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Gorakhpur News: कोई हालात तो कोई अपनों की बेरुखी का मारा, अब अस्पताल ही सहारा-अपनों ने भी मुंह मोड़ा

Sun, 30 Jun 2024 12:27 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो वंदना तिवारी, गोरखपुर
वंदना तिवारी, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sun, 30 Jun 2024 12:27 PM IST
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It was cloudy throughout the day, drizzle occurred at some places
जिला अस्पताल में भर्ती मरीज - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जिला अस्पताल का हड्डी वार्ड। यहां एक साल से भर्ती अलीनगर के कमलेश हालात के मारे हैं। पिता की मौत काफी पहले हो गई। कोरोना काल में मां भी साथ छोड़ गईं। एक साल पहले हादसे में पैर गंवाने के बाद कमलेश का साथ भाई ने भी छोड़ दिया। अब जिला अस्पताल का यह वार्ड ही उनका सहारा है।
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कमलेश जैसे ही सात और मरीज हड्डी वार्ड में लंबे समय से भर्ती हैं, जिनकी कहानी करीब-करीब एक जैसी है। इसमें कोई हालात का मारा है तो कोई अपनों की बेरुखी का। इनमें से कोई एक साल से पड़ा है, तो किसी को उससे भी अधिक वक्त हो गया। संवाद
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अपनों के बारे में पूछने पर बहते हैं सिर्फ आंसू
इमरजेंसी वार्ड में पड़े इन लोगों को विभिन्न स्थानों से अचेतावस्था में जिला अस्पताल लाया गया था। इनमें से अधिकांश अपना नाम व पता भी नहीं बता पाते। कुछ पूछने पर आंखों से केवल आंसू निकलते हैं। इनमें शामिल दुलारी को डांगीपार से एंबुलेंस से लाया गया था। वह बिहार के गया में अपना घर बताती हैं, लेकिन घर का पता नहीं जानतीं, न ही कोई आज तक पूछने आया।
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काठमांडो के थापा को भर्ती करवाकर लौटे नहीं अपने
काठमांडो के जनबाद थापा को तो परिवार के लोग ही यहां इलाज के लिए लेकर आए थे और बाद में छोड़कर चले गए। एक साल से वह यहीं हैं। परिवार के बारे में पूछने पर रोने लगते हैं। यहीं पड़े नीरज भी घर का पता पूछने पर भावुक हो जाते हैं। माता-पिता की मौत हो चुकी है, वह चौरीचौरा इलाके के रहने वाले हैं।

हाथ पर लिखा रानी, खुद का नाम नहीं पता
यहां भर्ती 35 साल का युवक छह माह पहले रेलवे स्टेशन के पास असहाय हालत में मिला था। इतने दिनों में उसे कोई पूछने के लिए नहीं आया। युवक अपनी पहचान भी सही से नहीं बता पाता। उसके एक हाथ पर गोदना से रानी लिखा हुआ है।

ककराखोर के पास से लाए गए बुजुर्ग भी अपना नाम-पता नहीं बता पा रहे। परिवार के बारे में पूछने पर सिर्फ रोते हैं। यही हालत कपिल का भी है। इन्हें एम्स गेट के पास से लाकर यहां भर्ती कराया गया है।

मानवता के नाते बेड से नहीं हटाता स्टाफ
इमरजेंसी के हड्डी वार्ड में ही अज्ञात मरीजों के लिए अलग से हॉल है। यहां 10 बेडों पर हमेशा ही कोई न कोई अज्ञात मरीज बेसुध पड़ा रहता है। ये वे लोग हैं, जिन्हें सड़क के किनारे से उठाकर यहां इलाज के लिए लाया जाता है।

वार्ड में इनके घावों की मरहम पट्टी कर दी जाती है। इसके बाद वे एक बेड पर डाल दिए जाते हैं। इस वजह से हड्डी के दूसरे मरीजों के लिए बेड कम पड़ जाते हैं। अस्पताल कर्मियों का कहना है कि मानवता के नाते ऐसा किया जाता है।

बेड पर पड़े इन मरीजों की हालत में कोई बहुत सुधार आया हो, ऐसा है नहीं। कोई महीनों तो कोई साल भर से अपनों की राह देख रहा है। वार्ड में भर्ती आठ मरीज दिन भर परिसर में इधर-उधर घूमने के बाद शाम को फिर बेड पर आकर सो जाते हैं।


चिकित्सा अधीक्षक बीके सुमन ने बताया कि सड़क पर घायल पड़े अज्ञात लोगों को लाकर यहां भर्ती कराया जाता है। स्वास्थ्यकर्मी यथासंभव इनका इलाज करते हैं। इनमें से किसी को अपना नाम व पता याद नहीं है। न ही कोई इन्हें पूछने आता है। कुछ ठीक होकर चले जाते हैं। कुछ दिन बाद उनकी जगह दूसरे आ जाते हैं।



 
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