{"_id":"698791f521daea0d25019058","slug":"increased-protein-levels-in-urine-delaying-arrival-can-be-life-threatening-gorakhpur-news-c-7-gkp1038-1222662-2026-02-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: यूरिन में प्रोटीन की मात्रा बढ़ी, देरी से पहुंचे तो हो सकता है जीवन का खतरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: यूरिन में प्रोटीन की मात्रा बढ़ी, देरी से पहुंचे तो हो सकता है जीवन का खतरा
विज्ञापन
- लापरवाही से हाई बीपी, संकट में गर्भस्थ शिशु की जान
- एम्स ओपीडी में आने वाली गर्भवती में से 20 प्रतिशत की बीपी रहती है हाई
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में लापरवाही के कारण हाई बीपी की समस्या आम हो रही है। इसका असर किडनी पर पड़ता है और यूरिन में प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है। दवा लेने को लेकर फैली भ्रांति से समस्या और बढ़ जाती है।
एम्स के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की डॉ. आराधना सिंह ने बताया कि ओपीडी में आने वाली गर्भवती में से लगभग 20 प्रतिशत महिलाएं हाई बीपी और यूरिन में प्रोटीन निकलने की समस्या से पीड़ित हैं। डॉक्टरों ने महिलाओं को इस स्थिति से निपटने के लिए जागरूक करना भी शुरू कर दिया है। हाई बीपी और यूरिन में प्रोटीन के कारण गर्भस्थ शिशु तक खून का प्रवाह सही से नहीं हो पाता है। इसे प्रीक्लेम्पसिया कहते हैं। इस स्थिति में अल्ट्रासाउंड जांच से पता चलता है कि गर्भस्थ शिशु में भी खून का प्रवाह प्रभावित होता है और कोशिकाओं में सिकुड़न आ जाती है। समय पर उपचार न मिलने पर बच्चे की जान को गंभीर खतरा होता है।
कोट
प्रीक्लेम्पसिया गर्भावस्था में होने वाली गंभीर स्थिति है। इसमें महिला का रक्तचाप बढ़ जाता है और मूत्र में प्रोटीन आने लगता है। यह अक्सर गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के बाद होता है। गर्भावस्था शुरू होते ही महिलाओं को विशेषज्ञ से संपर्क कर खून, पेशाब और रक्तचाप की समय पर जांच करानी चाहिए।
विज्ञापन
- डॉ. आराधना सिंह, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग विशेषज्ञ
विज्ञापन
- एम्स ओपीडी में आने वाली गर्भवती में से 20 प्रतिशत की बीपी रहती है हाई
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में लापरवाही के कारण हाई बीपी की समस्या आम हो रही है। इसका असर किडनी पर पड़ता है और यूरिन में प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है। दवा लेने को लेकर फैली भ्रांति से समस्या और बढ़ जाती है।
एम्स के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की डॉ. आराधना सिंह ने बताया कि ओपीडी में आने वाली गर्भवती में से लगभग 20 प्रतिशत महिलाएं हाई बीपी और यूरिन में प्रोटीन निकलने की समस्या से पीड़ित हैं। डॉक्टरों ने महिलाओं को इस स्थिति से निपटने के लिए जागरूक करना भी शुरू कर दिया है। हाई बीपी और यूरिन में प्रोटीन के कारण गर्भस्थ शिशु तक खून का प्रवाह सही से नहीं हो पाता है। इसे प्रीक्लेम्पसिया कहते हैं। इस स्थिति में अल्ट्रासाउंड जांच से पता चलता है कि गर्भस्थ शिशु में भी खून का प्रवाह प्रभावित होता है और कोशिकाओं में सिकुड़न आ जाती है। समय पर उपचार न मिलने पर बच्चे की जान को गंभीर खतरा होता है।
विज्ञापन
कोट
प्रीक्लेम्पसिया गर्भावस्था में होने वाली गंभीर स्थिति है। इसमें महिला का रक्तचाप बढ़ जाता है और मूत्र में प्रोटीन आने लगता है। यह अक्सर गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के बाद होता है। गर्भावस्था शुरू होते ही महिलाओं को विशेषज्ञ से संपर्क कर खून, पेशाब और रक्तचाप की समय पर जांच करानी चाहिए।
विज्ञापन
- डॉ. आराधना सिंह, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग विशेषज्ञ