गोरखपुर उद्योग: अकेले ही पूरी कर सकते हैं खाद कारखाना की जरूरतें, जानिए कैसे
यहां के उद्योगों में प्रतिदिन तीन लाख प्लास्टिक के बोरे उत्पादन करने की क्षमता, खाद कारखाना में महीने में 30 लाख प्लास्टिक बोरे की है आवश्यकता।
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गोरखपुर में खाद कारखाने की हाई डेंसिटी पॉलिथीन (एचडीपी) यानि, उत्कृष्ट गुणवत्ता वाली प्लास्टिक बोरों की जरूरतों को गोरखपुर के उद्योग ही पूरा कर सकते हैं। जहां, खाद कारखाने को प्रत्येक महीने करीब 30 लाख प्लास्टिक बोरों की आवश्यकता पड़ेगी, वहीं प्लास्टिक बोरे तैयार करने वाली गोरखपुर की फैक्ट्रियां हरेक दिन तीन लाख बोरियां तैयार करने की क्षमता रखती हैं।
वैसे तो गोरखपुर में प्लास्टिक बोरियां (एचडीपी प्लास्टिक बैग्स) तैयार करने वाली पांच फैक्ट्रियां हैं, लेकिन उत्तरप्रदेश के अलावा विभिन्न प्रदेशों के खाद कारखानों को एचडीपी प्लास्टिक बैग्स आपूर्ति करने की वजह से गीडा की मॉडर्न पैकेजिंग और गोरखनाथ औद्योगिक क्षेत्र की मॉडर्न लैमिनेटर्स को इस उत्पाद को तैयार करने में विशेषज्ञता है।
इन दोनों फैक्ट्रियां प्रत्येक दिन करीब तीन लाख प्लास्टिक बोरियां तैयार करती हैं। ऐसे में अगर गोरखपुर खाद कारखाना प्रशासन गोरखपुर के उद्योगों को अनुपूरक (एंसिलरी) उद्योग का दर्जा देते हुए, एचडीपी प्लास्टिक की बोरियों की आपूर्ति की अनुमति दे तो, न सिर्फ खाद कारखाने को उच्च गुणवत्ता वाली बोरियां आसानी से गोरखपुर से ही उपलब्ध हो जाएंगी, बल्कि यहां के उद्योगों को भी काफी फायदा होगा।
दूसरे जिले या प्रदेशों में प्लास्टिक की बोरियों की आपूर्ति मजबूरी
गोरखपुर खाद कारखाना द्वारा यहां के उद्योगों को एंसिलरी उद्योगों का दर्जा नहीं दिए जाने की वजह से अपने उत्पादों को प्रदेश के दूसरे जिलों या फिर अन्य प्रदेशों को आपूर्ति करने की मजबूरी है। दरअसल करीब 8,600 करोड़ की लागत से बना गोरखपुर का खाद कारखाना का ट्रायल रन हो चुका है। इसके खुलने के बाद यह उम्मीद जताई जा रही थी कि इससे न सिर्फ हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा, बल्कि कारखाने की जरूरतों को पूरी करने वाली फैक्ट्रियों की राह भी खुलेगी। लेकिन, ऐसा होता दिख नहीं रहा है।
गोरखपुर खाद कारखाना को महीने में 30 लाख एचडीपी बोरियों की जरूरत
खाद कारखाने में रोजाना 85,555 बोरी नीम कोटेड यूरिया का उत्पादन किया जाना है। ऐसे में हर महीने करीब 30 लाख हाई डेंसिटी पॉलिथीन (एचडीपी) यानी उत्कृष्ट श्रेणियों वाली प्लास्टिक की बोरियों की आवश्यकता पड़ेगी।
यहां की बोरियों की आपूर्ति महाराष्ट्र, एमपी समेत अन्य प्रदेशों में होती हैं। गोरखपुर की मॉडर्न पैकेजिंग और मॉडर्न लैमिनेटर्स, इफको के प्रयागराज और बरेली, इंडो गल्फ के जगदीशपुर, टाटा केमिकल्स के बदायूं इकाइयों के अलावा कानपुर की खाद कारखानों में बैग्स की आपूर्ति करते हैं। इनके अलावा पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र समेत अन्य खाद कारखानों में भी एचडीपी प्लास्टिक बोरियों की सप्लाई होती है।
मॉडर्न लैमिनेटर्स के निदेशक किशन बथवाल ने कहा कि हमारी दो फैक्ट्रियों मॉडर्न लैमिनेटर्स और मॉडर्न पैकेजिंग में प्रत्येक दिन करीब तीन लाख खाद पैकेजिंग की बोरियां तैयार होती है। ऐसे में हम अकेले ही खाद कारखाने की एचडीपी प्लास्टिक बोरियों की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। अगर खाद कारखाना प्रबंधन, यहां के उद्योगों को एंसिलरी उद्योगों का दर्जा दे दे तो यह गोरखपुर के उद्योगों के लिए काफी बेहतर होगा।
चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज महासचिव प्रवीण मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वोकल फॉर लोकल का नारा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयास से खाद कारखाना शुरू होने के बाद यहां के उद्यमी काफी दिनों से आस लगाए हुए थे कि खाद कारखाना यहां के उद्योगों को अनुपूरक उद्योगों का दर्जा देगा, लेकिन ऐसा नहीं होने से उद्यमियों में मायूसी है। खाद कारखाना प्रबंधन से भी अपील है कि गोरखपुर के हित में निर्णय लेते हुए कुछ बेहतर कदम उठाएं।