लॉकडाउन में इस काम के लिए नहीं लेनी पड़ेगी प्रशासन से इजाजत, ऐसे कर सकते हैं शुरूआत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहर के उद्योगपतियों के लिए राहत भरी खबर है। अब किसी भी उद्योग को चलाने के लिए प्रशासन से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। उद्योगपति स्व घोषणापत्र देकर उनके उद्योगों को शुरू कर सकते हैं। गीडा के उद्योगों को चलाने के लिए यह पत्र सीईओ गीडा को और गोरखपुर इंडस्ट्रियल इस्टेट और गोरखपुर इंडस्ट्रियल एरिया के उद्योगों को चलाने के लिए यह पत्र उपायुक्त उद्योग को दिया जा सकता है।
उद्योगों को शुरू होने में आने वाले अड़चनों को दूर करने के लिए सरकार की ओर से लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। लॉकडाउन-3.0 में विभिन्न प्रकार के बाजारों के खुलने के बाद उद्योगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर सरकार ने उद्योगों को शुरू कराने के लिए यह व्यवस्था शुरू कराई है।
मुख्य सचिव ने जारी कर दिया है आदेश
जिन इकाईयों को चलाये जाने योग्य की श्रेणी में रखा गया है, उनके लिए अब विशेष अनुमति या अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की जरूरत नहीं होगी। इसके लिए फैक्ट्री मालिक को सिर्फ स्व घोषणापत्र देना होगा। प्रदेश के मुख्य सचिव ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है।
देनी होगी कामगारों की डिटेल
स्व-घोषणापत्र में फैक्ट्री मालिक को कामगारों की डिटेल भी देनी होगी। इसके बाद वर्कर्स का अलग से पास जारी कराने की जरूरत नहीं होगी। फैक्ट्री मालिक द्वारा दिया गया परिचय पत्र ही आने-जाने के लिए मान्य होगा।
रेड जोन में स्थित यूनिट्स का स्व घोषणापत्र मिलने के बाद औद्योगिक विकास विभाग या सूक्ष्म, लघु व मध्यम विभाग के जनपद स्तरीय अधिकारियों द्वारा अनुमन्य इकाईयों की सूची जिलाधिकारी को उपलब्ध कराये जाने पर तीन दिन के भीतर संचालित करने के आदेश जारी किये जाएंगे।
टेक्सटाइल उद्योगों के संचालन में अड़चन
गोरखपुर की 80 प्रतिशत औद्योगिक इकाइयां शुरू हो चुकी हैं, लेकिन अब भी टेक्सटाइल संबंधी उद्योगों को शुरू होने में काफी दिक्कतें हैं। चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष और बीएन डायर्स के एमडी विष्णु अजीत सरिया ने बताया कि प्रोसेसिंग यूनिट्स को शुरू करने में अभी काफी दिक्कतें हैं।
कच्चे माल से लेकर बाजार तक में दिक्कत है। वहीं चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष एसके अग्रवाल ने बताया कि गोरखपुर के टेक्सटाइल उद्योगों के सामने आ रही दिक्कतों को उपायुक्त उद्योग को अवगत कराया गया है। इन उद्योगों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इनको शुरू करने के बाद लगातार चलाना होता है। ऐसे में तीनों शिफ्ट में काम जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर प्रोसेसिंग यूनिट्स शुरू हो पाना बहुत मुश्किल है।
कमिश्नर ने बुलाई बैठक
उपायुक्त उद्योग आरके शर्मा ने बताया कि चेंबर आफ इंडस्ट्रीज के पदाधिकारियों ने टेक्सटाइल उद्योगों संबंधी परेशानियों को रखा है। गोरखपुर में संचालित प्रोसेसिंग इकाइयों के सामने आ रही परेशानियों को दूर करने के लिए बृहस्पतिवार को कमिश्नर ने बैठक बुलाई है। उनके समक्ष प्रोसेसिंग यूनिट्स के अलावा टेक्सटाइल संबंधी कारोबार के मसलों को रखा जाएगा।