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Gorakhpur News: एमएमएमयूटी में अब इंटरनेट ऑफ थिंग्स की होगी पढ़ाई, पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार
Fri, 07 Apr 2023 02:25 PM IST
vivek shukla
राजन राय, गोरखपुर।
राजन राय, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 07 Apr 2023 02:25 PM IST
सार
एमएमएमयूटी कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालय के छात्रों को इंटरनेट ऑफ थिंग्स के रूप में नया पाठ्यक्रम पढ़ने को मिलेगा। जुलाई से इस ब्रांच को शुरू करने की तैयारी है। इस पाठ्यक्रम की मांग पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रही है।
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- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) में अब इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) की पढ़ाई होगी। विश्वविद्यालय ने नए पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार की ली है। 60 सीटों पर प्रवेश होगा और जुलाई से शुरू होने वाले सत्र में ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम (जेईई मेन) की रैंक और नंबर के आधार पर ही बीटेक में प्रवेश लिया जाएगा।
विश्वविद्यालय इंटरनेट ऑफ थिंग्स के लिए नई फैकल्टी भी तैयार करेगा। अभी इसकी मानीटरिंग इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्यूनिकेशन विभाग से की जाएगी। पाठ्यक्रम तैयार करने की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर एसके सोनी को दी गई है। प्रो. सोनी ने बताया कि आईओटी की मांग अब हर जगह बढ़ने लगी है। उद्योगों से लेकर सुरक्षा तकनीकी में यह बहुत एडवांस प्रणाली है।
इसे भी पढ़ें: गोरखपुर शहर से सहजनवां तक न सोचें ये लखनऊ हाईवे हैं... जरी धीरे चलें
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उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में इस पाठ्यक्रम का सबसे ज्यादा महत्व होगा। ड्रोन का पूरा कंट्रोल इसी तकनीकी से किया जाएगा। नौकरी के लिए ऑफर भी इसी क्षेत्र में ज्यादा मिलेगा। पाठ्यक्रम को आने वाले दस सालों की जरूरत को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।
एमएमएमयूटी कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालय के छात्रों को इंटरनेट ऑफ थिंग्स के रूप में नया पाठ्यक्रम पढ़ने को मिलेगा। जुलाई से इस ब्रांच को शुरू करने की तैयारी है। इस पाठ्यक्रम की मांग पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रही है। पाठ्यक्रम तैयार होने के बाद प्रबंध बोर्ड की बैठक में इसकी स्वीकृति ली जाएगी। इसके बाद प्रवेश लिया जाएगा।
क्या है आईओटी
इंटरनेट ऑफ थिंग्स तकनीक का वह विकास है, जिसमें कई गैजेट्स को नेटवर्किंग के माध्यम से एक साथ जोड़ा जाता है। कई गैजेट्स एक साथ जुड़कर एक-दूसरे को डाटा का आदान-प्रदान करते हैं। उपकरणों के बीच इंटीग्रेशन से सूचनाएं समग्रता में प्राप्त होती हैं।
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विश्वविद्यालय इंटरनेट ऑफ थिंग्स के लिए नई फैकल्टी भी तैयार करेगा। अभी इसकी मानीटरिंग इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्यूनिकेशन विभाग से की जाएगी। पाठ्यक्रम तैयार करने की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर एसके सोनी को दी गई है। प्रो. सोनी ने बताया कि आईओटी की मांग अब हर जगह बढ़ने लगी है। उद्योगों से लेकर सुरक्षा तकनीकी में यह बहुत एडवांस प्रणाली है।
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उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में इस पाठ्यक्रम का सबसे ज्यादा महत्व होगा। ड्रोन का पूरा कंट्रोल इसी तकनीकी से किया जाएगा। नौकरी के लिए ऑफर भी इसी क्षेत्र में ज्यादा मिलेगा। पाठ्यक्रम को आने वाले दस सालों की जरूरत को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।
एमएमएमयूटी कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालय के छात्रों को इंटरनेट ऑफ थिंग्स के रूप में नया पाठ्यक्रम पढ़ने को मिलेगा। जुलाई से इस ब्रांच को शुरू करने की तैयारी है। इस पाठ्यक्रम की मांग पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रही है। पाठ्यक्रम तैयार होने के बाद प्रबंध बोर्ड की बैठक में इसकी स्वीकृति ली जाएगी। इसके बाद प्रवेश लिया जाएगा।
क्या है आईओटी
इंटरनेट ऑफ थिंग्स तकनीक का वह विकास है, जिसमें कई गैजेट्स को नेटवर्किंग के माध्यम से एक साथ जोड़ा जाता है। कई गैजेट्स एक साथ जुड़कर एक-दूसरे को डाटा का आदान-प्रदान करते हैं। उपकरणों के बीच इंटीग्रेशन से सूचनाएं समग्रता में प्राप्त होती हैं।
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