फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   International youth day special story of Dr Ashwani Mishra in Gorakhpur

पिता की बात सुनकर इस बेटे ने बदला अपना करियर, आज डॉक्टर बनकर लोगों की कर रहा सेवा

Wed, 12 Aug 2020 02:21 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 12 Aug 2020 02:21 PM IST
विज्ञापन
International youth day special story of Dr Ashwani Mishra in Gorakhpur
डॉ. अश्वनी मिश्रा। - फोटो : अमर उजाला।

अगर इंजीनियर बनोगे तो कमाकर केवल अपने के लिए कुछ करोगे। अगर डॉक्टर बन गए तो देश की सेवा में अमूल्य योगदान रहेगा। पिता के यही शब्द डॉ अश्वनी मिश्रा के जीवन का टर्निंग प्वाइंट रहा। इन्हीं शब्दों को जीवन का सार बनाते हुए मेरठ से एमबीबीएस किया और फिर केजीएमयू लखनऊ से एमडी की डिग्री हासिल की।

विज्ञापन


गोल्ड मेडलिस्ट के साथ बेस्ट पास आउट के खिताब से नवाजे गए। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में चयन हुआ और बीआरडी मेडिकल कॉलेज में आ गए। 32 वर्ष की उम्र में मेडिकल कॉलेज के चेस्ट रोग का विभागाध्यक्ष बन गए। तब से लगातार मरीजों की सेवा में जुटे हैं।
विज्ञापन


अब कोरोना वार्ड में सबसे चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं। संक्रमित मरीजों के चेस्ट का एक्स-रे देखना व मरीजों को सलाह देना रोज की दिनचर्या में शामिल है। देवरिया के बरहज के छोटे से गांव टीकर के रहने वाले डॉ अश्वनी मिश्रा की शुरुआती शिक्षा गांव के प्राथमिक स्कूल में हुई। पिता स्व. हरिशंकर मिश्रा अरुणाचल प्रदेश में शिक्षक थे। प्रारंभिक शिक्षा के बाद वह अश्वनी को अपने साथ लेकर चले गए।

विज्ञापन
विज्ञापन

पेरिस और यूरोप में पढ़ चुके हैं शोध पत्र

पिता जिस हायर सेकेंड्री स्कूल में पढ़ाते थे, वहीं से 2004 में इंटरमीडिएट किया। 2004 में एमबीबीएस और इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा दी। दोनों में सफलता भी मिली। एनआईटी कोयंबटूर से बीटेक करने का मौका मिला लेकिन पिता की बातों को ध्यान में रखकर मेरठ मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने का फैसला किया।

डॉ. अश्विनी के मुताबिक इंर्टनशिप के दौरान ही वर्ष 2010 में एमडी के लिए सेलेक्शन हुआ। इसी वर्ष सेंट्रल गर्वनमेंट हेल्थ सर्विसेज और लोक सेवा आयोग में भी चयन हो गया। इसके बावजूद केजीएमयू लखनऊ से एमडी करने का फैसला लिया।

2013 में एमडी की पढ़ाई पूरी हुई, फिर दो वर्षों तक सीनियर रेजिडेंट के पद पर काम भी करते रहे। बेहतर पढ़ाई के दम पर गोल्ड मेडलिस्ट के साथ बेस्ट पास आउट का खिताब भी मिला। इस बीच उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के जरिए चयन बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हो गया।

काबिलियत के दम पर 32 साल की उम्र में चेस्ट रोग का विभागाध्यक्ष बना दिया गया। वह पिता को याद करते हैं, फिर कहते हैं पिता की बात न मानता तो शायद इंजीनियर बनता। ऐसा होता तो कोरोना जैसी चुनौती में काम करने का बेहतर अवसर नहीं मिल पाता।

डॉ अश्वनी मिश्रा एक बार बीआरडी मेडिकल कॉलेज की ओर से टीबी रोग पर शोध पत्र पेरिस में जाकर पढ़ चुके हैं। इनके शोध पत्र को काफी सराहा गया था। इसके अलावा यूरोप में लंग्स कैंसर पर भी इनका शोध पत्र पढ़ा गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed