड़ रहे हैं, उनके मकान का मुआवजा नए रेट से उपलब्ध कराएं, ताकि वे उससे कोई दूसरा आवास बना सकें। इसके बाद से इस मामले में तेजी आई है। एनएचएआई (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) के अधिकारियों ने इस प्रकरण को सुलझाने की कोशिश शुरू कर दी है।
15 किसानों के खाते में भेजे गए करीब तीन करोड़
सोमवार को भी 50 से अधिक किसानों ने आर्बिट्रेशन दाखिल कराया। पूर्व में कुछ किसानों ने अपना हिस्सा प्रमाण पत्र जमा कराया था। उनके भुगतान की प्रक्रिया भी शुरू हुई। 15 किसानों के खाते में करीब तीन करोड़ भेजे गए हैं।
किसानों के प्रकरण में उचित कार्यवाही की जाएगी। जल्द ही इस नए सिरे से मुआवजा तैयार करके भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। -भवेश अग्रवाल, परियोजना प्रबंधक एनएचएआई।