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हैरानी: तिनकोनिया वन प्रभाग में मिला विलुप्त प्रजाति का घायल सफेद गिद्ध, यहां चल रहा इलाज
Sun, 19 Dec 2021 02:35 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 19 Dec 2021 02:35 PM IST
सार
घायल पक्षी का इलाज चिड़ियाघर के पशु अस्पताल में किया जा रहा है। स्वस्थ होने के बाद उसे फिर छोड़ दिया जाएगा।
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विलुप्तप्राय श्रेणा का गिद्ध उपचार के लिए चिड़ियाघर लाया गया है।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
तिनकोनिया वन प्रभाग क्षेत्र के एक गांव से शनिवार को सफेद प्रजाति का एक गिद्ध मिला है। गांव वालों की सूचना पर वन विभाग की टीम घायल गिद्ध को लेकर चिड़ियाघर आई है। पशु अस्पताल में उसका इलाज किया जा रहा है। स्वस्थ होने के बाद उसे छोड़ दिया जाएगा। विलुप्त प्राय प्रजाति के गिद्ध मिलने से चिड़ियाघर की टीम खुश भी है और हैरान भी।
जानकारी के अनुसार सफेद प्रजाति के गिद्ध को अति संकटग्रस्त जीवों की श्रेणी में रखा गया है। सफेद गिद्ध को वाइट रम्पड वल्चर कहा जाता है। विलुप्त हो चुके सफेद गिद्ध को देखे जाने से उनके होने का भी सुबूत मिला है। दरसअल, नब्बे के दशक तक सफेद गिद्ध पूरे एशिया में बड़ी संख्या में पाए जाते थे। दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला मुर्दा खोर पक्षी आज बहुत कम संख्या में पाया जाता है। पर्यावरण मित्र पक्षी को बचाने और संरक्षित करने के लिए कैंपियरगंज क्षेत्र में वल्चर गिद्ध सेंटर बनाया जा रहा है।
डीएफओ विकास यादव ने बताया कि खेतों में फर्टिलाइजर के अधिक प्रयोग और पालतू जानवरों को बीमारियों से बचाने के लिए दी जाने वाली डाइक्लोफेनेक दवा ने गिद्धों को विलुप्त होने के कगार पर पहुंचा दिया है। मृत मवेशी के शरीर से रसायन गिद्ध तक पहुंचकर उसकी किडनी पर गंभीर असर डालता है, जिससे उसकी मौत हो जाती है। यही कारण है कि गिद्धों की आबादी तेजी से कम हो गई।
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चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक डॉ योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि सफेद गिद्ध के मिलने से साबित हो गया कि यह प्रजाति अभी बची हुई है। पहले इनकी अच्छी खासी तादाद होती थी, लेकिन कुछ वर्षों से यह गायब होते चले गए। उन्होंने बताया कि घायल मिले सफेद गिद्ध को स्वस्थ होने के बाद छोड़ दिया जाएगा।
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जानकारी के अनुसार सफेद प्रजाति के गिद्ध को अति संकटग्रस्त जीवों की श्रेणी में रखा गया है। सफेद गिद्ध को वाइट रम्पड वल्चर कहा जाता है। विलुप्त हो चुके सफेद गिद्ध को देखे जाने से उनके होने का भी सुबूत मिला है। दरसअल, नब्बे के दशक तक सफेद गिद्ध पूरे एशिया में बड़ी संख्या में पाए जाते थे। दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला मुर्दा खोर पक्षी आज बहुत कम संख्या में पाया जाता है। पर्यावरण मित्र पक्षी को बचाने और संरक्षित करने के लिए कैंपियरगंज क्षेत्र में वल्चर गिद्ध सेंटर बनाया जा रहा है।
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डीएफओ विकास यादव ने बताया कि खेतों में फर्टिलाइजर के अधिक प्रयोग और पालतू जानवरों को बीमारियों से बचाने के लिए दी जाने वाली डाइक्लोफेनेक दवा ने गिद्धों को विलुप्त होने के कगार पर पहुंचा दिया है। मृत मवेशी के शरीर से रसायन गिद्ध तक पहुंचकर उसकी किडनी पर गंभीर असर डालता है, जिससे उसकी मौत हो जाती है। यही कारण है कि गिद्धों की आबादी तेजी से कम हो गई।
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चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक डॉ योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि सफेद गिद्ध के मिलने से साबित हो गया कि यह प्रजाति अभी बची हुई है। पहले इनकी अच्छी खासी तादाद होती थी, लेकिन कुछ वर्षों से यह गायब होते चले गए। उन्होंने बताया कि घायल मिले सफेद गिद्ध को स्वस्थ होने के बाद छोड़ दिया जाएगा।